Food Poisoning Death in Mumbai : मुंबई से एक दर्दनाक खबर आ रही है। बताया जा रहा है कि पायधुनी इलाके में एक परिवार के चार लोगों की मृत्यु अचानक हो गई। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मृतकों में पति-पत्नी और उनकी दो मासूम बेटियां हैं। जिन्होंने पहले चिकन बिरयानी और बाद में तरबूज खाया। इसके बाद मौत हो गई।
चिकन बिरयानी और तरबूज बना मौत का कारण
हालांकि, प्राथमिक सूचना के आधार पर यही जानकारी सामने आई कि परिवार ने बिरयानी और तरबूज खाया था। स्थानीय पुलिस ने मृतकों की पहचान अब्दुल्ला डोकाडिया (40 वर्ष), उनकी पत्नी नसरीन डोकाडिया (35 वर्ष), बेटियों आयशा (16 वर्ष) और जैनब (13 वर्ष) के रूप में की है। बता दें, मौत का स्पष्ट कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आ सकता है।
Food Poisoning Death Reason | फूड पॉइजनिंग से मौत
पत्रिका के रवि कुमार गुप्ता ने फूड पॉइजनिंग के बारे में डॉ. हिमांशु गुप्ता (सीनियर फिजिशियन) और डॉ. अर्जुन राज (आयुर्वेदिक) से समझा। उन्होंने बताया कि क्यों नॉन वेज और तरबूज जैसे फलों को एक साथ नहीं खाना चाहिए या खाने से बचना चाहिए।
डॉ. गुप्ता कहते हैं, “नॉन-वेज (मांस, मछली या अंडा) के साथ कुछ फलों का सेवन वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पाचन संबंधी समस्याओं और फूड पॉइजनिंग जैसी स्थितियों का कारण बन सकता है। इसके पीछे मुख्य कारण पाचन दर में अंतर और एंजाइमों की प्रतिक्रिया है।”
खट्टे फल और नॉन वेज का सेवन ना करें
वो कहते हैं कि नॉन-वेज प्रोटीन और फैट से भरपूर होता है, जिसे पचाने के लिए पेट में विशिष्ट एसिड की आवश्यकता होती है। खट्टे फल (जैसे संतरा, नींबू, चकोतरा) में साइट्रिक एसिड होता है। जब प्रोटीन के साथ एसिड का मेल होता है, तो यह पाचन प्रक्रिया को धीमा कर सकता है। इससे एसिड रिफ्लक्स, सीने में जलन और पेट में भारीपन महसूस हो सकता है।
तरबूज और खरबूजा के साथ नॉन वेज खाना गलत
तरबूज जैसे फलों में पानी की मात्रा बहुत अधिक होती है और ये बहुत जल्दी पच जाते हैं। मांस को पचने में 4 से 6 घंटे लग सकते हैं, जबकि तरबूज 20-30 मिनट में पच जाता है। जब इन्हें एक साथ खाया जाता है, तो फल मांस के पचने तक पेट में रुका रहता है, जिससे वह फर्मेंट होने लगता है। इस प्रक्रिया से गैस, पेट फूलना और गंभीर मामलों में पाचन से जुड़ी फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है।
दूध आधारित फल या स्मूदी
डॉ. राज कहते हैं, यदि आप नॉन-वेज के साथ ऐसे फल खाते हैं जो दूध के साथ तैयार किए गए हों (जैसे मैंगो शेक या चीकू शेक)। दूध और मांस दोनों ही भारी प्रोटीन हैं। आयुर्वेद और कुछ आधुनिक पोषण सिद्धांतों के अनुसार, दो अलग-अलग प्रकार के प्रोटीन एक साथ पचाने में शरीर पर अत्यधिक दबाव डालते हैं। यह पाचन तंत्र में विषाक्त पदार्थ पैदा कर सकता है, जिससे मतली या त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
अत्यधिक मीठे फल (High-Sugar Fruits)
वो कहते हैं कि आम या अंगूर जैसे फल जिनमें फ्रुक्टोज अधिक होता है। चीनी का पाचन बहुत तेज होता है। प्रोटीन के साथ चीनी का मिश्रण पेट में लंबे समय तक रहने के कारण पेट के बैक्टीरिया द्वारा फर्मेंटेशन की प्रक्रिया शुरू कर देता है। इससे पाचन तंत्र में गड़बड़ी और पेट में ऐंठन हो सकती है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न शोधों और वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित है, जिसका उद्देश्य केवल जागरूकता बढ़ाना और शैक्षिक जानकारी प्रदान करना है। इसे किसी बीमारी के उपचार या डॉक्टरी सलाह के रूप में न लें। अपनी जीवनशैली या आहार में कोई भी बदलाव करने से पहले किसी योग्य चिकित्सक या संबंधित विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।


