इंदौर में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने रविवार को दो आइसक्रीम निर्माण इकाइयों पर औचक कार्रवाई की। संयुक्त जांच दल ने निरीक्षण के दौरान कुल 10 खाद्य नमूने जांच के लिए लिए। एक फैक्टरी का निर्माण कार्य बंद करा दिया गया, जबकि दूसरी इकाई को नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने सबसे पहले चैंपियंस आइसक्रीम एंड फ्रोजन फूड फैक्टरी का निरीक्षण किया। जांच के दौरान संचालक नीलेश विश्वकर्मा मौजूद मिले। अधिकारियों को फैक्टरी में कई गंभीर अनियमितताएं मिलीं। इकाई के पास निर्माण का वैध लाइसेंस नहीं था। पैकेजिंग सामग्री पर लेबलिंग संबंधी जरूरी जानकारी अधूरी पाई गई। कच्चा माल अस्वच्छ और अव्यवस्थित तरीके से रखा गया था, जबकि कुछ जंग लगे सांचों का उपयोग भी किया जा रहा था। निरीक्षण में यह भी सामने आया कि निर्माण में इस्तेमाल हो रहे पानी की जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं थी। फ्रीजर रूम में खाद्य सामग्री का भंडारण भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिला। अधिकारियों ने वनीला फ्रोजन डेजर्ट, केसर पिस्ता कुल्फी, मावा और चॉकलेट पेस्ट सहित चार नमूने जांच के लिए लिए। वैध लाइसेंस मिलने तक फैक्टरी का निर्माण कार्य बंद करा दिया गया है। गंदगी के बीच आइसक्रीम इसके बाद टीम ने रुद्राक्ष आइसक्रीम इकाई का निरीक्षण किया। यहां प्रभारी नरेश कुमावत मौजूद मिले। जांच में पाया गया कि विभिन्न फ्लेवर की आइसक्रीम गंदगी के बीच तैयार की जा रही थी। कई फ्लेवर बिना लेबल के पाए गए, जिन पर आवश्यक जानकारी अंकित नहीं थी। खाद्य पदार्थों के भंडारण स्थल पर भी अव्यवस्था मिली। कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने आइसक्रीम के पांच और टूटी-फ्रूटी का एक नमूना लेकर कुल छह नमूने जांच के लिए भेजे। बिना लेबल वाले फ्लेवर को मौके पर ही नष्ट कराया गया। परिसर में मिली अनियमितताओं को लेकर संबंधित संचालक को नोटिस जारी किया जाएगा। खाद्य सुरक्षा अधिकारी शिवम वर्मा ने कहा कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ जांच और कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।


