गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर बन सकता है जानलेवा

गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर बन सकता है जानलेवा

Ahmedabad: गर्भावस्था किसी भी महिला के जीवन का सबसे सुखद और संवेदनशील दौर माना जाता है, लेकिन इसी दौरान होने वाली कुछ परेशानियां मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। ऐसी ही एक गंभीर स्थिति है प्री-एक्लेम्पसिया, जिसे चिकित्सा विशेषज्ञ सायलेंट किलर भी कहते हैं।

विश्व प्री-एक्लेम्पसिया जागरूकता दिवस पर विशेषज्ञों ने गर्भवती महिलाओं को समय पर जांच कराने और सतर्क रहने की सलाह दी है।प्री-एक्लेम्पसिया गर्भावस्था के दौरान होने वाली हाई ब्लड प्रेशर की गंभीर समस्या है, जो सामान्यतः 20वें सप्ताह के बाद सामने आती है। इस स्थिति में मां का शरीर गर्भ में पल रहे शिशु की बढ़ती ऑक्सीजन और रक्त की जरूरतों को पूरा नहीं कर पाता।

इससे प्लेसेंटा का विकास प्रभावित होने लगता है और शरीर में ऐसे रसायन बनने लगते हैं, जो मां के विभिन्न अंगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि गर्भावस्था के 11 से 14 सप्ताह के बीच की जाने वाली विशेष स्क्रीनिंग जांच से इस बीमारी के खतरे को 70 से 80 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।

लिवर और किडनी पर भी होता है असर

डॉक्टरों का कहना है कि यह बीमारी लिवर और किडनी पर गंभीर असर डाल सकती है। कई मामलों में अंगों के फेल होने का खतरा भी बढ़ जाता है। इसके अलावा मस्तिष्क और आंखों में सूजन, धुंधला दिखाई देना तथा दौरे पड़ने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। खून के थक्के बनने की प्रक्रिया प्रभावित होने से आंतरिक रक्तस्राव का खतरा भी बढ़ जाता है। बीमारी का असर केवल मां तक सीमित नहीं रहता, बल्कि गर्भस्थ शिशु के विकास पर भी पड़ता है। प्लेसेंटा के सही ढंग से काम नहीं करने पर शिशु को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता, जिससे उसका शारीरिक विकास रुक सकता है। कई बार समय से पहले प्रसव कराना पड़ता है।

गर्भवती महिलाओं में से 10 फीसदी तक को खतरा

दक्षिण एशिया में हर 100 गर्भवती महिलाओं में से 8 से 10 महिलाओं में प्री-एक्लेम्पसिया का खतरा पाया जाता है। इससे बचाव के लिए समय समय पर जांच कराना जरूरी है। शुरुआती जांच में खतरे के संकेत मिलते हैं तो उपचार शुरू करा देना चाहिए। नियमित ब्लड प्रेशर जांच और डॉक्टर की सलाह का पालन सुरक्षित मातृत्व के लिए बेहद जरूरी माना गया है।

गर्भवती महिलाओं को खतरे से किया जागरूक

अहमदाबाद शहर के सिविल अस्पताल में शुक्रवार को विश्व प्री-एक्लेम्पसिया दिवस के अवसर पर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम में गर्भवती महिलाओं में हाई ब्लड प्रेशर और उससे जुड़े खतरों के बारे में जानकारी दी गई।अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने कहा कि प्री-एक्लेम्पसिया गर्भावस्था के 20वें सप्ताह के बाद विकसित होने वाली गंभीर स्थिति है, जिसमें ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। इससे लिवर व किडनी को नुकसान पहुंच सकता है। डॉ. निशा भोजवानी ने कहा कि लगातार सिरदर्द, धुंधली दृष्टि, अचानक सूजन या पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं ने विशेषज्ञ डॉक्टरों से सीधे बातचीत कर अपनी शंकाओं का समाधान पाया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *