पटना हाईकोर्ट ने मोतिहारी की ऐतिहासिक मोतीझील के संरक्षण, अतिक्रमण हटाने और पुनरुद्धार के मामले में बिहार सरकार के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया पाया है कि वर्ष 2023 में दिए गए उसके महत्वपूर्ण निर्देशों का अब तक समुचित पालन नहीं किया गया है। इसके बाद हाईकोर्ट ने बिहार के मुख्य सचिव को स्वयं चार सप्ताह के भीतर शपथ-पत्र के माध्यम से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह मामला अधिवक्ता कुमार अमित द्वारा दायर जनहित याचिका (CWJC No. 3876/2022) से संबंधित है। 05 मई 2023 को सुनवाई के दौरान तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मोतीझील के समग्र पुनरुद्धार के लिए कई अहम निर्देश दिए थे। अतिक्रमण-पार्क की सुविधाओं का विकास करें इनमें झील में अधूरे ड्रेजिंग और डी-सिल्टिंग कार्य को पूरा करना, अतिक्रमण हटाना, तटबंध और पार्क जैसी आधारभूत सुविधाओं का विकास करना, व्यापक पौधारोपण कराना तथा रतनगिरी चैनल से अतिक्रमण हटाकर झील के प्राकृतिक जलस्रोत को पुनर्जीवित करना शामिल था। उस समय, पूर्वी चंपारण के जिला पदाधिकारी द्वारा दिए गए आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए, हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को अधिकृत अधिकारी के माध्यम से पूरे कार्य की व्यक्तिगत निगरानी सुनिश्चित करने और प्रत्येक तीन माह पर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी आदेश दिया था। 2023 के आदेशों का अपेक्षित अनुपालन नहीं हुआ हालांकि, 21 अगस्त 2026 को MJC No. 3862/2024 की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति मोहित कुमार शाह एवं न्यायमूर्ति सौरेन्द्र पांडेय की खंडपीठ ने पाया कि वर्ष 2023 के आदेशों का अपेक्षित अनुपालन नहीं हुआ है। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि उसके आदेश की प्रति मुख्य सचिव और पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी को निगरानी और कार्रवाई के लिए भेजी गई थी, फिर भी निर्देशों का प्रभावी पालन सुनिश्चित नहीं हो सका। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 4 सप्ताह बाद निर्धारित की इस पर हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव, बिहार सरकार को स्वयं शपथ-पत्र के माध्यम से चार सप्ताह के भीतर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि 05 मई 2023 के आदेशों का अब तक कितना अनुपालन हुआ है, पुनरुद्धार कार्य की वास्तविक स्थिति क्या है, और देरी के लिए कौन से कारण जिम्मेदार रहे हैं। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है। मोतीझील को पूर्वी चंपारण की ऐतिहासिक और पर्यावरणीय धरोहर माना जाता है। हाईकोर्ट की ताजा सख्ती से एक बार फिर इसके संरक्षण और पुनरुद्धार की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है। पटना हाईकोर्ट ने मोतिहारी की ऐतिहासिक मोतीझील के संरक्षण, अतिक्रमण हटाने और पुनरुद्धार के मामले में बिहार सरकार के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया पाया है कि वर्ष 2023 में दिए गए उसके महत्वपूर्ण निर्देशों का अब तक समुचित पालन नहीं किया गया है। इसके बाद हाईकोर्ट ने बिहार के मुख्य सचिव को स्वयं चार सप्ताह के भीतर शपथ-पत्र के माध्यम से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह मामला अधिवक्ता कुमार अमित द्वारा दायर जनहित याचिका (CWJC No. 3876/2022) से संबंधित है। 05 मई 2023 को सुनवाई के दौरान तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मोतीझील के समग्र पुनरुद्धार के लिए कई अहम निर्देश दिए थे। अतिक्रमण-पार्क की सुविधाओं का विकास करें इनमें झील में अधूरे ड्रेजिंग और डी-सिल्टिंग कार्य को पूरा करना, अतिक्रमण हटाना, तटबंध और पार्क जैसी आधारभूत सुविधाओं का विकास करना, व्यापक पौधारोपण कराना तथा रतनगिरी चैनल से अतिक्रमण हटाकर झील के प्राकृतिक जलस्रोत को पुनर्जीवित करना शामिल था। उस समय, पूर्वी चंपारण के जिला पदाधिकारी द्वारा दिए गए आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए, हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को अधिकृत अधिकारी के माध्यम से पूरे कार्य की व्यक्तिगत निगरानी सुनिश्चित करने और प्रत्येक तीन माह पर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी आदेश दिया था। 2023 के आदेशों का अपेक्षित अनुपालन नहीं हुआ हालांकि, 21 अगस्त 2026 को MJC No. 3862/2024 की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति मोहित कुमार शाह एवं न्यायमूर्ति सौरेन्द्र पांडेय की खंडपीठ ने पाया कि वर्ष 2023 के आदेशों का अपेक्षित अनुपालन नहीं हुआ है। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि उसके आदेश की प्रति मुख्य सचिव और पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी को निगरानी और कार्रवाई के लिए भेजी गई थी, फिर भी निर्देशों का प्रभावी पालन सुनिश्चित नहीं हो सका। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 4 सप्ताह बाद निर्धारित की इस पर हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव, बिहार सरकार को स्वयं शपथ-पत्र के माध्यम से चार सप्ताह के भीतर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि 05 मई 2023 के आदेशों का अब तक कितना अनुपालन हुआ है, पुनरुद्धार कार्य की वास्तविक स्थिति क्या है, और देरी के लिए कौन से कारण जिम्मेदार रहे हैं। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है। मोतीझील को पूर्वी चंपारण की ऐतिहासिक और पर्यावरणीय धरोहर माना जाता है। हाईकोर्ट की ताजा सख्ती से एक बार फिर इसके संरक्षण और पुनरुद्धार की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है।

