MP Green Building Technology: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (mp cm dr mohan yadav) ने कहा है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चलेंगे। प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर किया गया निर्माण ही भविष्य की जरूरत है। मोहन यादव ने राजा भोज की स्थापत्य परंपरा, उज्जैन, मांडव और भोपाल के बड़े तालाब का जिक्र करते हुए बताया कि भारत की प्राचीन निर्माण तकनीक आज भी दुनिया को दिशा दे सकती है।
मोहन यादव शनिवार को राजधानी भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर आधारित सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले, इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस की 113 गवर्निंग काउंसिल मीटिंग का शुभारंभ मोहन यादव ने किया। इस मौके पर लोक निर्माण विभाग का आईआईटी इंदौर के साथ एमओयू भी साइन किया।
मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि राजा भोज ने भोज पत्रों पर लेख और निर्माण कार्यों के माध्यम से हमें प्राचीन भारतीय निर्माण परंपरा की अद्भुत सौगात दी है। हमारा संसार पंचतत्वों से बना है और पृथ्वी इनके केंद्र में है। पृथ्वी का भौगोलिक केंद्र उज्जैन के पास डोंगला में है। यह प्राचीन काल से समय गणना का मुख्य केंद्र माना जाता है। यादव ने कहा कि इंदौर के पास मांडव महल स्थापत्य का उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां बीच में तालाब बना है और इससे मंदिर की दूसरी मंजिल तक शीलता रहती है। तुंगभद्रा नदी के किनारे श्रृंगेरी में भी स्थापत्य कला का अद्भुद उदाहरण देखने को मिलते हैं।

भोपाल। इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस की 113 गवर्निंग काउंसिल मीटिंग का शुभारंभ करते सीएम मोहन यादव एवं पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह।
सरकार ने लिया जल संरचनाओं को दुरुस्त करने का संकल्प
डॉ. यादव ने कहा कि विकास हमारी प्राथमिकता है। लेकिन, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवेलपमेंट में राशि का सदुपयोग हो इसके लिए ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर हम आगे बढ़ रहे हैं। प्रदेश में पर्यावरण अनुकूल निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। ग्लोबल वॉर्मिंग आज चुनौती बनकर सामने आई है। राज्य सरकार ने गुढ़ी पड़वा से लेकर गंगा दशहरा तक जल संवर्धन अभियान की शुरुआत की है। इसके अंतर्गत प्रदेशभर में कुओं, बावड़ियों और सभी जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार कार्य किया जा रहा है।
क्या बोले पीडब्ल्यूडी मंत्री
कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह (pwd minister rakesh singh) ने कहा कि प्रदेश में टिकाऊ निर्माण के लिए हम भारतीय प्राचीन निर्माण तकनीक पर आगे बढ़ रहे हैं। हमारी हड़प्पा सभ्यता में प्रकृति के संतुलन के साथ निर्माण कार्य किए जाते थे। अंकोरबाट का मंदिर भी प्रकृति के साथ संतुलन का अद्भुत और उत्कृष्ट उदाहरण है। इनके निर्माण में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि आने वाली पीढ़ियों को इनका लाभ मिले। महलों के निर्माण में भी हमारी तकनीक काफी उन्नत रही है। प्रदेश में बनने वाले सभी भवन अब ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर बनाए जा रहे हैं। यह पर्यावरण संरक्षण के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। थ्रीडी भवन निर्माण तकनीक भी भविष्य में लाभकारी सिद्ध होगी। कार्यक्रम में लोक निर्माण विभाग की स्मारिका, न्यूज लेटर और आईबीसी की बिल्ट इन्वायरनमेंट पत्रिका का विमोचन किया गया। इस दौरान लोक निर्माण विभाग ने आईआईटी इंदौर और गृहा संस्था के साथ एमओयू साइन किया।


