IAS officer Tukaram Mundhe: आमतौर पर किसी अफसर की पहचान उसके पद, दफ्तर और पावर से होती है। लेकिन महाराष्ट्र कैडर के 2005 बैच के जांबाज IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे (Tukaram Mundhe) के मामले में यह बात बिल्कुल अलग है। वह अपनी पहचान खुद बड़े-बड़े एक्शन से बनाते हैं। वह जिस पद को संभालते हैं, वहां सख्त और कड़े फैसलों से सिस्टम की पूरी तस्वीर बदल देते हैं। महाराष्ट्र में भी उन्होंने यही किया है जिसकी मुरीद खुद अभिनेत्री देवोलीना भट्टाचार्जी हो गई हैं।
देवोलीना भट्टाचार्जी हुई तुकाराम मुंढे की फैन
महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) कमिश्नर का पद संभालने के बाद से तुकाराम मुंढे ने पूरे राज्य में मिलावटखोरों, भ्रष्ट निर्माताओं और नियम तोड़ने वाले रेस्तरां के खिलाफ जो ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू की है, उसने प्रशासनिक गलियारों से लेकर आम जनता तक में उन्हें फेमस कर दिया है। इसी को लेकर साथ निभाना साथिया’ फेम टीवी एक्ट्रेस देवोलीना भट्टाचार्जी ने अपने दिल की बात कही है।
देवोलीना भट्टाचार्जी ने महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन कमिश्नर तुकाराम मुंढे की तारीफ की है। उन्होंने लिखा, ‘सोचिए… एक ईमानदार अफसर ने पूरे महाराष्ट्र को हिलाकर रख दिया है और लोग उनके काम की तारीफ कर रहे हैं। अगर देश के हर विभाग में तुकाराम मुंढे सर जैसे अफसर तैनात हो जाएं, तो अपराधी और मिलावटखोर कानून तोड़ने से पहले सौ बार सोचेंगे। अफसोस की बात है कि हम सब जानते हैं कि अपनी इसी ईमानदारी के कारण मुंढे सर को कितनी बार तबादलों का सामना करना पड़ा है।”
’21 साल में 25 बार हुए तबादले’
वहीं, ऑफिसर मुंढे की बात करें तो उन्हें सबसे अलग एक चीज बनाती है, जो सिर्फ छापेमारी नहीं, बल्कि उनका करियर ग्राफ है। ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, 21 साल की सर्विस के दौरान उनका 25 बार तबादला हो चुका है। यह संख्या उनकी पहचान का उतना ही अहम हिस्सा बन गई है, जितना कि उनका काम।
तुकाराम मुंढे की शुरुआती जिंदगी उन सरकारी दफ्तरों और गलियारों से बहुत अलग थी जहां वह आज काम करते हैं। 3 जून 1975 को बीड जिले के ताडसोना गांव में जन्मे मुंढे एक किसान परिवार में पले-बढ़े है। वह अपना समय जिला परिषद के स्कूल और परिवार के खेत में काम करने के बीच बांटते थे। यह भारत के कई ग्रामीण बच्चों की आम दिनचर्या है, जहां पढ़ाई और मेहनत-मजदूरी शायद ही कभी अलग-अलग होती हैं।
तुकाराम मुंढे का करियर कैसे आगे बढ़ा?
बहुत से लोगों का मानना है कि इसी अनुभव ने उन्हें रोजमर्रा की प्रशासनिक चुनौतियों को समझने में मदद की है। डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद, मुंढे ने 2004 में UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास की और ऑल इंडिया रैंक 20 हासिल की। इसके बाद वे 2005 बैच में IAS में शामिल हुए। यह एक गांव के क्लासरूम से देश की सबसे प्रभावशाली सेवाओं में से एक में शामिल होने तक का एक बड़ा सफर है।


