बलिया में केंद्रीय परीक्षाओं में कथित धांधली और भ्रष्टाचार के विरोध में छात्रों ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान छात्रों ने एनटीए को एक भ्रष्ट एजेंसी बताते हुए उसकी प्रतीकात्मक अर्थी निकाली। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) के कार्यकर्ताओं और टीडी कॉलेज के छात्र नेताओं ने यह प्रदर्शन किया। छात्रों ने एनटीए के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उसे भ्रष्ट करार दिया। संगठन के जिलाध्यक्ष हार्दिक पांडेय ने मीडिया से बातचीत में सरकारी एजेंसियों और सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी पूरी तरह भ्रष्ट हो चुकी है और इसका उद्देश्य छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना है। पांडेय ने कहा कि परीक्षा के पेपर पूंजीपतियों और भ्रष्ट लोगों को बेचकर मेधावी छात्रों का भविष्य बर्बाद किया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान भारी पुलिस बल तैनात था। छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उन्हें एनटीए की अर्थी और पुतला जलाने से रोकने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिस प्रशासन और छात्रों के बीच नोकझोंक भी हुई, और पुलिस ने छात्रों से प्रतीकात्मक अर्थी छीन ली, जिससे छात्रों में आक्रोश बढ़ गया। हार्दिक पांडेय ने यह भी कहा कि वर्तमान सरकार छात्र संघ चुनाव बंद करके और छात्रों की आवाज दबाकर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को विफल करने की कोशिश कर रही है। छात्रों ने इस मामले में सीधे तौर पर केंद्र सरकार, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और एनटीए को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने मांग की कि एनटीए पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाए, कथित धांधली और मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या करने वाले छात्र-छात्राओं के परिवारों को उचित मुआवजा और न्याय दिया जाए, तथा भविष्य की परीक्षाओं में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। छात्रों ने चेतावनी दी कि वे गांधीवादी विचारधारा के अनुयायी हैं और लोकतांत्रिक तथा शांतिपूर्ण तरीके से अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। हालांकि, उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने उनकी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया और पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की, तो वे एक उग्र और बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।


