ग्वालियर हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी की दलीलें खारिज कीं:दतिया बस हादसे में यूट्यूब वीडियो अस्वीकार, पीड़ितों को मुआवजा देने का आदेश

ग्वालियर हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी की दलीलें खारिज कीं:दतिया बस हादसे में यूट्यूब वीडियो अस्वीकार, पीड़ितों को मुआवजा देने का आदेश

ग्वालियर हाईकोर्ट ने दतिया बस हादसे से जुड़े मामले में बीमा कंपनी की कार्यप्रणाली पर सख्त टिप्पणी करते हुए पीड़ित पक्ष को मुआवजा देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निर्णय ठोस साक्ष्यों के आधार पर होता है, न कि अनुमान या अप्रमाणित सामग्री पर। यह मामला 8 नवंबर 2022 को भांहेर-दतिया रोड पर हुए बस हादसे से जुड़ा है। दुर्घटना में बस पलटने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण दतिया ने मामले में सुनवाई के बाद ड्राइवर की लापरवाही मानते हुए मृतक और घायलों को मुआवजा देने का आदेश दिया था। बीमा कंपनी ने बस की पहचान पर उठाया विवाद बीमा कंपनी ने हाईकोर्ट में अपील करते हुए दावा किया कि दुर्घटना बीमित बस (MP32 P 0184) से नहीं हुई। कंपनी के अनुसार किसी अन्य बिना बीमा वाली बस को बचाने के लिए इस बस को फर्जी तरीके से मामले में शामिल किया गया। यूट्यूब वीडियो और गवाह को कोर्ट ने किया खारिज सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि बीमा कंपनी ने अपने पक्ष में यूट्यूब वीडियो के अंश पेश किए थे। न्यायालय ने स्रोत और प्रमाणिकता स्थापित न होने पर इन्हें अस्वीकार कर दिया। साथ ही प्रस्तुत गवाह को ‘तैयार किया हुआ’ बताते हुए उसकी गवाही को अविश्वसनीय माना गया। बीमा कंपनी ने पुलिस जांच पर भी संदेह जताया था। इस पर कोर्ट ने कहा कि यदि जांच गलत थी, तो संबंधित पुलिस अधिकारियों को गवाह के रूप में पेश क्यों नहीं किया गया। जांच अधिकारी की रिपोर्ट को नहीं माना साक्ष्य न्यायालय ने कहा कि जांच अधिकारी की रिपोर्ट केवल राय हो सकती है, उसे ठोस साक्ष्य नहीं माना जा सकता। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि दुर्घटना बस क्रमांक MP32 P 0184 से ही हुई थी। बीमा कंपनी को मुआवजा देने का निर्देश हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी की अपील खारिज करते हुए पीड़ितों को मुआवजा देने के अधिकरण के आदेश को बरकरार रखा है।

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