पुलिस की लापरवाही से गोकशी के आरोपी बाहर:कमजोर जांच और देरी बन रही जमानत का आधार, दोबारा अपराध में हो रहे गिरफ्तार

पुलिस की लापरवाही से गोकशी के आरोपी बाहर:कमजोर जांच और देरी बन रही जमानत का आधार, दोबारा अपराध में हो रहे गिरफ्तार

गोवंश संरक्षण को लेकर सख्त कानून बनाने वाले राज्यों में शामिल मध्यप्रदेश भी शामिल है। बावजूद इसके गोकशी के मामलों ने कानून व्यवस्था और पुलिस की लापरवाही ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजधानी भोपाल में सामने आए मामलों में कहीं 26 टन गोमांस से भरा ट्रक पकड़े जाने के बाद भी स्लॉटर हाउस 16 दिन तक खुला रहा, तो कहीं आरोपी जमानत पर छूटने के बाद दोबारा गोकशी करते पकड़े गए। दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि पुलिस की देरी, कमजोर केस डायरी और पुराने आपराधिक रिकॉर्ड शामिल नहीं करने जैसी खामियों का सीधा फायदा आरोपियों को मिला। इससे न सिर्फ इन आरोपियों को जमानत मिल गई बल्कि बाहर आने के बाद उन्होंने फिर अपराध किए। केस- 1 17 दिसंबर 2025: भोपाल में 26 टन गोमांस से भरा ट्रक पकड़ा 17 दिसंबर 2025 को मध्यप्रदेश पुलिस हैडक्वार्टर के सामने मांस का ट्रक पकड़ा गया। एफआईआर 22 दिन बाद यानी 8 जनवरी 2026 को की गई। भोपाल कोर्ट में 6 मार्च 2026 को करीब 500 पेज का चालान पेश किया गया, उसके तथ्य चौंकाने वाले हैं। इतना ही नहीं 23 दिसंबर को पुलिस के पास आधिकारिक लैब रिपोर्ट आ चुकी थी कि पकड़ा गया मांस ‘गोमांस’ ही है। पुलिस मुख्य आरोपी असलम चमड़ा को गिरफ्तार करने के बजाय उसे और आरोपी ड्राइवर शोएब को हाजिर होने के लिए फोन करती रही। गिरफ्तारी 8 जनवरी को की गई। नतीजा यह हुआ कि स्लॉटरिंग के लिए लाए गए मवेशियों का मूल रिकॉर्ड पुलिस अब तक बरामद नहीं कर सकी है। केस-2 16 मई 2025: भोपाल के करोंद में प्लॉट पर खुलेआम गोकशी 16 मई 2025 भोपाल के करोंद क्षेत्र स्थित पलासी गांव में सुबह करीब 5 बजे गोवंश काटे जाने का मामला सामने आया। सूचना मिलते ही बजरंग दल के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे, जिन्हें देखकर दो आरोपी मौके से फरार हो गए। पुलिस ने छह हिस्सों में कटी गाय के अवशेष बरामद किए। इस मामले में गोसेवक निशातपुरा निवासी श्याम यादव ने पुलिस को सूचना दी थी कि पलासी गांव में गोवंश का वध किया गया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों- रेहान, अरबाज,तौफीक और आलमीन रहमान को गिरफ्तार किया। कलीम, अयान, अदनान और साहिल लंबे समय तक फरार रहे। लिहाजा पुलिस ने धारा 173 (8) में फरारी चालान पेश किया इससे सभी आरोपियों की जमानत हो गई। जेल से छूटकर फिर की गोकशी आलमीन रहमान ने जेल से छूटने के बाद दोबारा गोकशी की वारदात को अंजाम दिया। फरियादी बद्रीप्रसाद भिलाला ने बताया कि वे अचारपुरा रोड गोदरमऊ के निवासी हैं और खेती करते हैं। 16 उन्होंने गायों को खेत के पास मैदान में बांधा था, जो सुबह गायब मिलीं। जैन फार्म हाउस में उनके गले की घंटियां मिलीं। पास ही बड़ी मात्रा में खून और अवशेष भी पाए गए। पुलिस ने आलमीन को गिरफ्तार किया और जेल भेज दिया। केस-3 अगस्त 2025: ऐशबाग में मामला, फरारी के बाद फिर वारदात अगस्त 2025 में भोपाल के ऐशबाग इलाके के कम्मू का बाग में गोवंश के काटे जाने का मामला सामने आया था। स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा गया था और पुलिस प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर जांच की थी। पुलिस ने पुलिस ने इमरान और इलाके के निगरानी बदमाश गुराज की गिरफ्तारी की। आरोपियों के अवैध अतिक्रमण भी जमीदोज किए गए थे। इमरान को घटना के बाद ही पकड़ लिया गया था। जबकि गुराज की गिरफ्तारी 24 अप्रैल 2026 दो सप्ताह पहले की गई। गुराज ने फरारी के दौरान चलाई गोलियां फरारी के दौरान ही आरोपी गुराज ने ईंटखेड़ी इलाके में बदमाश दानिश अली पर इसी साल जनवरी महीने में फायरिंग की। दो गोलियां दानिश को लगी थीं। हत्या के प्रयास का केस उसके खिलाफ दर्ज हुआ, इसके बाद भी वह चार महीने तक फरार रहा। बाद में ऐशबाग पुलिस ने उसे लोडेड पिस्टल के साथ गिरफ्तार किया। मामले में ऐशबाग थाना टीआई संदीप पवार ने बताया कि आरोपी गुराज की गिरफ्तारी हाल ही में की गई है। वह लंबे समय से फरार था। अब केस का चालान कोर्ट में पेश किया जाएगा। मानव अधिकार आयोग ने किया था सतर्क भोपाल में गोकशी के मामलों को लेकर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने पहले ही पुलिस को सतर्क किया था। इस मामले में आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने असलम चमड़ा को लेकर भोपाल पुलिस को छह माह पहले ही सूचना दे दी थी। खुद कानूनगो ने बताया था कि इसके बावजूद पुलिस ने इस पर कार्रवाई नहीं की। मामले में आयोग ने एक नोटिस भोपाल पुलिस को दिया था। इसके बावजूद पुलिस सतर्क नहीं हो सकी। उल्टा आयोग को बताया कि यहां असलम चमड़ा कसाईखाना नहीं चलाता बल्कि नगर निगम चलाता है। लीगल एक्सपर्ट बोले- पुलिस की ढील से मिली जमानत भोपाल बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष देवेंद्र रावत ने बताया कि गोवध के संजीदा केस में भोपाल पुलिस का उदासीन रवैया देखने को मिल रहा है। 26 टन गोमांस से भरे ट्रक को पुलिस ने जब्त करने की कार्रवाई नहीं की। 17 दिसंबर 2015 को हिंदू संगठन के लोगों ने गाय के मांस से ट्रक को पकड़कर पुलिस को सौंपा। शुरुआत से ही मामला संजीदा था, लेकिन पुलिस केवल पत्राचार करती रही। 23 दिसंबर को एफआईआर दर्ज की, लेकिन अहम साक्ष्यों की जब्ती जैसे सीसीटीवी फुटेज डीवीआर को तत्काल जब्त नहीं किया गया। स्लॉटर हाउस को समय रहते सील नहीं किया गया। इससे जाहिर है कि असलम और भोपाल पुलिस के बीच नजदीकी व्यावसायी संबंध हैं। हिंदू संगठनों ने सीबीआई जांच की मांग की हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने बताया कि शहर में लगातार गोकशी की वारदातें सामने आ रही हैं। पुलिस की लचर कार्रवाई के चलते आरोपी बेल हासिल कर लेते हैं। जिसका उदाहरण असलम चमड़े की रिहाई है। 26 टन से अधिक गोमांस उसकी निगरानी में नगर निगम के स्लोटर हाउस में लोड किया गया। मांस की सैंपलिंग में भी पुष्टि हुई की मांस गाय का ही था। भोपाल पुलिस ने साक्ष्यों को समय रहते जब्त नहीं किया, जिसका लाभ असलम को मिला। हमें एसआईटी की जांच पर भरोसा नहीं है। मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए, जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। ये खबर भी पढ़ें… गोवध का आरोपी असलम चमड़ा…जेल से मांस कारोबार पर कंट्रोल भोपाल में 250 गायों के अवैध मांस की बरामदगी के मामले में जेल में बंद असलम चमड़ा का नेटवर्क अब भी जिंदा है। सलाखों के पीछे होने के बावजूद वन विहार में मांस सप्लाई के कारोबार पर उसके परिवार का पूरा कंट्रोल है। इतनी बड़ी कार्रवाई के बाद भी परिवार के नाम से कंपनी बनाकर हर साल औसतन 2 करोड़ रुपए का मांस सिर्फ वन विहार को सप्लाई किया जा रहा है।पूरी खबर पढ़ें

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