मधेपुर में डॉ. अंबेडकर जयंती समारोह का आयोजन:पूर्व मंत्री बोले- शिक्षा ही शोषितों और वंचितों की तकदीर बदल सकती है

मधेपुर में डॉ. अंबेडकर जयंती समारोह का आयोजन:पूर्व मंत्री बोले- शिक्षा ही शोषितों और वंचितों की तकदीर बदल सकती है

मधुबनी जिले के कलुआही प्रखंड स्थित मधेपुर गांव में डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती पर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम गुरुवार दोपहर को संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम बाबा साहब की प्रतिमा स्थापना के शिलान्यास के अवसर पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मधेपुर पंचायत के पूर्व मुखिया और जिला नागरिक परिषद सदस्य हरिशंकर पासवान ने की। अपने संबोधन में उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर को आधुनिक भारत के महान प्रेरणा स्रोतों में से एक बताया। पासवान ने उनके जीवन को संघर्ष, दृढ़ इच्छाशक्ति और बौद्धिक उत्कृष्टता का प्रतीक बताया। इस अवसर पर बिहार सरकार के पूर्व मंत्री डॉ. रामप्रीत पासवान, जिला परिषद अध्यक्ष बिंदु गुलाब यादव, कलुआही जिला परिषद सदस्य रेनू कुमारी, शिक्षक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार और बेनीपट्टी के पूर्व मुखिया अजीत पासवान जैसे गणमान्य व्यक्ति मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। सभी अतिथियों ने डॉ. अंबेडकर के तैलचित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्य वक्ताओं ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन पर विस्तृत व्याख्यान दिए। पूर्व मंत्री डॉ. रामप्रीत पासवान ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. अंबेडकर का दृढ़ विश्वास था कि शिक्षा ही शोषितों और वंचितों की तकदीर बदल सकती है। उन्होंने विषम परिस्थितियों में भी ज्ञान अर्जित किया और विश्व के सर्वाधिक शिक्षित व्यक्तियों में से एक बने। जिला परिषद अध्यक्ष बिंदु गुलाब यादव ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. अंबेडकर ने न केवल समानता के अधिकारों के लिए संघर्ष किया, बल्कि भारतीय संविधान के निर्माता के रूप में इन अधिकारों को कानूनी रूप भी प्रदान किया। उनका लक्ष्य एक ऐसे समाज का निर्माण करना था जहाँ जाति और लिंग के आधार पर कोई भेदभाव न हो। मधेपुर पंचायत के पूर्व मुखिया हरिशंकर पासवान ने बताया कि यह कार्यक्रम बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर जागृति मिशन, पासवान टोल, मधेपुर के तत्वावधान में आयोजित किया गया था। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में उनके जीवन-दर्शन को अपनाना ही उन्हें सही मायने में श्रद्धांजलि होगी। मधुबनी जिले के कलुआही प्रखंड स्थित मधेपुर गांव में डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती पर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम गुरुवार दोपहर को संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम बाबा साहब की प्रतिमा स्थापना के शिलान्यास के अवसर पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मधेपुर पंचायत के पूर्व मुखिया और जिला नागरिक परिषद सदस्य हरिशंकर पासवान ने की। अपने संबोधन में उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर को आधुनिक भारत के महान प्रेरणा स्रोतों में से एक बताया। पासवान ने उनके जीवन को संघर्ष, दृढ़ इच्छाशक्ति और बौद्धिक उत्कृष्टता का प्रतीक बताया। इस अवसर पर बिहार सरकार के पूर्व मंत्री डॉ. रामप्रीत पासवान, जिला परिषद अध्यक्ष बिंदु गुलाब यादव, कलुआही जिला परिषद सदस्य रेनू कुमारी, शिक्षक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार और बेनीपट्टी के पूर्व मुखिया अजीत पासवान जैसे गणमान्य व्यक्ति मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। सभी अतिथियों ने डॉ. अंबेडकर के तैलचित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्य वक्ताओं ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन पर विस्तृत व्याख्यान दिए। पूर्व मंत्री डॉ. रामप्रीत पासवान ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. अंबेडकर का दृढ़ विश्वास था कि शिक्षा ही शोषितों और वंचितों की तकदीर बदल सकती है। उन्होंने विषम परिस्थितियों में भी ज्ञान अर्जित किया और विश्व के सर्वाधिक शिक्षित व्यक्तियों में से एक बने। जिला परिषद अध्यक्ष बिंदु गुलाब यादव ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. अंबेडकर ने न केवल समानता के अधिकारों के लिए संघर्ष किया, बल्कि भारतीय संविधान के निर्माता के रूप में इन अधिकारों को कानूनी रूप भी प्रदान किया। उनका लक्ष्य एक ऐसे समाज का निर्माण करना था जहाँ जाति और लिंग के आधार पर कोई भेदभाव न हो। मधेपुर पंचायत के पूर्व मुखिया हरिशंकर पासवान ने बताया कि यह कार्यक्रम बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर जागृति मिशन, पासवान टोल, मधेपुर के तत्वावधान में आयोजित किया गया था। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में उनके जीवन-दर्शन को अपनाना ही उन्हें सही मायने में श्रद्धांजलि होगी।  

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