Hantavirus Cruise: अमेरिकी यात्री की जुबानी, क्वारंटीन के अंदर बिताए जिंदगी-मौत के 42 दिनों की कहानी

Hantavirus Cruise: अमेरिकी यात्री की जुबानी, क्वारंटीन के अंदर बिताए जिंदगी-मौत के 42 दिनों की कहानी

Hantavirus Cruise: समंदर की लहरों पर छुट्टियां बिताने का सपना कब एक खौफनाक मंजर में बदल जाएगा, यह किसी ने नहीं सोचा था। एक आलीशान क्रूज शिप पर जब हंता वायरस ने दस्तक दी, तो वहां सवार यात्रियों की जिंदगी पूरी तरह बदल गई। अमेरिका के रहने वाले जैक रोसमरीन भी इसी क्रूज पर सवार थे, सीबीएस न्यूज के साथ बातचीत में बताया कि वे एक बेहद कड़े क्वारंटाइन दौर से गुजर रहे हैं। उन्होंने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि कैसे वह क्रूज एक चलते-फिरते कैदखाने जैसा महसूस होने लगा था।

सपना बना आफत, 42 दिनों का क्वारंटाइन

जैक रोसमरीन एक जाने-माने ट्रैवल इन्फ्लुएंसर हैं। वह पांच हफ्तों की एक खूबसूरत समुद्री यात्रा पर निकले थे, अमेरिका लौटने पर उन्हें और अन्य यात्रियों को कड़ी सुरक्षा में रखा गया। जैक को नेब्रास्का मेडिकल सेंटर के नेशनल क्वारंटाइन यूनिट में रखा गया, जहां उन्हें पूरे 42 दिनों तक अकेले एक कमरे में बिताना पड़ा।

जैक बताते हैं कि जब वह क्रूज के छोटे से केबिन में बंद थे, तो वह वक्त उनकी जिंदगी का सबसे काला दौर था। चारों तरफ सिर्फ अनजाना डर था। उन्हें अपने चचेरे भाई की शादी में शामिल होने इटली जाना था, लेकिन अब वह इस पारिवारिक समारोह का हिस्सा नहीं बन पाएंगे। जैक कहते हैं कि भले ही यह फैसला उनके लिए बेहद दुखद है, लेकिन समाज और दूसरों की सुरक्षा के लिए यह बिल्कुल सही कदम है।

जैक ने कहा, ‘जब मैं उस जहाज के छोटे से कमरे में बंद था और मन में सबसे बुरे ख्याल आ रहे थे, तब मैंने अपनी मंगेतर के साथ फोन पर शादी की प्लानिंग को लेकर बात की। उस बातचीत ने मुझे जिंदगी की सामान्य पटरी पर लौटने की उम्मीद दी और मुझे महसूस कराया कि इस छोटे से बक्से जैसे कमरे के बाहर भी एक खूबसूरत दुनिया मेरा इंतजार कर रही है।’

मसीहा बने डॉक्टर स्टीफन

ओरेगन के रहने वाले कैंसर विशेषज्ञ डॉक्टर स्टीफन कोर्नफेल्ड भी इसी जहाज पर छुट्टियां मना रहे थे। जब क्रूज पर लोग बीमार होने लगे, तो उन्होंने अपनी छुट्टियों को भुलाकर एक डॉक्टर का फर्ज निभाया। उन्होंने बीमार यात्रियों की देखभाल और जांच में दिन-रात एक कर दिया।

डॉ. स्टीफन कोर्नफेल्ड ने सीबीएस न्यूज से बात करते हुए बताया कि उनकी जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई है। इसी वजह से अब उन्हें बायो-कंटेनमेंट यूनिट से हटाकर यूनिवर्सिटी ऑफ नेब्रास्का मेडिकल सेंटर की क्वारंटाइन यूनिट में शिफ्ट कर दिया गया है।

राहत की बात यह है कि डॉक्टर स्टीफन की हंता वायरस जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से उन्हें भी क्वारंटीन में रखा गया है। अस्पताल के सीनियर डॉक्टरों ने उनके इस जज्बे की जमकर तारीफ की है और उन्हें एक सच्चा हीरो बताया है।

हंता वायरस की अब क्या स्थिति है?

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस क्रूज शिप पर हंता वायरस के 11 मामले सामने आ चुके हैं। मरने वालों में नीदरलैंड का एक जोड़ा और जर्मनी की एक महिला शामिल है। सबसे चिंता की बात यह है कि इस बार वायरस का एंडीज स्ट्रेन मिला है। आमतौर पर हंता वायरस चूहों के जरिए फैलता है, लेकिन यह खास स्ट्रेन एक इंसान से दूसरे इंसान में भी फैल सकता है।

यही वजह है कि अमेरिकी प्रशासन और सीडीसी बेहद सावधानी बरत रहे हैं। अमेरिका में लोगों पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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