DMK MPs Meeting: डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन की अध्यक्षता में शनिवार को चेन्नई स्थित अन्ना अरिवालयम में हुई पार्टी के सांसदों की बैठक में चुनाव आयोग, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) प्रक्रिया और हालिया चुनावी घटनाक्रमों को लेकर केंद्र सरकार तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ तीखा रुख अपनाया गया। बैठक में चार महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने, एसआइआर प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द करने, छात्र एवं युवा संगठनों के आंदोलनों को समर्थन देने और चुनावी सुधारों की मांग को लेकर राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया गया। इस बैठक पर एनडीए और विपक्षी दलों की भी नजर थी कि पार्टी महिला आरक्षण विधेयक पर क्या निर्णय करेगी, लेकिन पार्टी के पारित प्रस्तावों में इस बारे में कोई उल्लेख नहीं था।
बैठक में पारित पहले प्रस्ताव में डीएमके ने आरोप लगाया कि बिहार से शुरू हुई एसआइआर प्रक्रिया के माध्यम से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। पार्टी ने दावा किया कि जब चुनाव आयोग ने तमिलनाडु समेत 12 राज्यों में इस प्रक्रिया को लागू करने की घोषणा की, तब सबसे पहले डीएमके ने इसका विरोध किया था।
डीएमके ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए कई फैसले लिए। पार्टी ने कहा कि बिहार और अन्य राज्यों में सामने आई शिकायतों के मद्देनजर उनके खिलाफ जांच कर उन्हें पद से हटाया जाना चाहिए।
दूसरे प्रस्ताव में डीएमके ने उन छात्र और युवा संगठनों के आंदोलनों को समर्थन देने की घोषणा की जो एसआइआर और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि दिल्ली और अन्य स्थानों पर आंदोलनकारी छात्रों के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई की गई। प्रस्ताव में कहा गया कि लोकतांत्रिक अधिकारों और मताधिकार की रक्षा के लिए चल रहे आंदोलनों को डीएमके का पूरा समर्थन रहेगा।
कांग्रेस व टीवीके के दोहरे मानक
तीसरे प्रस्ताव में पार्टी ने कांग्रेस और तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। डीएमके ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर एसआइआर का विरोध करने वाले कुछ दल तमिलनाडु में इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख नहीं अपना रहे हैं। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि चुनावी अनियमितताओं और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामलों पर विपक्षी दलों का रवैया विरोधाभासी रहा है।
चुनाव सुधार जरूरी
बैठक में पारित चौथे प्रस्ताव में चुनावी सुधारों की मांग उठाई गई। डीएमके ने कहा कि एसआइआर प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द कर उससे पहले की मतदाता सूची के आधार पर चुनाव कराए जाने चाहिए। पार्टी का तर्क है कि मतदाता सूची संशोधन का उद्देश्य लोगों के मतदान अधिकारों की रक्षा होना चाहिए, न कि उन्हें सीमित करना। इसके साथ ही डीएमके ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (इवीएम) की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए। प्रस्ताव में कहा गया कि विभिन्न स्थानों पर इवीएम और वीवीपैट पर्चियों के आंकड़ों में अंतर मिलने की रिपोर्टों से संदेह और बढ़ा है।
पार्टी ने मांग की कि चुनावों में पारंपरिक बैलेट पेपर प्रणाली को फिर से लागू किया जाए ताकि जनता का चुनावी प्रक्रिया पर विश्वास बहाल हो सके। बैठक ने निर्णय लिया कि इन सभी मांगों को लेकर डीएमके के सांसद राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपेंगे। पार्टी ने इसे लोकतंत्र, मताधिकार और चुनावी पारदर्शिता से जुड़ा मुद्दा बताते हुए देशव्यापी बहस की आवश्यकता पर जोर दिया।

