नयी दिल्ली, दो अक्टूबर संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख साइमन स्टील का कहना है कि हरित ऊर्जा गलियारा चरण-तीन (जीईसी-तीन) योजना एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे भारत के लोगों और अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण लाभ मिलेगा। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को इस योजना को मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य 135 गीगावाट अक्षय ऊर्जा की निकासी के लिए बैटरी भंडारण क्षमता से युक्त अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली स्थापित करना है।
यह योजना ‘कर्टेलमेंट’ की समस्या से निपटने में भी मदद करेगी, जिसमें ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने के लिए ग्रिड संचालक अक्षय ऊर्जा स्रोतों से बिजली उत्पादन सीमित कर देते हैं। इस पहल पर बृहस्पतिवार को जारी एक बयान में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा सम्मेलन (यूएनएफसीसीसी) के कार्यकारी सचिव स्टील ने कहा, ‘‘यह देश की बढ़ती अक्षय ऊर्जा क्षमता का दोहन करने में मदद करेगा, जिससे लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों के लिए बिजली उपलब्ध कराने, भारत की आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने और वैश्विक सौर महाशक्ति के रूप में भारत की स्थिति को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘बैटरी भंडारण भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के लिए ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक वृद्धि हासिल करने का एक रणनीतिक अवसर प्रदान करता है।’’
जीईसी-तीन योजना की कुल परियोजना लागत 1,86,405 करोड़ रुपये है। इसमें अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली के विकास के लिए 1,36,378 करोड़ रुपये और 50 गीगावाट-घंटे की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (बीईएसएस) के लिए 50,000 करोड़ रुपये शामिल हैं।
योजना के तहत 54,082 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता दी जाएगी। इससे अंतर-राज्यीय पारेषण शुल्क की भरपाई करने में मदद मिलेगी और बिजली की लागत को कम रखने में सहायता मिलेगी। स्टील ने कहा कि मजबूत बिजली ग्रिड और बैटरी भंडारण से विनिर्माण, निर्माण और ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में अधिक रोजगार के अवसर पैदा होंगे तथा वैश्विक स्तर पर अक्षय ऊर्जा और विद्युत प्रौद्योगिकी के तेजी से विस्तार के बीच भारत के अवसरों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

