भारत के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक, HDFC बैंक लिमिटेड में एक बड़ा प्रशासनिक संकट खड़ा हो गया है। बैंक द्वारा कराई गई एक आंतरिक जांच में ऐसे पुख्ता सबूत मिले हैं, जिनसे खुलासा हुआ है कि बैंक के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने अत्यंत संवेदनशील व्यावसायिक रणनीतियों और बाजार को प्रभावित करने वाली गोपनीय जानकारियां बाहरी लोगों के साथ साझा की हैं। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब 27 अक्टूबर को अनूप बागची बैंक के नए CEO के रूप में कमान संभालने वाले हैं और बैंक पहले से ही शीर्ष स्तर पर कई प्रमुख इस्तीफों से जूझ रहा है। इस संवेदनशील डेटा लीक के खुलासे ने न सिर्फ बैंक के कॉरपोरेट गवर्नेंस पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि निवेशकों के बीच भी हड़कंप मचा दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक अभी इस बात की जांच कर रहा है कि क्या इस जानकारी का गलत इस्तेमाल किया गया है। सूत्रों ने बताया कि बैंक के अहम कारोबार और कामकाज की देखरेख करने वाले इन अधिकारियों को जांच के नतीजों के बारे में आधिकारिक तौर पर सूचित कर दिया गया है। यह जांच तब शुरू हुई जब कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने जानकारी लीक होने की आशंका जताई। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल की शुरुआत में जांच के नतीजों की जानकारी वरिष्ठ प्रबंधन और बोर्ड के कुछ सदस्यों को दी गई थी। अभी यह साफ नहीं है कि बैंक इन अधिकारियों के खिलाफ क्या अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा।
HDFC बैंक के एक प्रवक्ता ने पुष्टि की कि आंतरिक समीक्षा चल रही है, लेकिन उन्होंने जांच के नतीजों या इसमें शामिल व्यक्तियों के बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। प्रवक्ता ने एक ईमेल में कहा, “हमारी नीतियों के अनुसार, इस मामले में सभी जरूरी तथ्यों को इकट्ठा करने और उनका मूल्यांकन करने के लिए एक आंतरिक समीक्षा चल रही है। समीक्षा पूरी होने के बाद, जो भी नतीजे सामने आएंगे, उनके आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।”
बैंक ने नैतिकता और गवर्नेंस के उच्च मानकों को बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता को भी दोहराया और कहा कि वह नियमों के उल्लंघन की किसी भी रिपोर्ट को बहुत गंभीरता से लेता है।
आंतरिक चुनौतियों के बीच HDFC बैंक में नेतृत्व परिवर्तन का दौर
यह जांच HDFC बैंक के लिए एक बेहद अहम समय पर हो रही है। मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से भारत के सबसे बड़े इस बैंक में, वरिष्ठ स्तर पर कई लोगों के इस्तीफे और बोर्डरूम में तनाव के बाद अब नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी चल रही है।
ICICI ग्रुप के अनुभवी अधिकारी अनूप बागची 27 अक्टूबर को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का पद संभालेंगे। वे शशिधर जगदीशन की जगह लेंगे, जिन्होंने इस पद पर छह साल रहने के बाद अपना कार्यकाल आगे न बढ़ाने का फैसला किया है। रिपोर्ट के अनुसार, बैंक के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर और सबसे लंबे समय तक काम करने वाले अधिकारियों में से एक, कैजाद भरूचा ने भी दिसंबर के अंत में बैंक छोड़ने का फैसला किया है।
बैंक में यह नेतृत्व परिवर्तन मार्च में पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे के बाद हो रहा है। चक्रवर्ती ने अपने इस्तीफे के पीछे अपने व्यक्तिगत मूल्यों और बैंक के कुछ कामकाज के तरीकों के बीच मतभेदों का हवाला दिया था। इसके बाद HDFC बैंक ने एक स्वतंत्र कानूनी समीक्षा करवाई, जिसमें यह निष्कर्ष निकला कि उनकी चिंताएं सही साबित नहीं हुईं।
आंतरिक जांच के ये नए नतीजे बैंक की मुश्किलें और बढ़ा सकते हैं, क्योंकि इस बदलाव के दौर में बैंक निवेशकों का भरोसा बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
HDFC बैंक की साख पर सवाल
1994 में स्थापित, HDFC बैंक ने तब तेजी से विस्तार किया जब भारत ने अपने वित्तीय क्षेत्र को निजी प्रतिस्पर्धा के लिए खोला। समय के साथ, यह उन अंतरराष्ट्रीय फंड मैनेजरों के लिए निवेश का पसंदीदा विकल्प बन गया, जो भारत की बढ़ती आय और उपभोक्ता ऋण बाजार (consumer credit market) में निवेश करना चाहते थे।
लगभग 115 अरब डॉलर के मूल्य वाले इस बैंक ने अपनी साख ‘रूढ़िवादी प्रबंधन’ (conservative management), मजबूत आंतरिक नियंत्रण और लगातार मुनाफा कमाने के दम पर बनाई है। हालांकि, एक रिपोर्ट के अनुसार, इस साल बैंक के शेयरों में लगभग 28% की गिरावट आई है।
चल रही जांच से संगठन के भीतर गोपनीय जानकारी को संभालने के तरीकों पर सवाल उठते हैं। हालांकि, बैंक ने अभी तक अपनी समीक्षा पूरी नहीं की है और न ही यह तय किया है कि क्या इस जानकारी के लीक होने से इसका कोई गलत इस्तेमाल हुआ है।
HDFC बैंक ने अभी तक सार्वजनिक रूप से उन अधिकारियों के नामों का खुलासा नहीं किया है जो इसमें शामिल हैं, और न ही यह बताया है कि कथित तौर पर किस तरह की जानकारी साझा की गई थी।

