मुजफ्फरपुर का मॉडल सदर अस्पताल…यहां हेल्थ सर्टिफिकेट बिना शारीरिक जांच के मिल जा रहा है। महज 1000 रुपए में हॉस्पिटल में मौजूद कथित कर्मी सब सेट कर दे रहा। पैसा मिलते आधे घंटे में सिर्टिफिकेट इश्यू। हॉस्पिटल में चल रहे भ्रष्टाचार के खेल का खुलासा हुआ है। अमरनाथ यात्रा के लिए 8 अप्रैल से CHC (कंपलसरी हेल्थ सर्टिफिकेट) बनाया जा रहा है। ऐसे में कई श्रद्धालु अपना फिटनेश सर्टिफिकेट बनवाने सदर अस्पताल पहुंचते हैं। नियमानुसार जांच कराने में समय लगता है…ऐसे में कुछ कर्मी ऐसे हैं जो ये काम मिनटों में करवा दे रहे। बदले में 1000 से 5000 रुपए तक वसूले जा रहे। इस खेल में फिटनेश सर्टिफिकेट इश्यू करने वाले डॉक्टर की भी मिलीभगत सामने आई है। सबसे पहले पढ़िए, दलाल और रिपोर्टर के बीच बातचीत रिपोर्टर – किसके अकाउंट में पैसा मंगवाए थे?
दलाल – एक लड़का है। अनूप
रिपोर्टर – कौन है वो? क्या करता है यहां?
दलाल – एक लड़का है कुछ नहीं करता है यहां।
रिपोर्टर – तुम्हारी यहां क्या जिम्मेदारी है
दलाल – स्टूडेंट हूं मैं
रिपोर्टर – ₹1000 में किस-किस को पैसा देते हो, डॉक्टर को कितना जाता है?
दलाल – डॉक्टर को नहीं दिए हैं, जांच वाले को दिए हैं।
रिपोर्टर – किस डॉक्टर का साइन है?
दलाल – नवीन चंद्र नयन बाकी अन्य सवालों पर युवक ने चुप्पी साध ली। अब सिलसिलेवार तरीके से जानिए कैसे हुआ खुलासा एक युवक हेल्थ सर्टिफिकेट बनवाने सदर हॉस्पिटल पहुंचा। यहां उससे आसानी से काम करवाने के लिए कुछ कर्मियों ने रुपए की डिमांड की। 1000 रुपए में डील पक्की हुई। युवक ने बताया कि रुपए देने के बाद उसकी किसी तरह का जांच नहीं हुई। एक लड़के ने दूसरे से मिलवाया..उसने तीसरे के नंबर पर पैसे मंगवाए। पैसे मिलते हीं…कुछ घंटों में डॉक्टर के मुहर और साइन के साथ उसे सर्टिफिकेट उपलब्ध करा दिया गया। बिना मरीज को देखे जारी कर रहे सर्टिफिकेट इस पूरी प्रक्रिया में डॉक्टर और मरीज के बीच कोई संवाद नहीं होता। बिना ब्लड प्रेशर जांचे, बिना ईसीजी (ECG) किए और बिना किसी फिजिकल स्क्रीनिंग के ही मेडिकल ऑफिसर सीधे कागजों पर मुहर और हस्ताक्षर कर रहे हैं। जिस सर्टिफिकेट को हासिल करने के लिए लंबी कतार और विस्तृत जांच की जरूरत है, वह पैसे के दम पर अस्पताल की कैंटीन या बरामदे में बैठकर ही उपलब्ध हो जा रहा है। इस गंभीर अनियमितता के संबंध में मेडिकल ऑफिसर डॉ. नवीन चन्द्र नयन से सवाल पूछे जाने पर उन्होंने स्वीकार किया कि काम के दबाव के कारण वे कई बार बिना मरीज को देखे ही दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर देते हैं। ‘मैं सिविल कोर्ट का डॉक्टर हूं, सदर अस्पताल का नहीं’ अपनी सफाई में डॉक्टर नवीन चंद्र नयन, मेडिकल ऑफिसर, ने कहा कि मैं सिविल कोर्ट का डॉक्टर हूं, सदर अस्पताल का नहीं। लेकिन सदर अस्पताल में सीएचसी बनवाने के लिए मेरा नाम दिया गया है। हेल्थ सर्टिफिकेट बनवाने के लिए या तो कैंडिडेट की जांच के बाद मेरे पास सर्टिफिकेट के लिए भेजा जाता है या फिर कैंडिडेट को मेरे पास आना होता है, लेकिन कभी-कभी बिना कैंडिडेट की जांच किए मजबूरी में साइन करना पड़ता है। डॉक्टर का कहना है कि ऑफिस से कहा जाता है कि साइन कर दीजिए, सब ठीक है। डॉक्टर ने बताया कि मैं मानता हूं कि थोड़ा मिस्टेक हो गया है। अक्सर कोई पेशेंट आता है तो उसे अच्छे तरीके से चेकअप के बाद ही सर्टिफिकेट बनाता हूं। डॉक्टर ने सफाई देते हुए कहा कि मैं कोर्ट में बैठता हूं, वहां ड्यूटी नहीं कर पाता, लेकिन बावजूद इसके मेरा नाम सर्टिफिकेट बनाने वाली टीम में दिया गया। ऑफिस से कहा गया कि आप वहां बस साइन कर दीजिएगा, यहां जांच हो जाएगी। लेकिन ऑफिस में किसने कहा था, यह पूछे जाने पर डॉक्टर ने टालमटोल करते हुए किसी का नाम नहीं बताया। सिविल सर्जन बोले, उच्चस्तरीय जांच होगी मामले को लेकर सदर अस्पताल मुजफ्फरपुर के सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार ने बताया कि हां, फर्जी तरीके से मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने का मामला सामने आया है। इस मामले की जांच कर दोषी डॉक्टर को कमेटी से हटाया जाएगा। साथ ही इसमें शामिल अन्य लोगों पर भी कार्रवाई की जाएगी। हेल्थ सर्टिफिकेट केवल वास्तविक और योग्य अभ्यर्थियों का ही बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस तरह के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए अस्पताल परिसर में सख्ती बढ़ाई जा रही है। यदि कोई संदिग्ध या फर्जी व्यक्ति परिसर में पाया जाता है तो उसकी एंट्री पर तत्काल रोक लगाई जाएगी। सिविल सर्जन ने कहा कि पूरे मामले की वे स्वयं गहन जांच करेंगे। सदर अस्पताल के सुपरिटेंडेंट ने स्पेशल टीम का किया गठन मामले की जांच के लिए सदर हॉस्पिटल के सुपरिटेंडेंट डॉ. ज्ञानेंदू शेखर ने एक विशेष टीम के गठन का निर्देश दिया। टीम यह पता लगाएगी कि बिना जांच के सर्टिफिकेट जारी करने के पीछे कौन-कौन से कर्मी और बिचौलिए शामिल हैं। क्या है सर्टिफिकेट बनवाने की पूरी प्रक्रिया अमरनाथ यात्रा 2026 के लिए मुजफ्फरपुर में हेल्थ सर्टिफिकेट (Compulsory Health Certificate – CHC) मुख्य रूप से सदर अस्पताल में बनता है। इसके अलावा, श्राइन बोर्ड द्वारा अधिकृत अन्य सरकारी अस्पतालों या डॉक्टरों के पास भी आप चेकअप कराकर 8 अप्रैल 2026 के बाद का वैध सर्टिफिकेट प्राप्त कर सकते हैं। प्रक्रिया: आपको निर्धारित CHC फॉर्म भरकर, सरकारी डॉक्टर से जांच (चेकअप) कराकर उस पर हस्ताक्षर और स्टैंप लगवाना होगा। पात्रता: 13 से 70 वर्ष के बीच के व्यक्ति ही यात्रा के लिए पात्र हैं। दस्तावेज़: अपना आधार कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो और जांच के बाद भरा हुआ मेडिकल फॉर्म। मुजफ्फरपुर का मॉडल सदर अस्पताल…यहां हेल्थ सर्टिफिकेट बिना शारीरिक जांच के मिल जा रहा है। महज 1000 रुपए में हॉस्पिटल में मौजूद कथित कर्मी सब सेट कर दे रहा। पैसा मिलते आधे घंटे में सिर्टिफिकेट इश्यू। हॉस्पिटल में चल रहे भ्रष्टाचार के खेल का खुलासा हुआ है। अमरनाथ यात्रा के लिए 8 अप्रैल से CHC (कंपलसरी हेल्थ सर्टिफिकेट) बनाया जा रहा है। ऐसे में कई श्रद्धालु अपना फिटनेश सर्टिफिकेट बनवाने सदर अस्पताल पहुंचते हैं। नियमानुसार जांच कराने में समय लगता है…ऐसे में कुछ कर्मी ऐसे हैं जो ये काम मिनटों में करवा दे रहे। बदले में 1000 से 5000 रुपए तक वसूले जा रहे। इस खेल में फिटनेश सर्टिफिकेट इश्यू करने वाले डॉक्टर की भी मिलीभगत सामने आई है। सबसे पहले पढ़िए, दलाल और रिपोर्टर के बीच बातचीत रिपोर्टर – किसके अकाउंट में पैसा मंगवाए थे?
दलाल – एक लड़का है। अनूप
रिपोर्टर – कौन है वो? क्या करता है यहां?
दलाल – एक लड़का है कुछ नहीं करता है यहां।
रिपोर्टर – तुम्हारी यहां क्या जिम्मेदारी है
दलाल – स्टूडेंट हूं मैं
रिपोर्टर – ₹1000 में किस-किस को पैसा देते हो, डॉक्टर को कितना जाता है?
दलाल – डॉक्टर को नहीं दिए हैं, जांच वाले को दिए हैं।
रिपोर्टर – किस डॉक्टर का साइन है?
दलाल – नवीन चंद्र नयन बाकी अन्य सवालों पर युवक ने चुप्पी साध ली। अब सिलसिलेवार तरीके से जानिए कैसे हुआ खुलासा एक युवक हेल्थ सर्टिफिकेट बनवाने सदर हॉस्पिटल पहुंचा। यहां उससे आसानी से काम करवाने के लिए कुछ कर्मियों ने रुपए की डिमांड की। 1000 रुपए में डील पक्की हुई। युवक ने बताया कि रुपए देने के बाद उसकी किसी तरह का जांच नहीं हुई। एक लड़के ने दूसरे से मिलवाया..उसने तीसरे के नंबर पर पैसे मंगवाए। पैसे मिलते हीं…कुछ घंटों में डॉक्टर के मुहर और साइन के साथ उसे सर्टिफिकेट उपलब्ध करा दिया गया। बिना मरीज को देखे जारी कर रहे सर्टिफिकेट इस पूरी प्रक्रिया में डॉक्टर और मरीज के बीच कोई संवाद नहीं होता। बिना ब्लड प्रेशर जांचे, बिना ईसीजी (ECG) किए और बिना किसी फिजिकल स्क्रीनिंग के ही मेडिकल ऑफिसर सीधे कागजों पर मुहर और हस्ताक्षर कर रहे हैं। जिस सर्टिफिकेट को हासिल करने के लिए लंबी कतार और विस्तृत जांच की जरूरत है, वह पैसे के दम पर अस्पताल की कैंटीन या बरामदे में बैठकर ही उपलब्ध हो जा रहा है। इस गंभीर अनियमितता के संबंध में मेडिकल ऑफिसर डॉ. नवीन चन्द्र नयन से सवाल पूछे जाने पर उन्होंने स्वीकार किया कि काम के दबाव के कारण वे कई बार बिना मरीज को देखे ही दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर देते हैं। ‘मैं सिविल कोर्ट का डॉक्टर हूं, सदर अस्पताल का नहीं’ अपनी सफाई में डॉक्टर नवीन चंद्र नयन, मेडिकल ऑफिसर, ने कहा कि मैं सिविल कोर्ट का डॉक्टर हूं, सदर अस्पताल का नहीं। लेकिन सदर अस्पताल में सीएचसी बनवाने के लिए मेरा नाम दिया गया है। हेल्थ सर्टिफिकेट बनवाने के लिए या तो कैंडिडेट की जांच के बाद मेरे पास सर्टिफिकेट के लिए भेजा जाता है या फिर कैंडिडेट को मेरे पास आना होता है, लेकिन कभी-कभी बिना कैंडिडेट की जांच किए मजबूरी में साइन करना पड़ता है। डॉक्टर का कहना है कि ऑफिस से कहा जाता है कि साइन कर दीजिए, सब ठीक है। डॉक्टर ने बताया कि मैं मानता हूं कि थोड़ा मिस्टेक हो गया है। अक्सर कोई पेशेंट आता है तो उसे अच्छे तरीके से चेकअप के बाद ही सर्टिफिकेट बनाता हूं। डॉक्टर ने सफाई देते हुए कहा कि मैं कोर्ट में बैठता हूं, वहां ड्यूटी नहीं कर पाता, लेकिन बावजूद इसके मेरा नाम सर्टिफिकेट बनाने वाली टीम में दिया गया। ऑफिस से कहा गया कि आप वहां बस साइन कर दीजिएगा, यहां जांच हो जाएगी। लेकिन ऑफिस में किसने कहा था, यह पूछे जाने पर डॉक्टर ने टालमटोल करते हुए किसी का नाम नहीं बताया। सिविल सर्जन बोले, उच्चस्तरीय जांच होगी मामले को लेकर सदर अस्पताल मुजफ्फरपुर के सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार ने बताया कि हां, फर्जी तरीके से मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने का मामला सामने आया है। इस मामले की जांच कर दोषी डॉक्टर को कमेटी से हटाया जाएगा। साथ ही इसमें शामिल अन्य लोगों पर भी कार्रवाई की जाएगी। हेल्थ सर्टिफिकेट केवल वास्तविक और योग्य अभ्यर्थियों का ही बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस तरह के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए अस्पताल परिसर में सख्ती बढ़ाई जा रही है। यदि कोई संदिग्ध या फर्जी व्यक्ति परिसर में पाया जाता है तो उसकी एंट्री पर तत्काल रोक लगाई जाएगी। सिविल सर्जन ने कहा कि पूरे मामले की वे स्वयं गहन जांच करेंगे। सदर अस्पताल के सुपरिटेंडेंट ने स्पेशल टीम का किया गठन मामले की जांच के लिए सदर हॉस्पिटल के सुपरिटेंडेंट डॉ. ज्ञानेंदू शेखर ने एक विशेष टीम के गठन का निर्देश दिया। टीम यह पता लगाएगी कि बिना जांच के सर्टिफिकेट जारी करने के पीछे कौन-कौन से कर्मी और बिचौलिए शामिल हैं। क्या है सर्टिफिकेट बनवाने की पूरी प्रक्रिया अमरनाथ यात्रा 2026 के लिए मुजफ्फरपुर में हेल्थ सर्टिफिकेट (Compulsory Health Certificate – CHC) मुख्य रूप से सदर अस्पताल में बनता है। इसके अलावा, श्राइन बोर्ड द्वारा अधिकृत अन्य सरकारी अस्पतालों या डॉक्टरों के पास भी आप चेकअप कराकर 8 अप्रैल 2026 के बाद का वैध सर्टिफिकेट प्राप्त कर सकते हैं। प्रक्रिया: आपको निर्धारित CHC फॉर्म भरकर, सरकारी डॉक्टर से जांच (चेकअप) कराकर उस पर हस्ताक्षर और स्टैंप लगवाना होगा। पात्रता: 13 से 70 वर्ष के बीच के व्यक्ति ही यात्रा के लिए पात्र हैं। दस्तावेज़: अपना आधार कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो और जांच के बाद भरा हुआ मेडिकल फॉर्म।


