Share Market News: एक तरफ विदेशी निवेशक लगातार भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, दूसरी तरफ घरेलू संस्थागत निवेशक बाजार को संभालने में जुटे हैं। यही वजह है कि भारी बिकवाली के बावजूद बाजार पूरी तरह टूट नहीं रहा। 2026 में अब तक विदेशी संस्थागत निवेशक यानी FIIs भारतीय शेयर बाजार से 2.22 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। सिर्फ इस महीने ही वे करीब 30,374 करोड़ रुपये के शेयर बेच चुके हैं। लगातार तीसरे महीने विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी है।
बाजार क्यों नहीं टूट रहा?
शुक्रवार को भी FIIs ने 4,440 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेच डाले। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DIIs ने करीब 6,003 करोड़ रुपये की खरीदारी करके बाजार को संभाल लिया। इसी सहारे सेंसेक्स और निफ्टी बढ़त के साथ बंद होने में कामयाब रहे। विदेशी निवेशकों की इतनी बड़ी बिकवाली के बाद भी भारतीय बाजार में बहुत बड़ी गिरावट नहीं आई है। इसकी सबसे बड़ी वजह घरेलू निवेशकों का बढ़ता दम है। म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां और रिटेल निवेशकों के जरिए आने वाला घरेलू पैसा अब बाजार का बड़ा सहारा बन चुका है। यही वजह है कि जब विदेशी निवेशक बिकवाली करते हैं, तब भी DIIs बाजार को गिरने से बचा लेते हैं। शुक्रवार को निफ्टी करीब 65 अंक चढ़कर 23,719 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स में करीब 232 अंकों की तेजी रही।
आखिर FIIs क्यों बेच रहे हैं शेयर?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय दुनिया भर में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। मिडिल ईस्ट तनाव, अमेरिका-ईरान रिश्तों में खींचतान और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके अलावा भारतीय रुपये में कमजोरी भी विदेशी निवेशकों को परेशान कर रही है। रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तरों तक फिसल चुका है। ऐसे में विदेशी निवेशकों को रिटर्न का फायदा कम होता दिखाई देता है। बॉन्ड यील्ड में तेजी और लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बने रहने की आशंका ने भी बाजार का मूड खराब किया है।
किस सेक्टर पर सबसे ज्यादा दबाव?
हाल के कारोबारी सत्रों में फार्मा और हेल्थकेयर शेयरों में दबाव देखने को मिला है। हालांकि, बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों ने बाजार को सहारा दिया। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले दिनों में भी बाजार काफी हद तक ग्लोबल खबरों के भरोसे चलेगा। खासकर अमेरिका-ईरान तनाव और तेल की कीमतों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।
2026 में कब कितना पैसा निकाला?
इस साल मार्च विदेशी निवेशकों की सबसे भारी बिकवाली वाला महीना रहा। युद्ध जैसे हालात और वैश्विक तनाव के बीच FIIs ने मार्च में 1.17 लाख करोड़ रुपये निकाल लिए। अप्रैल में भी उन्होंने करीब 60,847 करोड़ रुपये की बिकवाली की। हालांकि, फरवरी में थोड़ी राहत मिली थी, जब विदेशी निवेशक करीब 22,615 करोड़ रुपये की खरीदारी करते नजर आए थे। जनवरी में भी उन्होंने लगभग 35,962 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे।
2025 में भी कमजोर रहा ट्रेंड
पिछले साल यानी 2025 में भी विदेशी निवेशकों का रुख पूरी तरह मजबूत नहीं रहा। बीच-बीच में खरीदारी जरूर हुई, लेकिन कुल मिलाकर वे भारतीय बाजार से 1.66 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके थे। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंचे वैल्यूएशन, ग्लोबल अनिश्चितता और ट्रेड डील्स में देरी जैसी वजहों ने विदेशी निवेशकों का भरोसा कमजोर किया है।
आगे क्या रह सकता है बाजार का रुख?
बाजार के जानकारों का कहना है कि आने वाले समय में संस्थागत निवेश का रुख पूरी तरह ग्लोबल घटनाक्रम पर निर्भर करेगा। अगर तेल की कीमतें और बढ़ती हैं या भू-राजनीतिक तनाव और गहराता है, तो विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रह सकती है।


