हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी आज दिल्ली दौरे पर रहेंगे। वह दिल्ली के लिए कल शाम ट्रेन से रवाना हुए थे। दिल्ली में सीएम कई मीटिगों में शामिल होंगे। इसके अलावा उनकी केंद्रीय मंत्रियों से भी हरियाणा के मुद्दों को लेकर मुलाकात हो सकती है। सीएम के ट्रेन से दिल्ली जाने की गलियारों में काफी चर्चा हो रही है। मुख्यमंत्री का यह कदम केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि ऊर्जा बचत, पर्यावरण संरक्षण और सादगीपूर्ण प्रशासन का एक बड़ा संदेश माना जा रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पहले ही अपने सरकारी फ्लीट में गाड़ियों की संख्या कम करने का निर्णय लिया था, ताकि अनावश्यक ईंधन खर्च को रोका जा सके। राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इसे “लीड बाय एग्जाम्पल” की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जहां सरकार केवल अपील नहीं कर रही, बल्कि खुद उसका पालन भी कर रही है।
PM की अपील का हिस्सा ट्रेन का सफर सूत्रों के अनुसार, मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ऊर्जा बचत को जनआंदोलन बनाने की अपील की थी। इसके बाद हरियाणा सरकार ने भी फिजूलखर्ची रोकने और ईंधन की खपत कम करने को लेकर कई प्रशासनिक कदम उठाने शुरू किए। मुख्यमंत्री का ट्रेन से सफर उसी अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।
इससे पहले भी मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी चंडीगढ़ स्थित सुखना लेक पर साइकिल चलाकर लोगों को स्वस्थ जीवनशैली और ऊर्जा संरक्षण का संदेश दे चुके हैं। क्या बोले सीएम सैनी… सीएम नायब सैनी ने कहा है कि यदि आम नागरिक अपनी दैनिक जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करें, तो देश ऊर्जा बचत के क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन ला सकता है। मुख्यमंत्री ने लोगों से छोटी दूरी के लिए साइकिल का उपयोग करने, सार्वजनिक परिवहन अपनाने और अनावश्यक ईंधन खपत से बचने की अपील की थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का “ऊर्जा बचाओ” संदेश केवल सरकारी विभागों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे जनभागीदारी का अभियान बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि हर व्यक्ति अपनी दिनचर्या में थोड़ी जिम्मेदारी दिखाए, तो देश की ऊर्जा जरूरतों पर बड़ा सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
हरियाणा सरकार के सूत्रों का कहना है कि आने वाले समय में सरकारी विभागों में भी ऊर्जा संरक्षण को लेकर नई गाइडलाइंस जारी की जा सकती हैं। इनमें सरकारी वाहनों के सीमित उपयोग, डिजिटल बैठकों को बढ़ावा देने और ईंधन बचत आधारित कार्यप्रणाली पर जोर दिए जाने की संभावना है।


