Egg Price Hike Reason: देशभर में खाद्य महंगाई लगातार बढ़ रही है। चीनी, प्याज, खाद्य तेल के बाद अब अंडे की कीमतों में भी तेजी आने की आशंका बढ़ गई है। दरअसल, पोल्ट्री फीड में इस्तेमाल होने वाले सोया मील और मक्का दोनों महंगे होने से मुर्गी पालकों की लागत बढ़ गई है। इसका सीधा असर अंडे की सप्लाई पर भी पड़ रहा है, क्योंकि कई किसान पुरानी मुर्गियों को जल्दी हटा रहे हैं और नए चूजों की संख्या कम कर रहे हैं। बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र के अंडा वितरकों का मानना है कि जल्द ही Eggoz और Country Chicken Co. जैसे ब्रांडेड और स्पेशलिटी अंडों की कीमत बढ़कर 20 से 25 रुपये प्रति अंडा तक पहुंच सकती है।
कई शहरों में तेज हुई कीमत
नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमेटी (NECC) के अनुसार, जुलाई में उसके 34 केंद्रों पर अंडे की औसत मासिक कीमतें सालाना आधार पर 23 फीसदी से 39 फीसदी तक बढ़ीं। दिल्ली में 38.7 फीसदी, पुणे और हैदराबाद में 31.2 फीसदी और मुंबई में 29.8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
सामान्य अंडे भी हुए महंगे
महाराष्ट्र में सामान्य अंडे फिलहाल 7.50 से 9 रुपये प्रति पीस बिक रहे हैं। यह कीमत एक साल पहले के मुकाबले करीब 40 फीसदी तक ज्यादा है। महाराष्ट्र में अंडों की खपत स्थानीय उत्पादन से काफी अधिक है, इसलिए महाराष्ट्र को तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों से भी अंडों की सप्लाई मंगानी पड़ती है। उद्योग के अनुमान के अनुसार, महाराष्ट्र में रोजाना 2.2 से 2.5 करोड़ अंडों की खपत होती है। इसके मुकाबले स्थानीय उत्पादन सिर्फ 1.2 से 1.4 करोड़ अंडे प्रतिदिन है। यानी राज्य की करीब 40 से 50 फीसदी जरूरत दूसरे राज्यों से आने वाले अंडों से पूरी होती है।
अंडों की महंगाई का कारण क्या है?
मुर्गियों के लिए तैयार किया गया विशेष पौष्टिक आहार पोल्ट्री फीड है। इसमें सोया मील (सोया DOC) प्रोटीन का मुख्य स्रोत है, जबकि मक्का ऊर्जा के लिए जरूरी है। घरेलू बाजार में सोयाबीन की उपलब्धता कम होने से सोया मील की कीमत 45 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 65 से 66 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है। वहीं, एथेनॉल उत्पादन में बढ़ते इस्तेमाल के कारण मक्के की उपलब्धता कम हो गई है। दोनों प्रमुख फीड सामग्री महंगी होने से एक अंडे की उत्पादन लागत बढ़कर 5.20 से 5.50 रुपये हो गई है, जो पहले 4 से 4.50 रुपये थी।
अक्टूबर के बाद मिल सकती है राहत
नई खरीफ सोयाबीन और मक्का की फसल अक्टूबर-नवंबर के आसपास मंडियों में आने पर कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, एथेनॉल उद्योग से मक्का की बढ़ती मांग के कारण पोल्ट्री फीड की लागत पहले के मुकाबले ऊंची बनी रह सकती है।

