DU चुनाव के बाद गोरखपुर में गरमाया छात्रसंघ का मुद्दा:सोशल मीडिया पर छात्र नेताओं में रील्स वार; एक दूसरे को दे रहे खुली चुनौती

DU चुनाव के बाद गोरखपुर में गरमाया छात्रसंघ का मुद्दा:सोशल मीडिया पर छात्र नेताओं में रील्स वार; एक दूसरे को दे रहे खुली चुनौती

दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव के बाद अब गोरखपुर विश्वविद्यालय में भी छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग तेज हो गई है। अलग-अलग छात्र संगठनों से जुड़े नेता सोशल मीडिया पर वीडियो और रील जारी कर एक-दूसरे को चुनौती दे रहे हैं। कोई छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग उठा रहा है तो कोई चुनाव होने पर अपनी जीत का दावा कर रहा है। सोशल मीडिया पर चल रही इस बयानबाजी का असर अब विश्वविद्यालय के माहौल पर भी दिखाई देने लगा है। छात्र नेता एक-दूसरे पर निशाना साधते हुए चुनाव कराने की मांग को लेकर आवाज बुलंद कर रहे हैं। सतीश प्रजापति बोले- चुनाव हुआ तो इतिहास बदल दूंगा छात्र नेता सतीश प्रजापति ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर गोरखपुर विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग की। खुद को छात्रों की आवाज और निर्दल प्रत्याशी बताने वाले सतीश ने कहा कि उत्तर प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है, जबकि दिल्ली में चुनाव हो रहे हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के विजेता और चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को बधाई भी दी। सतीश ने दावा किया कि दिल्ली के चुनाव में भाजपा से जुड़े नेताओं के चुनाव मैदान में उतरने के बावजूद निर्दल प्रत्याशी ने इतिहास रचा। सतीश ने गोरखपुर विश्वविद्यालय प्रशासन को चुनौती देते हुए कहा, “एक बार गोरखपुर विश्वविद्यालय में चुनाव कराओ, इतिहास बदल दूंगा। अगर 20 हजार वोट पड़े तो साढ़े 19 हजार वोट सतीश प्रजापति को मिलेगा। यहां भी हम जीत की खुशी मनाएंगे और विरोधी सदमे में चले जाएंगे।” ABVP ने वीडियो जारी कर दिया जवाब सतीश प्रजापति के वीडियो के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की गोरखपुर विश्वविद्यालय इकाई की ओर से भी वीडियो जारी किया गया। संगठन के सोशल मीडिया संयोजक समीर उपाध्याय ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव के बाद गोरखपुर में कुछ लोग खुद को छात्र नेता बताकर सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग यह दावा कर रहे हैं कि गोरखपुर विश्वविद्यालय में चुनाव इसलिए नहीं हो रहे, क्योंकि ABVP को चुनाव हारने का डर है। समीर ने कहा कि जिस दिन गोरखपुर विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव होगा, उस दिन परिणाम ABVP के पक्ष में आएगा। उन्होंने दिल्ली और पंजाब के विश्वविद्यालयों में संगठन की चुनावी जीत का हवाला देते हुए गोरखपुर में भी जीत का दावा किया। वीडियो के अंत में उन्होंने शायराना अंदाज में कहा, “आओ उतरें पानी में, हो जाएगी माप, किस मिट्टी के हम बने हैं, किस मिट्टी के आप।” उज्ज्वल सिंह बोले- रील बनाने का नहीं, छात्रों की लड़ाई लड़ने का समय छात्र नेता उज्ज्वल सिंह ने भी वीडियो जारी कर छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि अभी सोशल मीडिया पर फोटो और रील बनाने का समय नहीं है, बल्कि छात्रों की समस्याओं को लेकर आवाज उठाने की जरूरत है। उज्ज्वल ने कहा कि विश्वविद्यालय में छात्रों को आए दिन परेशान किए जाने के खिलाफ छात्र नेताओं को आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रसंघ चुनाव जल्द होना चाहिए। चुनाव होने के बाद ही पता चलेगा कि किसमें कितना दम है। NSUI ने पूछा- यूपी में छात्रसंघ चुनाव कब बहाल होंगे? NSUI के प्रदेश महासचिव आदित्य शुक्ला ने भी दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव को लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो जारी किया। उन्होंने यूपी में छात्रसंघ चुनाव बंद होने और दिल्ली विश्वविद्यालय में चुनाव होने का मुद्दा उठाया।
आदित्य ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि उत्तर प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव आखिर कब बहाल किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि युवा अपनी लड़ाई लड़ने के लिए पीछे नहीं हटेगा। उनके मुताबिक, इस आंदोलन की शुरुआत गोरखपुर से होगी। उन्होंने कहा, “छात्रसंघ हमारा अधिकार है, हम इसे लेकर रहेंगे।” सपा नेता उज्ज्वल यादव ने भी उठाया मुद्दा समाजवादी पार्टी से जुड़े युवा नेता उज्ज्वल यादव ने भी छात्रसंघ चुनाव को लेकर वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय में चुनाव कराने का समय मिल जाता है, लेकिन उत्तर प्रदेश में सरकार इस मुद्दे पर मौन है। उज्ज्वल यादव ने कहा कि यदि उनकी पार्टी की सरकार बनती है तो छात्रसंघ की बहाली प्राथमिकता में होगी। उनके मुताबिक, छात्रसंघ चुनाव से युवाओं को अपनी प्रतिभा और नेतृत्व क्षमता दिखाने का मौका मिलेगा। चुनाव को लेकर सोशल मीडिया पर बढ़ी हलचल दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव के बाद गोरखपुर विश्वविद्यालय में भी छात्रसंघ चुनाव का मुद्दा एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया है। अलग-अलग छात्र संगठनों और नेताओं के वीडियो सामने आने के बाद विश्वविद्यालय में चुनाव को लेकर बहस तेज हो गई है। एक तरफ छात्र नेता चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ संगठन अपने-अपने प्रभाव और संभावित चुनावी ताकत का दावा कर रहे हैं।

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