Hypersalivation Symptoms: कई बार हमारे साथ ऐसा होता है कि मुंह में कुछ डाला भी नहीं होता, कोई स्वादिष्ट खाना सामने नहीं होता, फिर भी अचानक मुंह में ढेर सारा थूक या पानी भरने लगता है। कभी-कभी तो हालत यह होती है कि बार-बार थूक निगलना पड़ता है या अजीब सा लगने लगता है। इसे हाइपरसलाइवेशन कहते हैं, जिसका सीधा मतलब है मुंह में जरूरत से ज्यादा लार बनना। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो आइए इसे समझते हैं।
क्या होता है हाइपरसलाइवेशन (Hypersalivation) और ज्यादा लार क्यों बनने लगती है?
हेल्थलाइन के मुताबिक, हमारे लार ग्रंथियां (Salivary Glands) सामान्य रूप से मुंह को गीला रखने, खाना चबाने और निगलने में मदद करने के लिए रोजाना एक तय मात्रा में लार बनाती हैं। लेकिन जब ये ग्रंथियां जरूरत से ज्यादा लार बनाने लगती हैं, तो मुंह में पानी भरने की समस्या शुरू हो जाती है जिसको हाइपरसलाइवेशन (Hypersalivation) कहा जाता है। मुंह में ज्यादा लार इन कारणों से बनने लगती है;
- एसिड रिफ्लक्स या जीईआरडी (GERD)।
- मुंह या दांतों में इंफेक्शन।
- एलर्जी या जहरीले जीवों का प्रभाव।
- क्रोनिक स्वास्थ्य समस्याएं (Chronic Causes)।
हाइपरसलाइवेशन के लक्षण क्या हैं?
- मुंह में हर वक्त थूक भरा-भरा सा महसूस होना।
- बार-बार खुद-ब-खुद थूक निगलना पड़ना।
- सोते वक्त या कई बार जागते हुए भी मुंह के किनारे से लार टपकना।
- बोलते या खाते वक्त थोड़ी बहुति परेशानी होना।
इससे राहत पाने के आसान उपाय
- थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें।
- ओरल हाइजीन का पूरा ख्याल रखें।
- उठने-बैठने की अपनी मुद्रा (Posture) को ठीक रखें।
बिना कुछ खाए मुंह में अचानक पानी भरना या लार आना ज्यादातर मामलों में कोई बहुत बड़ी बीमारी नहीं होती। यह अक्सर हमारी छोटी-मोटी जीवनशैली, पेट में बनने वाली गैस या एसिडिटी, गले या मुंह के किसी हल्के-फुल्के इन्फेक्शन, या फिर प्रेगनेंसी जैसे सामान्य कारणों की वजह से होता है। इन छोटी-मोटी वजहतों को हम थोड़ा पानी पीकर, अपनी ओरल हाइजीन यानी मुंह की साफ-सफाई रखकर और खानपान पर ध्यान देकर आसानी से कंट्रोल कर सकते हैं।
लेकिन, एक बात का हमेशा ध्यान रखें कि अगर यह परेशानी रोज-रोज की बन जाए, लंबे समय तक पीछा न छोड़े, या इसके साथ आपको खाना निगलने में तकलीफ, गले में दर्द या किसी और तरह की कमजोरी महसूस हो, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। यह शरीर के अंदर चल रही किसी बड़ी दिक्कत का इशारा हो सकता है, इसलिए वक्त रहते किसी अच्छे डॉक्टर से मिलकर इसकी असल वजह का पता लगाना और सही इलाज करवाना ही सबसे समझदारी भरा कदम है।

