बेतिया शहर के हरिबाटिका शिव मंदिर में आयोजित राजनजी महाराज की श्रीराम कथा के दौरान कुव्यवस्था का आलम स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। कथा सुनने पहुंच रहे हजारों श्रद्धालुओं को रोजाना अव्यवस्थित माहौल और मूलभूत सुविधाओं के अभाव का सामना करना पड़ रहा है। आयोजक मंडल द्वारा महीनों से की जा रही तैयारियों के बावजूद समुचित समन्वय के अभाव में व्यवस्था चरमराई हुई नजर आ रही है। कथा पंडाल के आसपास साफ-सफाई की स्थिति अत्यंत खराब है। पंडाल के ठीक सामने की नालियां गंदगी से बजबजा रही हैं, जिनमें शराब के पाउच, प्लास्टिक, बोतलें और सड़ी-गली सब्जियां पड़ी हुई हैं। पंडाल में बैठे श्रोताओं को भी असुविधा झेलनी पड़ रही इनसे उठने वाली दुर्गंध से न केवल आने-जाने वाले लोग परेशान हैं, बल्कि पंडाल में बैठे श्रोताओं को भी असुविधा झेलनी पड़ रही है। इसके अलावा आसपास के क्षेत्रों में जलजमाव और सड़ांध की स्थिति बनी हुई है, जिससे संक्रमण फैलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। श्रोताओं के बैठने की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं दिख रही है, जिससे लोगों को कथा का आनंद लेने में कठिनाई हो रही है। हालांकि श्रीराम कथा अब समापन की ओर है और बुधवार को इसका अंतिम दिन निर्धारित है, लेकिन इस दौरान सामने आई व्यवस्थागत कमियों ने आयोजकों और प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पेयजल, शौचालय सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की इस संबंध में श्रीराम कथा के आयोजक सीता राम सेवा समिति के सह सचिव कुंदन शांडिल्य का कहना है कि आयोजक मंडल ने अपनी ओर से श्रोताओं के लिए पेयजल, शौचालय सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की है। उन्होंने बताया कि नालियों की सफाई, आसपास की स्वच्छता, बिजली व्यवस्था आदि की जिम्मेदारी संबंधित विभाग को सौंपी गई थी। इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हो सका, जिससे श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बेतिया शहर के हरिबाटिका शिव मंदिर में आयोजित राजनजी महाराज की श्रीराम कथा के दौरान कुव्यवस्था का आलम स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। कथा सुनने पहुंच रहे हजारों श्रद्धालुओं को रोजाना अव्यवस्थित माहौल और मूलभूत सुविधाओं के अभाव का सामना करना पड़ रहा है। आयोजक मंडल द्वारा महीनों से की जा रही तैयारियों के बावजूद समुचित समन्वय के अभाव में व्यवस्था चरमराई हुई नजर आ रही है। कथा पंडाल के आसपास साफ-सफाई की स्थिति अत्यंत खराब है। पंडाल के ठीक सामने की नालियां गंदगी से बजबजा रही हैं, जिनमें शराब के पाउच, प्लास्टिक, बोतलें और सड़ी-गली सब्जियां पड़ी हुई हैं। पंडाल में बैठे श्रोताओं को भी असुविधा झेलनी पड़ रही इनसे उठने वाली दुर्गंध से न केवल आने-जाने वाले लोग परेशान हैं, बल्कि पंडाल में बैठे श्रोताओं को भी असुविधा झेलनी पड़ रही है। इसके अलावा आसपास के क्षेत्रों में जलजमाव और सड़ांध की स्थिति बनी हुई है, जिससे संक्रमण फैलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। श्रोताओं के बैठने की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं दिख रही है, जिससे लोगों को कथा का आनंद लेने में कठिनाई हो रही है। हालांकि श्रीराम कथा अब समापन की ओर है और बुधवार को इसका अंतिम दिन निर्धारित है, लेकिन इस दौरान सामने आई व्यवस्थागत कमियों ने आयोजकों और प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पेयजल, शौचालय सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की इस संबंध में श्रीराम कथा के आयोजक सीता राम सेवा समिति के सह सचिव कुंदन शांडिल्य का कहना है कि आयोजक मंडल ने अपनी ओर से श्रोताओं के लिए पेयजल, शौचालय सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की है। उन्होंने बताया कि नालियों की सफाई, आसपास की स्वच्छता, बिजली व्यवस्था आदि की जिम्मेदारी संबंधित विभाग को सौंपी गई थी। इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हो सका, जिससे श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।


