Firing Squad Execution USA: अमेरिका में मौत की सजा को लेकर एक ऐसा फैसला सामने आया है, जिसने न्याय, पारदर्शिता और मानवाधिकारों पर नई बहस छेड़ दी है। फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर 13 लोगों की जान लेने वाले पूर्व सैन्य अधिकारी निदाल मलिक हसन को फायरिंग स्क्वाड से मृत्युदंड देने की योजना बनाई गई है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के मुताबिक, इस कार्रवाई को लाइव दिखाने की भी व्यवस्था होगी। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया पूरी होने और प्रसारण की अनुमति को लेकर कई सवाल बाकी हैं।
13 लोगों की हत्या, अब फायरिंग स्क्वाड से सजा देने की तैयारी
अमेरिका के टेक्सास स्थित फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर 5 नवंबर 2009 को हुई गोलीबारी के मामले में दोषी ठहराए गए पूर्व अमेरिकी सेना मेजर निदाल मलिक हसन को लेकर पेंटागन ने बड़ा ऐलान किया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि हसन को फायरिंग स्क्वाड के जरिए मृत्युदंड दिया जाएगा और जनता इस प्रक्रिया को लाइव देख सकेगी।
बीबीसी (BBC) की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित कार्रवाई 3 दिसंबर को फोर्ट हुड में होनी है। अमेरिकी सेना के सचिव ने तारीख की घोषणा की है, जबकि पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने बताया कि हेगसेथ की सिफारिश को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंजूरी दी है। हालांकि, निर्धारित तारीख पर सजा वास्तव में लागू हो पाएगी या नहीं, यह अभी निश्चित नहीं है।
2009 का हमला, जिसने पूरे अमेरिका को झकझोरा
हसन ने सैन्य अड्डे की एक मेडिकल इमारत में गोलीबारी की थी। उस समय वहां तैनाती से पहले जांच और टीकाकरण के लिए सैनिक मौजूद थे। हमले में 12 अमेरिकी सैनिकों और एक आम नागरिक की मौत हुई थी, जबकि 30 से अधिक लोग घायल हुए थे। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने हसन को गोली मारी, जिससे वह आंशिक रूप से लकवाग्रस्त हो गया।
2013 में सैन्य अदालत ने उसे मौत की सजा सुनाई थी। मुकदमे के दौरान हसन ने हमले में अपनी भूमिका स्वीकार की थी। उसने दावा किया था कि वह अफगानिस्तान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और तालिबान के खिलाफ अभियान का विरोध कर रहा था।
छह दशक बाद सैन्य मृत्युदंड, लेकिन कानूनी पेच बरकरार
अमेरिका में आखिरी सैन्य मृत्युदंड 1961 में दिया गया था। वहीं, फायरिंग स्क्वाड से आखिरी सैन्य फांसी जनवरी 1945 में हुई थी, जब अमेरिकी सैनिक एडी स्लोविक को गोली मारकर मौत की सजा दी गई थी। ऐसे में हसन का मामला अमेरिकी सैन्य न्याय व्यवस्था के इतिहास में असाधारण महत्व रखता है।
हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि हसन की सजा से जुड़ी अपीलीय प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। वकील जॉन मिल्स के अनुसार, संघीय अदालत में चुनौती दिए जाने पर सजा के क्रियान्वयन पर रोक लग सकती है। इसलिए घोषित तारीख को अंतिम मानना जल्दबाजी होगी।
क्या सोशल मीडिया पर दिख सकेगी मौत की सजा?
लाइवस्ट्रीमिंग की घोषणा ने एक और सवाल खड़ा कर दिया है आखिर इस प्रसारण को दिखाएगा कौन? यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक और एक्स जैसे बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म हिंसक या मौत के दृश्य दिखाने पर प्रतिबंध अथवा सख्त सीमाएं लगाते हैं। ऐसे में प्रसारण का मंच और दर्शकों की उम्र से जुड़े नियम अभी स्पष्ट नहीं हैं।
येल लॉ स्कूल के व्याख्याता यूजीन आर. फिडेल ने इस फैसले की आलोचना की है। वहीं, फोर्डहम यूनिवर्सिटी की कानून विशेषज्ञ डेबोरा डेनो का मानना है कि ऐसा प्रसारण मृत्युदंड की वास्तविक प्रक्रिया को जनता के सामने ला सकता है। समर्थकों के लिए यह पारदर्शिता का मुद्दा हो सकता है, जबकि आलोचक इसे मानवीय गरिमा और न्याय की सीमाओं से जोड़ रहे हैं।
मृत्युदंड पर फिर तेज होगी बहस
एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, 2024 में दुनिया के 15 देशों में कम से कम 1,518 लोगों को मृत्युदंड दिया गया था; चीन के आंकड़े इसमें शामिल नहीं थे, क्योंकि वहां की वास्तविक संख्या सार्वजनिक नहीं है। यह पृष्ठभूमि बताती है कि मृत्युदंड केवल अमेरिकी सैन्य न्याय का मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक मानवाधिकार बहस का हिस्सा भी है।
हसन के मामले में अंतिम फैसला केवल तय तारीख पर निर्भर नहीं करेगा। कानूनी समीक्षा, प्रशासनिक मंजूरी और प्रसारण की व्यावहारिक सीमाएं तय करेंगी कि अमेरिका में दशकों पुरानी सैन्य सजा की प्रक्रिया किस रूप में आगे बढ़ती है।


BREAKING: The US Army has scheduled a firing squad execution for the 2009 Fort Hood mass shooter, Major Nidal Hasan. Nidal, who killed 13 people and injured 32 in the 2009 Fort Hood shooting, will have his execution by firing squad livestreamed.