Harvard और Cambridge में पढ़ाने वाले Amartya Sen का 93वां जन्मदिन, गरीबी पर किया काम

Harvard और Cambridge में पढ़ाने वाले Amartya Sen का 93वां जन्मदिन, गरीबी पर किया काम

नोबेल पुरस्कार विजेता और भारत के मशहूर अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन का 03 नवंबर को अपना 93वां जन्मदिन मना रहे हैं। साल 1998 में उनको अर्थशास्त्र में योगदान के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। उनका काम हमेशा से भारत और अन्य विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की गरीबी और इस गरीबी को दूर करने के तरीके पर केंद्रित रहा। हालांकि उन्होंने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा भारत के बाहर बिताया है। तो आइए जानते हैं उनके जन्मदिन के मौके पर अमर्त्य सेन के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में…

जन्म और परिवार

पश्चिम बंगाल के शांति निकेतन में 03 नवंबर 1933 को अमर्त्य सेन का जन्म हुआ था। उनके पिता का नाम आशुतोष से था। नउन्होंने अपनी शुरूआती शिक्षा कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज से पूरी की। इसके बाद उन्होंने कैम्ब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज में पढ़ाई की। वहीं साल 1959 में पीएचडी की।

कई यूनिवर्सिटीज में पढ़ाया अर्थशास्त्र

इसके अलावा उन्होंने भारत और इंग्लैंड के कई यूनिवर्सिटीज में अर्थशास्त्र पढ़ाया। इसके बाद वह साल 1988-98 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी चले गए। फिर साल 1998 में अमर्त्य सेन को कैम्ब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज का मास्टर नियुक्त किया गया। इस पद पर वह साल 2004 तक रहे। फिर वह लामोंट विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के रूप में हार्वर्ड वापस आ गए।

भूख पर लिखी कहानी

अमर्त्य सेन को अकाल की वजह पर काम करने के लिए भी जाना जाता है। जिसकी वजह से भोजन की वास्तविक या अनुमानित कमी के असर को रोकने या फिर सीमित करने के लिए प्रैक्टिकल सॉल्यूशन विकसित करने में मदद मिली। दरअसल, साल 1943 में अमर्त्य सेन ने बंगाल के अकाल को बेहद करीब से देखा है। इस अकाल के दौरान लाखों लोगों की मौत हो गई थी। अमर्त्य सेन का बंगाल में पड़े अकाल पर मानना था कि उस दौरान भारत में खाने-पीने की चीजों की पर्याप्त सप्लाई थी। लेकिन डिस्ट्रीब्यूशन की समस्या थी, जोकि सिर्फ कुछ लोगों के साथ में थी।

पुरस्कार

गरीबी और भूख जैसे विषयों पर काम करने के लिए अमर्त्य सेन को साल 1998 में अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। दरअस, जब उनको नोबेल पुरस्कार दिया गया था, तो वह यह प्रतिष्ठित पुरस्कार जीतने वाले पहले एशियाई नागरिक थे। फिर साल 1999 में अमर्त्य सेन को भारत रत्न से सम्मानित किया गया। इसके बाद साल 2011 में उनको यूएस नेशनल ह्यूमेनिटिज मैडल के लिए चुना गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *