प्रयागराज में पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा- जिनको तिलक, सिंदूर से दिक्कत पाकिस्तान चला जाए

प्रयागराज में पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा- जिनको तिलक, सिंदूर से दिक्कत पाकिस्तान चला जाए

Pandit Dhirendra Krishna Shastri in Prayagraj: प्रयागराज में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मुंबई की प्राइवेट कंपनी पर बड़ा हमला किया है। उन्होंने कहा कि कंपनी के अंदर तिलक, सिंदूर और मंगलसूत्र पहनकर जाने पर रोक लगा दी गई थी। उन्होंने कहा कि जिनको तिलक सिंदूर और मंगलसूत्र से परेशानी है वह  लाहौर चले जाए। इस मौके पर उन्होंने गंगा, जमुना, सरस्वती के संगम के महत्व भी बताया। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री तीन दिवसीय हनुमंत कथा सुनाने के लिए संगम नगरी आए हैं। यहां पर विशाल पंडाल यमुना नदी के किनारे अरैल में बनाया गया है।

मुंबई की कंपनी से बोलें, “सुधर जाओ।”

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के अरैल में आयोजित हनुमंत कथा में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि मुंबई में एक कंपनी है, जिसका नाम लेंसकार्ट है। उसने अपनी कंपनी के कर्मचारियों से कहा है कि ऑफिस में कोई मंगलसूत्र, तिलक या सिंदूर लगाकर नहीं आ सकता है। धीरेंद्र शास्त्री ने उन्हें ठठरी करके संबोधित किया और बोले, “तू अपनी कंपनी लाहौर में चला, भारत में क्यों चला मार रहा है?”

पतली गली से लाहौर चला जा

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि हमारे बाप का भारत है। जिनको तिलक, सिंदूर, राम, या हनुमान से दिक्कत हो पतली गली से लाहौर चले जाएं। लेंसकार्ट वालों से उन्होंने कहा कि गड़बड़ हो गई है, अभी भी मौका है, सुधर जाओ। वरना भारत का कानून सुधार देगा। यूपी की पुलिस वैसे ही फेमस है, गाड़ी पलट जाती है।

आज तिलक, मंगलसूत्र से दिक्कत…

बाबा बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर ने कहा कि आज उन्होंने तिलक और मंगलसूत्र पर उंगली उठाई है, कल को बिरादरी पर उंगली उठाएंगे तो सनातन बच्चों पर भी उठायेगे, तो कल रामायण पर भी उंगली उठाएगा। अगर एक नहीं हुए तो कल गीता और रामायण पर भी उंगली उठाएंगे। अब संगम से सीख लेने की जरूरत है, जहां तीन नदियों के मिलने से महासंगम बनता है। इसी प्रकार, हम लोग सभी जातियों को छोड़कर हिंदू एकता का परिचय दें।

प्रयाग एकता प्रतीक

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि प्रयाग एकता करना सीखता है। दुनिया का सबसे बड़ा कुंभ प्रयाग में लगाया गया है, जो सनातन का पवित्र स्थल है। प्रयाग में अक्षय वट, लेटे हुए हनुमान हैं। गंगा, जमुना, सरस्वती यहीं पर मिलती हैं, लेकिन आगे बढ़ने के साथ ही केवल गंगा रह जाती है, जहां लोग मरने के बाद आते हैं।

प्रयाग की जनता बड़ी भाग्यशाली

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस मौके पर प्रयाग की जनता से कहा कि आप बड़े भाग्यशाली हैं कि जहां लोग मरने के बाद आते हैं, आप यहां जिंदा पहुंच गए। उन्होंने लोगों से कहा कि जिंदा में ही प्रयागराज आएं, वरना ₹25 के मटके में आना पड़ेगा। उन्होंने प्रयाग की जनता से कहा कि अगले तीन दिनों तक हनुमान जी की कथा होगी। हनुमान जी एकता के प्रतीक हैं, बल, बुद्धि, और विद्या के दाता हैं। प्रयागराज में पहले दिन आज सुंदर कांड की कथा सुनाई।  धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में उन्होंने जहां खत्म किया था उसके आगे की कथा प्रयागराज में सुनाऊंगा। ‌

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