इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ऐसे व्यक्ति को ज़मानत दी जिस पर अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर यह पोस्ट करने का आरोप था कि वह आई लव मोहम्मद के लिए अपना सिर कटवा भी सकता है और दूसरों का सिर काट भी सकता है।
जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला की बेंच ने यह टिप्पणी की कि आवेदक द्वारा की गई ‘कथित आपत्तिजनक’ पोस्ट में किसी खास जाति या समुदाय का नाम नहीं लिया गया।
आरोपी-नदीम मुजफ्फरनगर ज़िले का रहने वाला है। उस पर पिछले साल यूपी पुलिस ने उसकी इंस्टाग्राम प्रोफ़ाइल पर कथित तौर पर संवेदनशील टिप्पणियां करने के आरोप में बीएनएस की धारा 353(2), 192, और 152 के तहत मामला दर्ज किया। आपराधिक इतिहास नहीं, मुकदमा पूरा होने वाला ज़मानत याचिका पर उसके वकील ने हाईकोर्ट में यह दलील दी कि अब चार्जशीट भी दाखिल कर दी गई और निकट भविष्य में मुक़दमे के पूरा होने की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि आवेदक का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। दूसरी ओर, ज़मानत की अर्जी का विरोध करते हुए राज्य सरकार के सरकारी वकील ने यह दलील दी कि उसने असंवेदनशील टिप्पणी पोस्ट की थी, जिसमें कहा गया था: ” आई लव मोहम्मद” के लिए गर्दन कटवा भी सकते हैं और काट भी सकते हैं।” बरेली में दंगे भड़के थे तर्क दिया गया कि इस तरह के आपत्तिजनक नारे के कारण बरेली ज़िले में बड़े पैमाने पर दंगे भड़क उठे थे, जिसके परिणामस्वरूप संपत्ति को गंभीर नुकसान पहुंचा था। आगे यह भी तर्क दिया गया कि असामाजिक तत्वों के कारण कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब हो गई, जिन्हें इस तरह के नारों से उकसाया गया। हालांकि, सरकारी वकील ने इस बात से इनकार नहीं किया कि उक्त मामला बरेली ज़िले से संबंधित है, और उसमें जिस आरोपी नदीम खान का ज़िक्र है, वह यह आवेदक नहीं है।
इस पृष्ठभूमि को देखते हुए जांच के दौरान इकट्ठा की गई सामग्री, आवेदक को सौंपी गई भूमिका और इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि आवेदक 7 अक्टूबर, 2025 से जेल में है और उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, कोर्ट ने उसे ज़मानत पर रिहा करने का आदेश दिया।


