भारतीय फुटबॉल टीम के मिडफील्डर और मोहन बागान के स्टार खिलाड़ी ललियांजुआला छांगते को शनिवार को भारतीय फुटबॉल खिलाड़ी संघ (एफपीएआई) के 2026 पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ भारतीय खिलाड़ी चुना गया जबकि मनीषा कल्याण ने वर्ष की सर्वश्रेष्ठ भारतीय महिला फुटबॉलर का पुरस्कार अपने नाम किया। एफपीएआई ने पुरुष और महिला फुटबॉल में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों और कोचों को सम्मानित किया। 29 साल के छांगते पिछले कुछ समय से भारत और मोहन बागान दोनों के लिए अहम खिलाड़ी रहे हैं।शिलांग लाजोंग के फ्रांकी बुआम को वर्ष का सर्वश्रेष्ठ आई-लीग खिलाड़ी जबकि जमशेदपुर एफसी के सनन मोहम्मद के को वर्ष का सर्वश्रेष्ठ युवा खिलाड़ी चुना गया। ईस्ट बंगाल के लिए भी यह समारोह खास रहा। क्लब ने 2025-26 सत्र में 22 साल का इंतजार खत्म करते हुए इंडियन सुपर लीग का खिताब जीता था।उसे आईएसएल चैंपियन का सम्मान मिला। वहीं ईस्ट बंगाल एफसी महिला टीम को इंडियन विमेंस लीग चैंपियन बनने के लिए सम्मानित किया गया। मिगुएल फिगुएरा डामासेनो को वर्ष का सर्वश्रेष्ठ विदेशी खिलाड़ी चुना गया।ओवेन कॉयल को वर्ष का सर्वश्रेष्ठ पुरुष कोच और एंथनी एंड्रयूज को वर्ष की सर्वश्रेष्ठ महिला कोच का पुरस्कार मिला। सैनफिदा नोंग्रुम को वर्ष की सर्वश्रेष्ठ युवा महिला खिलाड़ी चुना गया। अनुभवी कोच सावियो मेडिएरा को कोच शिक्षा पुरस्कार दिया गया।‘रैपिड स्पोर्ट्स’ और ‘द राइट वीग’ को ‘प्लेयर परफॉर्मेंस एंड डेवलपमेंट अवॉर्ड’ दिया गया। पूर्व भारतीय कप्तान और एफपीएआई के संस्थापक अध्यक्ष बाइचुंग भूटिया ने कहा कि खिलाड़ियों के वोट से मिलने के कारण यह पुरस्कार बेहद खास है। उन्होंने कहा कि भारत में फुटबॉलरों के लिए यह सबसे सम्मानित पुरस्कारों में से एक बन चुका है।उनके मुताबिक, खिलाड़ी अपने साथियों के प्रदर्शन को करीब से देखते हैं, इसलिए उनका दिया सम्मान ज्यादा मायने रखता है। पूर्व दिग्गज भूटिया ने एफपीएआई की भूमिका पर भी जोर देते हुए कहा कि संगठन का काम सिर्फ बड़े स्टार खिलाड़ियों की मदद करना नहीं है। देश में निचली लीगों में खेलने वाले सैकड़ों खिलाड़ियों की भी अपनी समस्याएं हैं और कई बार उनकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं होता।ऐसे खिलाड़ियों की आवाज बनना और उनके हक के लिए खड़ा होना एफपीएआई की अहम जिम्मेदारी है।
भारतीय फुटबॉल टीम के मिडफील्डर और मोहन बागान के स्टार खिलाड़ी ललियांजुआला छांगते को शनिवार को भारतीय फुटबॉल खिलाड़ी संघ (एफपीएआई) के 2026 पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ भारतीय खिलाड़ी चुना गया जबकि मनीषा कल्याण ने वर्ष की सर्वश्रेष्ठ भारतीय महिला फुटबॉलर का पुरस्कार अपने नाम किया। एफपीएआई ने पुरुष और महिला फुटबॉल में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों और कोचों को सम्मानित किया। 29 साल के छांगते पिछले कुछ समय से भारत और मोहन बागान दोनों के लिए अहम खिलाड़ी रहे हैं।
शिलांग लाजोंग के फ्रांकी बुआम को वर्ष का सर्वश्रेष्ठ आई-लीग खिलाड़ी जबकि जमशेदपुर एफसी के सनन मोहम्मद के को वर्ष का सर्वश्रेष्ठ युवा खिलाड़ी चुना गया। ईस्ट बंगाल के लिए भी यह समारोह खास रहा। क्लब ने 2025-26 सत्र में 22 साल का इंतजार खत्म करते हुए इंडियन सुपर लीग का खिताब जीता था।
उसे आईएसएल चैंपियन का सम्मान मिला। वहीं ईस्ट बंगाल एफसी महिला टीम को इंडियन विमेंस लीग चैंपियन बनने के लिए सम्मानित किया गया। मिगुएल फिगुएरा डामासेनो को वर्ष का सर्वश्रेष्ठ विदेशी खिलाड़ी चुना गया।
ओवेन कॉयल को वर्ष का सर्वश्रेष्ठ पुरुष कोच और एंथनी एंड्रयूज को वर्ष की सर्वश्रेष्ठ महिला कोच का पुरस्कार मिला। सैनफिदा नोंग्रुम को वर्ष की सर्वश्रेष्ठ युवा महिला खिलाड़ी चुना गया। अनुभवी कोच सावियो मेडिएरा को कोच शिक्षा पुरस्कार दिया गया।
‘रैपिड स्पोर्ट्स’ और ‘द राइट वीग’ को ‘प्लेयर परफॉर्मेंस एंड डेवलपमेंट अवॉर्ड’ दिया गया। पूर्व भारतीय कप्तान और एफपीएआई के संस्थापक अध्यक्ष बाइचुंग भूटिया ने कहा कि खिलाड़ियों के वोट से मिलने के कारण यह पुरस्कार बेहद खास है। उन्होंने कहा कि भारत में फुटबॉलरों के लिए यह सबसे सम्मानित पुरस्कारों में से एक बन चुका है।
उनके मुताबिक, खिलाड़ी अपने साथियों के प्रदर्शन को करीब से देखते हैं, इसलिए उनका दिया सम्मान ज्यादा मायने रखता है। पूर्व दिग्गज भूटिया ने एफपीएआई की भूमिका पर भी जोर देते हुए कहा कि संगठन का काम सिर्फ बड़े स्टार खिलाड़ियों की मदद करना नहीं है। देश में निचली लीगों में खेलने वाले सैकड़ों खिलाड़ियों की भी अपनी समस्याएं हैं और कई बार उनकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं होता।
ऐसे खिलाड़ियों की आवाज बनना और उनके हक के लिए खड़ा होना एफपीएआई की अहम जिम्मेदारी है।
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