पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति वी. सुब्रमण्यम ने कहा कि भारत कृत्रिम मेधा (एआई) में युवा आबादी की क्षमता का लाभ उठाकर और उभरते प्रमुख क्षेत्रों में अपना दबदबा कायम करके 2047 तक 55 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकता है।
सुब्रमण्यम ने ‘इंडिया 2047 लीडर्स टॉक’ को संबोधित करते हुए कहा कि लगातार आठ प्रतिशत की वास्तविक जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि, रणनीतिक रूप से पूंजी के इस्तेमाल के साथ मिलकर, भारत की अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों में लगातार मूल्य सृजित करने की क्षमता को खोलेगी।
सुब्रमण्यम ने कहा, ‘‘2047 तक 55 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था के साथ ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य हासिल करने योग्य है। यह संचयी वृद्धि, नैतिक तरीके से संपत्ति सृजन और साहसिक संरचनात्मक नीतियों की ताकत से संभव होगा।’’
उन्होंने उच्च गुणवत्ता वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को आकर्षित करने, वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के साथ एकीकरण के तहत विश्वस्तरीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं औद्योगिक विनिर्माण का विस्तार करने तथा एआई और उभरती क्षमताओं में दक्ष अत्यधिक कुशल युवा प्रतिभाओं का समूह तैयार करने के बीच महत्वपूर्ण संबंध का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा, ‘‘उच्च मूल्य वाले विनिर्माण का विस्तार करके, एआई एवं उभरती क्षमताओं में हमारी विशाल युवा आबादी की क्षमता का इस्तेमाल करके और अंतरिक्ष तथा रक्षा प्रौद्योगिकी जैसे उभरते क्षेत्रों में वैश्विक दबदबा कायम करके भारत केवल अपनी आर्थिक पहुंच का विस्तार नहीं कर रहा है, बल्कि आधुनिक दुनिया के लिए एक मजबूत आर्थिक खाका तैयार कर रहा है।’’
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने अप्रैल 2026 के अपने विश्व आर्थिक परिदृश्य में बाजार मूल्य पर भारत की जीडीपी 2025-26 में 3.92 लाख करोड़ डॉलर रहने का अनुमान लगाया था। इसके साथ भारत दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।
भारत और दक्षिण एशिया के लिए आईएमएफ के पूर्व कार्यकारी निदेशक सुब्रमण्यम ने ऊंची प्रवेश बाधाओं वाले अग्रणी उद्योगों में भारत की रणनीतिक छलांग पर भी बात की। उन्होंने विशेष रूप से रक्षा विनिर्माण, दोहरे उपयोग वाली प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण और वाणिज्यिक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को तकनीकी आत्मनिर्भरता, राष्ट्रीय रक्षा क्षमताओं और उच्च मूल्य वाले निर्यात की वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ताजा आर्थिक वृद्धि अनुमान में चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। वैश्विक स्तर पर बढ़ी अनिश्चितता के बावजूद मजबूत घरेलू मांग, विनिर्माण और सेवा गतिविधियों तथा मजबूत निर्यात से वृद्धि को समर्थन मिलने की उम्मीद है। वैश्विक अनिश्चितता का कारण पश्चिम एशिया में संघर्ष और व्यापार संबंधी तनाव हैं।

