केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी बिक्री पर टिप्पणी को लेकर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी समाजवादी पार्टी ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को बर्बाद करने के लिए जिम्मेदार संप्रग सरकार से कभी सवाल नहीं किया। सीतारमण ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि संप्रग सरकार के दौरान ‘फोन बैंकिंग’ और ‘क्रोनी कैपिटलिज्म’ (अपनों को लाभ पहुंचाना) के कारण सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की स्थिति खराब हुई थी।
वित्त मंत्री की यह प्रतिक्रिया यादव के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि अब सरकार के पास खुद को बेचने के अलावा कुछ नहीं बचा है। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘बस अब सरकार बेचना बाकी है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने अपनी दुकान बंद होती देख ‘सीजन इंड सेल’ लगाकर सब बेचकर निकलने का कार्यक्रम बना लिया है।’’
इससे पहले, दिन में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कनाडा की फेयरफैक्स को आईडीबीआई बैंक में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी 52,878 करोड़ रुपये में बेचने की मंजूरी दी।
इस सौदे में सरकार की 30.48 प्रतिशत और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है। सीतारमण ने कहा, “संप्रग सरकार को आपकी पार्टी का समर्थन प्राप्त था, आईडीबीआई बैंक ने खुद ऐसे लोगों को कर्ज दिया था, जिनसे मूलधन और ब्याज की वसूली के लिए हम आज भी प्रयास करने पड़ रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि भारी मात्रा में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) के कारण भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आईडीबीआई बैंक को त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) के दायरे में रखा था। जनवरी 2019 में विनिवेश प्रक्रिया के तहत एलआईसी ने लगभग 21,624 करोड़ रुपये में बैंक की 51 प्रतिशत नियंत्रक हिस्सेदारी का अधिग्रहण पूरा किया था।
वित्त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने पारदर्शी नीतियों और पूंजी निवेश के जरिए आईडीबीआई बैंक समेत पूरी बैंकिंग प्रणाली को पुनर्जीवित किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राजग सरकार के कार्यकाल में बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति मजबूत हुई है, तो यादव अब इस मुद्दे पर चिंता क्यों जता रहे हैं? सीतारमण ने समाजवादी पार्टी पर इस मामले में ‘झूठी सहानुभूति’ दिखाने और ‘घड़ियाली आंसू’ बहाने का भी आरोप लगाया।

