जालौन में आईएएस अफसर रिंकू सिंह राही ने अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। आरोप लगाया है कि बार-बार अनुरोध के बावजूद उनकी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की मांग पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। आईएएस अफसर ने इससे संबंधिक X पर एक पोस्ट किया है। अपनी पोस्ट में रिंकू सिंह राही ने लिखा है कि सुरक्षा को खतरा गंभीर बना हुआ है, फिर भी लगातार अनुरोध करने पर भी शायद जानबूझकर सुरक्षा व्यवस्था नहीं बढ़ाई जा रही है। अभी उपलब्ध सभी प्लेटफॉर्म पर लगातार अनुरोध किया जा रहा है, लेकिन पता नहीं क्यों, किसी के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है? यदि “सुरक्षा बढ़ाए जाने की जरूरत नहीं है” को ही लिखकर दे दें तो मा० न्यायालय की शरण ली जाए। लेकिन वह भी नहीं। हमेशा की तरह, यदि अपनी सुरक्षा एवं वस्तुस्थिति स्पष्ट करने के लिए इन पत्रों को सार्वजनिक किया जाएगा, तो कुछ लोगों की ओर से हरेक बार की तरह यह आरोप लगवाया जाएगा कि पत्र मीडिया में आने के लिए सार्वजनिक किए गए हैं। क्या वाकई में दुर्घटना होने का ही इंतजार करना चाहिए? राही ने अपनी पोस्ट में ‘जस्टिस फॉर रिंकू सिंह राही’ (Justice For Rinku Singh Rahi) नाम की एक फेसबुक पेज के बारे में भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि यह पेज उनके समर्थक चलाते थे। विभिन्न पोस्ट को संकलित कर प्रकाशित करते थे। उनके अनुसार, इस फेसबुक पेज को प्रशासन द्वारा हटवा दिया गया है। विवादों से चर्चा में रहे 4 अगस्त को जालौन बार एसोसिएशन ने रिंकू सिंह राही की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए 5 अगस्त से राजस्व अदालतों के बहिष्कार का ऐलान किया था। बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष ओमनारायण सिंह की ओर से एक पत्र जारी किया गया था। पत्र के मुताबिक, अधिवक्ता तीन बार जिलाधिकारी राकेश कुमार पांडेय से एसडीएम (न्यायिक) रिंकू सिंह राही की शिकायत कर चुके थे। बार एसोसिएशन का आरोप था कि रिंकू सिंह राही अदालत में अधिवक्ताओं और वादकारियों की अनुपस्थिति में एकपक्षीय आदेश पारित करने की बात कहते हैं। साथ ही वकीलों का आरोप था कि उनके साथ अदालत में अभद्र व्यवहार किया जाता है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होता है। बार एसोसिएशन ने चेतावनी दी थी कि जब तक कार्यशैली में बदलाव नहीं होता, तब तक राजस्व अदालतों का बहिष्कार जारी रहेगा। बता दें कि 10 दिन पहले उरई नगर पालिका परिषद में जांच को लेकर विवाद हो गया था। आईएएस अफसर रिंकू सिंह राही दोपहर 2 बजे नगर पालिका कार्यालय पहुंचे थे। अनियमितताओं से जुड़ी फाइलें देखनी शुरू कर दीं। इस पर वहां मौजूद अधिशासी अधिकारी ने आपत्ति जताई थी, जिसके बाद दोनों के बीच बहस शुरू हो गई थी। आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने अधिशासी अधिकारी से कहा था, आदेश दिखाइए। आखिर किस आदेश में लिखा है कि मुझे अभिलेख नहीं दिखाए जाएंगे। आप वह आदेश दिखा दीजिए, मैं तुरंत चला जाऊंगा। अधिशासी अधिकारी का आरोप है कि रिंकू सिंह राही अपने कुछ निजी लोगों को लेकर पहुंचे थे। वे फाइलें देखने के दौरान वीडियो बना रहे थे। दरअसल, नगर पालिका परिषद उरई में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर जांच चल रही थी। इस जांच टीम में रिंकू सिंह भी थे, जो उस समय जालौन के एसडीएम थे। लेकिन उरई ट्रांसफर होने के बाद उनकी भूमिका खत्म हो गई थी। 29 जून को ब्लॉक प्रमुख रामराजा निरंजन ने जॉइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही पर पिटाई करने का आरोप लगाया था। ब्लॉक प्रमुख ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह का वीडियो भी दिखाया था। जिसमें रिंकू सिंह धक्का-मुक्की करते नजर आए थे। इसमें वह ब्लॉक प्रमुख के मोबाइल पर थप्पड़ मारकर जमीन पर गिराते दिखे थे। इसके बाद दोनों हाथों से उन्हें जोरदार धक्का मारकर पीछे धकेल दिया था। ब्लॉक प्रमुख ने इसकी शिकायत डीएम राजेश कुमार पांडेय से की थी। हाथरस के रहने वाले, पहले PCS फिर IAS बने रिंकू सिंह राही का जन्म 20 मई, 1982 को हाथरस में एक दलित परिवार में हुआ था। वह थाना सासनी के गांव ऊसवा के रहने वाले हैं। दो भाइयों में बड़े रिंकू के पिता सौदान सिंह राही आटा चक्की चलाकर परिवार का पालन करते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से उन्होंने सरकारी स्कूल से पढ़ाई की थी। अच्छे नंबरों से 12वीं पास करने पर उन्हें स्कॉलरशिप मिली थी। इसकी मदद से उन्होंने जमशेदपुर के टाटा इंस्टीट्यूट से बीटेक किया था। 2004 में रिंकू सिंह ने पीसीएस परीक्षा पास की थी। नौकरी के दौरान उन्होंने दिव्यांग कोटे से यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा दी। 2021 में उन्हें 683वीं रैंक मिली और वे आईएएस बने थे। परिवार में पत्नी सुलेखा योगा टीचर रही हैं। 10 साल का एक बेटा ध्रुव राही है। ताऊ रघुवीर सिंह राही बसपा शासनकाल में जिलाध्यक्ष रहे हैं। ————————————————– ये खबर भी पढ़ेंः- विधायक पर गंदी हरकत का आरोप, महिला ने सबूत दिखाए:कहा- मेरी कार पर ‘पास’ लगवाया, PhD की फीस आधी कराने की सिफारिश की
सुल्तानपुर सदर से भाजपा विधायक विनोद सिंह पर रेप की कोशिश का आरोप लगा है। विधायक ने सफाई दी कि मैं तो महिला को जानता तक नहीं हूं, रेप तो दूर की बात है। महिला ने दावा किया कि विधायक झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने दैनिक भास्कर से बात करते हुए सबूत दिखाकर दावा किया कि विधायक उसे जानते थे। भाजपा विधायक के खिलाफ दिल्ली में केस दर्ज हो चुका है। इससे पहले विधायक ने लखनऊ में महिला और उनके पति के खिलाफ जालसाजी की कोशिश का केस दर्ज कराया था। विधायक का आरोप है कि महिला के पति ने अपने भाई को IAS बताकर मिलवाया था। पढ़ें पूरी खबर…

