EPF Vs Share Market: EPFO ने कहा शेयर मार्केट से बेहतर है EPF में निवेश, यू-ट्यूब वीडियो में बताई वजहें

EPF Vs Share Market: EPFO ने कहा शेयर मार्केट से बेहतर है EPF में निवेश, यू-ट्यूब वीडियो में बताई वजहें

EPF Benefits: रिटायरमेंट के लिए पैसा जमा करना है तो सिर्फ ज्यादा रिटर्न देखना काफी नहीं है। निवेश कितना सुरक्षित है, नियमित बचत होती है या नहीं और भविष्य में क्या फायदे मिलेंगे, इन बातों को भी देखना जरूरी है। इसी वजह से नौकरीपेशा लोगों के बीच अक्सर यह सवाल रहता है कि ईपीएफ में पैसा लगाना बेहतर है या शेयर बाजार में निवेश करना? दोनों विकल्पों का अपना महत्व है। शेयर बाजार में लंबे समय में ईपीएफ से ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना रहती है, लेकिन इसके साथ बाजार का जोखिम भी जुड़ा होता है। दूसरी तरफ ईपीएफ का मकसद नियमित बचत के जरिए रिटायरमेंट के लिए एक सुरक्षित फंड तैयार करना है।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO ने अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर EPF और इक्विटी यानी शेयर बाजार के बीच अंतर समझाते हुए बताया है कि रिटायरमेंट प्लानिंग में EPF क्यों अहम भूमिका निभाता है।

EPF में निवेश अनिवार्य, शेयर बाजार में निवेश आपकी मर्जी

EPF और शेयर बाजार में सबसे बड़ा अंतर निवेश के तरीके को लेकर है। ईपीएफ के मुताबिक, जिन संस्थानों पर ईपीएफ कानून लागू होता है और जिन कर्मचारियों की सैलरी तय वेतन सीमा के दायरे में आती है, उनके लिए ईपीएफ अकाउंट जरूरी होता है। ईफीएफ से पैसा भी केवल तय नियमों और निर्धारित परिस्थितियों में ही निकाला जा सकता है। इसके उलट शेयर बाजार में निवेश करना पूरी तरह आपकी मर्जी पर निर्भर करता है। निवेशक अपनी जरूरत के हिसाब से शेयर खरीद या बेच सकता है और उपलब्ध नियमों के अनुसार निवेश से पैसा निकाल सकता है।

EPF में कंपनी भी देती है पैसा

ईपीएफ की सबसे खास बात यह है कि इसमें सिर्फ कर्मचारी ही योगदान नहीं करता। कर्मचारी के साथ उसका नियोक्ता यानी कंपनी भी योगदान करती है। इस तरह कर्मचारी के खाते में उसकी अपनी बचत के साथ नियोक्ता का योगदान भी जुड़ता है। यह EPF को दूसरे निवेश विकल्पों से अलग बनाता है। वहीं, शेयर बाजार में निवेश करते समय पूरा पैसा निवेशक का ही होता है। यहां कोई नियोक्ता आपके निवेश के साथ अतिरिक्त रकम नहीं जोड़ता।

EPF में हर महीने बचत, शेयर बाजार में रहता है उतार-चढ़ाव

EPF में हर महीने नियमित योगदान होता है। इससे नौकरी के दौरान धीरे-धीरे रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड तैयार हो सकता है। यहा सरकार की ओर से घोषित ब्याज दर के आधार पर ब्याज मिलता है। इसके कारण इसमें शेयर बाजार जैसी रोजाना उथल-पुथल नहीं होती। दूसरी तरफ शेयर बाजार का रिटर्न बाजार की चाल पर निर्भर करता है। बाजार तेजी में हो तो अच्छा रिटर्न मिल सकता है, लेकिन गिरावट आने पर निवेश की वैल्यू भी कम हो सकती है। यानी ज्यादा रिटर्न की संभावना के साथ ज्यादा जोखिम भी है।

टैक्स के साथ पेंशन और बीमा का भी फायदा

EPFO के मुताबिक, ईपीएफ में योगदान, उस पर मिलने वाला ब्याज और नियमों के तहत निकासी पर टैक्स से जुड़े फायदे मिलते हैं। वहीं, शेयर बेचकर मुनाफा कमाने पर लागू नियमों के अनुसार कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ सकता है।

ईपीएफ से जुड़े सिस्टम में सिर्फ बचत ही नहीं, बल्कि पेंशन और बीमा से जुड़े फायदे भी हैं। पात्र कर्मचारियों को Employees’ Pension Scheme यानी EPS के तहत पेंशन का लाभ मिल सकता है। इसके अलावा Employees’ Deposit Linked Insurance यानी EDLI के तहत भी बीमा सुविधा उपलब्ध है, जो लागू नियमों और पात्रता पर निर्भर करती है। शेयर बाजार में ऐसा सामाजिक सुरक्षा कवर नहीं मिलता।

रिटायरमेंट के लिए EPF क्यों माना जाता है स्टेबल ऑप्शन?

EPF का संचालन और नियमन सरकार की व्यवस्था के तहत होता है। इसलिए इसे रिटायरमेंट के लिए अपेक्षाकृत स्थिर और भरोसेमंद विकल्प माना जाता है। शेयर बाजार भी नियामक व्यवस्था के तहत चलता है, लेकिन इसमें बाजार जोखिम खत्म नहीं होता। शेयर की कीमत कभी ऊपर जाती है तो कभी नीचे। लंबे समय में रिटर्न अच्छा हो सकता है, लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं होती। यही वजह है कि रिटायरमेंट जैसे लंबे टार्गेट के लिए ईपीएफ एक स्थिर आधार तैयार कर सकता है।

EPF या शेयर बाजार, किसे चुनें?

दोनों की भूमिका अलग है। ईपीएफ को सुरक्षित और नियमित रिटायरमेंट बचत का आधार माना जा सकता है, जबकि शेयर बाजार लंबी अवधि में ज्यादा रिटर्न की संभावना वाला लेकिन जोखिम भरा विकल्प है। इसलिए केवल यह देखकर फैसला करना सही नहीं होगा कि किसमें ज्यादा रिटर्न मिल सकता है। निवेशक को अपने लक्ष्य, उम्र, जोखिम लेने की क्षमता और रिटायरमेंट की जरूरत के हिसाब से फैसला करना चाहिए।

(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)

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