Gwalior Accident: ‘मेरा बेटा जिंदा था, पुलिस ने कहा- पोस्टमार्टम के लिए भेज दो’, भावुक मां ने लगाया आरोप, अब तक 14 की मौत

Gwalior Accident: ‘मेरा बेटा जिंदा था, पुलिस ने कहा- पोस्टमार्टम के लिए भेज दो’, भावुक मां ने लगाया आरोप, अब तक 14 की मौत

Gwalior Sheetla Mata Temple Accident Update: ग्वालियर के प्राचीन शीतला माता मंदिर में नवरात्री के सातवें दिन शनिवार-रविवार की रात हुए हादसे को लेकर लगातार नई अपडेट सामने आ रही है। हादसे में घायलों का इलाज करने वाले जन आरोग्य अस्पताल के डॉ. सुधीर सक्सेना 13 लोगों की मौत और 40 से अधिक लोगों के घायल होने की पुष्टि की है। वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हादसे में अब तक 14 श्रद्धालुओं की मौत की बात सामने आई है। उन्होंने बताया कि 5-6 घायलों की स्थिति फिलहाल गंभीर बनी हुई है। डॉक्टर ने बताया कि मृतकों में बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल है। डॉक्टरों की टीम रात से ही घायलों के इलाज में लगी है। उन्होने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो डॉक्टरों की और भी टीमों को अस्पताल बुलाया जाएगा।

बता दें कि, रात करीब 1:30 बजे तेज रफ्तार ट्रक बेकाबू होकर मंदिर की तरफ मुड़ गया और श्रद्धालुओं को अपनी चपेट में लेते हुए मुख्य द्वार से टकरा गया। कलेक्टर ने जांच आदेश दिए है। हादसे के बाद स्थानीय लोगों और दुकानदारों में गहरा रोष है। वहीं, सीएम डॉ. मोहन यादव ने भी हादसे पर शोक व्यक्त किया। सीएम ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख, गंभीर घायलों को 2-2 लाख और अन्य घायलों को 50-50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।

अधिकारी साइन कराते रहे पेपर, नहीं बताया की बच्चे की हो चुकी है मौत- मृतक की बहन

शीतला माता मंदिर के पास हुए ट्रक हादसे के बाद एक मृतक की बहन का आक्रोश देखने को मिला। बहन ने आरोप लगाया कि उसके भाई का एक्सीडेंट रात दो बजे हुआ था लेकिन पुलिसकर्मी उसे 4 बजे हॉस्पिटल लेकर गए। ऐसा क्यों? भाई को खोने से दुखी और आक्रोशित बहन ने पुलिस पर आरोप लगाया कि अगर मेरे भाई को समय पर इलाज मिल जाता तो वह बच जाता है। बहन ने कहा कि “अधिकारी कह रहे हैं कि पेपर्स पर साइन कर दो। हमें बताया गया था कि उसका इलाज चल रहा है। हमें नहीं मालूम था कि हमारा बच्चा अब नहीं रहा।”

प्रशासन की लापरवाही ने छीन लिया मेरा बेटा- पिता ने आंखों में आए आंसू

हादसे में अपने बेटे खोने वाले भावुक पिता ने भी प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए है। पिता ने बताया कि हादसे में उनके 15 साल के बेटे दिव्यांश कुशवाहा की जान चली गई है। दिव्यांश के पिता ने आरोप लगाते हुए कहा कि वो पुलिस प्रशासन जिसने जो दोपहिया वाहन को भी रास्ते से निकलने नहीं दे रहा था, उन्होंने इतना भारी वाहन कैसे घुसने दिया। भावुक हुए पिता की आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने पुलिस प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन की लापरवाही ने मुझसे मेरा बेटा छीन लिया। उन्होंने सरकार से जिम्मेदार सीनियर पुलिस अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की।

‘मेरा बेटा जिंदा था, पुलिस ने उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजने को कहा’

वहीं एक अन्य मृतक बच्चे की मां ने बताया कि हादसे के करीब दो घंटे यानी चार बजे के बाद पुलिस घटनास्थल पर पहुंची थी। मां ने बताया कि क्रेन की मदद से उनके 14 साल के बेटे को बाहर निकाला गया था। बाहर निकाले जाने के बाद भी बेटे की सांसें चल रही थी। महिला ने आरोप लगाया कि पुलिस ने हमें उसे पोस्टमार्टम के लिए ले जाने के लिए कहा, लेकिन हमने मना कर दिया क्योंकि वह जिंदा था। महिला ने बताया कि वह उसका इलाज निजी अस्पताल में करवाना चाहते थे लेकिन पुलिस ने उसे एम्बुलेंस में बिठाकर ले गई। इसकेकुछ समय बाद करीब बस स्टैंड से करीब 20 पुलिसवालों के साथ उसे वापस लाया गया और हमें बताया गया कि- आपका बेटा अब नहीं रहा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *