Gold Vs Silver: सोना और चांदी दोनों ही इस साल निवेशकों के रडार पर रहे हैं, लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है। ईरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को दोबारा खोलने के संकेतों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई है। इसके साथ ही सोने और चांदी में भी ऊंचे स्तरों से गिरावट देखने को मिली है। ऐसे में निवेशकों के सामने बड़ा सवाल है कि आगे सोना ज्यादा भरोसेमंद रहेगा या चांदी में ज्यादा मौका बन सकता है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने संकेत दिया है कि अगर अमेरिका सैन्य दबाव कम करता है और ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकाबंदी हटाता है, तो स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को दोबारा खोला जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, इन शर्तों के पूरा होने पर तेहरान करीब सात दिन के भीतर इस रणनीतिक जलमार्ग को खोल सकता है। ईरान का यह रुख ऐसे समय में देखने को मिला है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण तेल बाजार में जबरदस्त उथल-पुथल है। अब तेल के भाव में नरमी ने सोने और चांदी की आगे की दिशा को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है।
सोने-चांदी में दिखी गिरावट
सोने-चांदी की घरेलू वायदा कीमतों में बुधवार को गिरावट देखने को मिली है। बुधवार दोपहर 2 बजकर 23 मिनट पर एमसीएक्स एक्सचेंज पर 5 अक्टूबर की डिलीवरी वाला सोना 0.40 फीसदी या 617 रुपये की गिरावट के साथ 1,52,099 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड करता दिखा। वहीं, 4 दिसंबर की डिलीवरी वाली चांदी का भाव इस समय 0.66 फीसदी या 1575 रुपये की गिरावट के साथ 2,38,313 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड करता दिखा।
रिकॉर्ड तेजी के बाद सोने-चांदी में गिरावट
फरवरी के आखिर में संघर्ष बढ़ने के बाद सोने और चांदी दोनों की कीमतों में तेज उछाल आया था। लेकिन ऊंचे स्तरों पर पहुंचने के बाद अब दोनों धातुओं में कुछ मुनाफावसूली देखने को मिली है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड अपने करीब 5,500 डॉलर प्रति औंस के हाई से लगभग 10% से 20% नीचे आ चुका है। वहीं, स्पॉट सिल्वर में भी ऊंचे स्तरों से करीब 12% से 15% की गिरावट आई है। इसी तरह घरेलू वायदा बाजार में भी कीमतें अपने उच्च स्तरों से काफी नीचे आ गई हैं।
सोने की कीमत का आगे क्या है अनुमान?
एलकेपी सिक्योरिटीज के वीपी जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच सोने में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। उनके अनुसार, सोना 1,51,000 से 1,54,500 रुपये के दायरे में रह सकता है। त्रिवेदी के मुताबिक, हाल में सोने ने 1,51,850 से 1,53,350 रुपये के बीच काफी उतार-चढ़ाव दिखाया। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से सोने को सपोर्ट मिला, लेकिन डॉलर इंडेक्स के 100 के ऊपर जाने से इस पर दबाव बना।
अब बाजार की नजर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यूएन स्पीच, चीन के राष्ट्रपति Xi जिनपिंग की अमेरिका यात्रा और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से जुड़े घटनाक्रम पर रहेगी। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, इसलिए सोने में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना बनी हुई है।
चांदी में भी बड़े उतार-चढ़ाव की आशंका
वेंचुरा के हेड ऑफ कमोडिटी एंड सीआरएम एन एस रामास्वामी के मुताबिक, चांदी फिलहाल 63 से 75 डॉलर प्रति औंस के बीच स्टेबल होने की कोशिश कर सकती है, लेकिन इस दायरे में भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। उनके मुताबिक, ब्याज दरों और डॉलर में उतार-चढ़ाव चांदी की दिशा के लिए अहम रहेंगे। अगर महंगाई में नरमी आती है, फेड की ओर से ब्याज दरों में कटौती के संकेत मिलते हैं, सोलर डिमांड स्थिर रहती है और डॉलर कमजोर होता है, तो मध्यम अवधि में चांदी 75 से 80 डॉलर प्रति औंस तक जा सकती है। एमसीएक्स के हिसाब से यह स्तर करीब 3.25 लाख रुपये प्रति किलो के बराबर बताया गया है।
वहीं, अगर ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं और चांदी एक सीमित दायरे में कारोबार करती है, तो 60 से 63 डॉलर प्रति औंस का स्तर देखने को मिल सकता है। फिलहाल चांदी करीब 64 से 66 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही है, जो MCX पर करीब 2.35 लाख से 2.38 लाख रुपये प्रति किलो के बराबर है।
सोना या चांदी, किसमें मिल सकता है ज्यादा फायदा?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मौजूदा माहौल में सोना और चांदी में से किसे ज्यादा तवज्जो दी जाए। सेबी रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट अनुज गुप्ता के मुताबिक, चांदी की तुलना में सोना ज्यादा अच्छा परफॉर्म कर सकता है, क्योंकि भू-राजनीतिक तनाव के दौरान सोने को चांदी की तुलना में ज्यादा सीधा फायदा मिलता है। इसकी वजह यह है कि सोने को लंबे समय से सुरक्षित निवेश यानी सेफ हैवन एसेट माना जाता है। सोने का अमेरिकी डॉलर, बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों के साथ भी उल्टा संबंध देखने को मिलता है। दूसरी तरफ, चांदी की मांग का बड़ा हिस्सा औद्योगिक इस्तेमाल से जुड़ा है। इसलिए इसकी कीमत पर वैश्विक आर्थिक गतिविधियों और इंडस्ट्रियल डिमांड का असर ज्यादा पड़ता है। यानी जब बाजार में तनाव बढ़ता है तो सोना सेफ हैवन एसेट के रूप में मजबूत होता है।
निवेशकों को जल्दबाजी से बचने की सलाह
सेबी रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार डॉ रवि सिंह के अनुसार, हाल की कीमतों से स्पष्ट है कि सोने और चांदी दोनों में अभी काफी उतार-चढ़ाव है। उनका कहना है कि निवेशकों को हर छोटी तेजी या गिरावट पर प्रतिक्रिया देने से बचना चाहिए। जो लोग लंबे समय के लिए पोर्टफोलियो में सोना या चांदी शामिल करना चाहते हैं, वे एकमुश्त निवेश करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से खरीदारी पर विचार कर सकते हैं। इससे एक ही भाव पर पूरा पैसा लगाने का जोखिम कम होता है। आने वाले दिनों में सोने और चांदी की चाल काफी हद तक अमेरिकी डॉलर, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमतों और मिडिल ईस्ट से जुड़े घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)

