बिहार राज्य आशा एवं आशा फैसिलिटेटर संघ के बैनर तले आशा कार्यकर्ताओं ने सदर अस्पताल परिसर में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। उन्होंने अपनी 23 सूत्री मांगों को लेकर यह प्रदर्शन किया और सिविल सर्जन को एक मांग पत्र सौंपा। इस अवसर पर आशा कार्यकर्ता संघ की जिलाध्यक्ष किरण झा ने बताया कि उन्हें पिछले आठ महीने से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। इसी मुख्य मांग के साथ-साथ अन्य 22 मांगों को लेकर आज यह धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया। उनकी प्रमुख मांगों में चार लेबर कोड को रद्द कर आशा एवं आशा फैसिलिटेटर को श्रम नियमों के अधीन लाना शामिल है। साथ ही, प्रत्येक माह के प्रथम सप्ताह में देय प्रोत्साहन राशि और पारितोषिक राशि का भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की गई। पोर्टल पर नाम अंकित कराने की भी मांग
आशा एवं आशा फैसिलिटेटर की शैक्षणिक योग्यता में दर्ज जन्मतिथि और आधार कार्ड में अंतर को सुधार कर पोर्टल पर नाम अंकित कराने की भी मांग की गई। उन्होंने बताया कि सुधार कराने के बजाय कई आशा कार्यकर्ताओं की सेवा समाप्त की जा रही है, जिस पर रोक लगाने की अपील की गई। संघ ने आवंटन के वितरण और भुगतान में भारी अनियमितता का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि एक ही जिले के विभिन्न प्रखंडों में प्रोत्साहन राशि के भुगतान में एकरूपता नहीं है, जिससे पूरे बिहार में अफरा-तफरी का माहौल है। आवंटन की मांग के अनुसार वितरण सुनिश्चित करने की मांग की गई ताकि समय पर भुगतान हो सके। केवल 21 दिन का यात्रा भत्ता मिलता है
आशा फैसिलिटेटर से पूरे माह काम लिया जाता है, जबकि उन्हें केवल 21 दिन का यात्रा भत्ता मिलता है। इसलिए, आशा फैसिलिटेटर को पूरे 30 दिन का यात्रा भत्ता भुगतान करने की मांग की गई। फतुहा की आशा कार्यकर्ताओं को देय 1000 रुपये की राज्य राशि का भुगतान भी सुनिश्चित करने की मांग की गई। ज्ञातव्य हो कि यह राशि बिहार के तमाम आशा को भुगतान कर दिया गया है। आशा कार्यकर्ताओं का 06 माह से बकाये प्रोत्साहन राशि और पारितोषिक राशि का एकमुश्त भुगतान अविलम्ब किया जाय। पे आई डी के नाम पर की जा रही घुसखोरी पर रोक लगायी जाय तथा वर्ष 2023 के बाद नवचयनित आशा की प्रोत्साहन राशि का भुगतान अविलम्ब करना सुनिश्चित किया जाय। इसके साथ अन्य कई मामले शामिल थे। बिहार राज्य आशा एवं आशा फैसिलिटेटर संघ के बैनर तले आशा कार्यकर्ताओं ने सदर अस्पताल परिसर में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। उन्होंने अपनी 23 सूत्री मांगों को लेकर यह प्रदर्शन किया और सिविल सर्जन को एक मांग पत्र सौंपा। इस अवसर पर आशा कार्यकर्ता संघ की जिलाध्यक्ष किरण झा ने बताया कि उन्हें पिछले आठ महीने से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। इसी मुख्य मांग के साथ-साथ अन्य 22 मांगों को लेकर आज यह धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया। उनकी प्रमुख मांगों में चार लेबर कोड को रद्द कर आशा एवं आशा फैसिलिटेटर को श्रम नियमों के अधीन लाना शामिल है। साथ ही, प्रत्येक माह के प्रथम सप्ताह में देय प्रोत्साहन राशि और पारितोषिक राशि का भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की गई। पोर्टल पर नाम अंकित कराने की भी मांग
आशा एवं आशा फैसिलिटेटर की शैक्षणिक योग्यता में दर्ज जन्मतिथि और आधार कार्ड में अंतर को सुधार कर पोर्टल पर नाम अंकित कराने की भी मांग की गई। उन्होंने बताया कि सुधार कराने के बजाय कई आशा कार्यकर्ताओं की सेवा समाप्त की जा रही है, जिस पर रोक लगाने की अपील की गई। संघ ने आवंटन के वितरण और भुगतान में भारी अनियमितता का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि एक ही जिले के विभिन्न प्रखंडों में प्रोत्साहन राशि के भुगतान में एकरूपता नहीं है, जिससे पूरे बिहार में अफरा-तफरी का माहौल है। आवंटन की मांग के अनुसार वितरण सुनिश्चित करने की मांग की गई ताकि समय पर भुगतान हो सके। केवल 21 दिन का यात्रा भत्ता मिलता है
आशा फैसिलिटेटर से पूरे माह काम लिया जाता है, जबकि उन्हें केवल 21 दिन का यात्रा भत्ता मिलता है। इसलिए, आशा फैसिलिटेटर को पूरे 30 दिन का यात्रा भत्ता भुगतान करने की मांग की गई। फतुहा की आशा कार्यकर्ताओं को देय 1000 रुपये की राज्य राशि का भुगतान भी सुनिश्चित करने की मांग की गई। ज्ञातव्य हो कि यह राशि बिहार के तमाम आशा को भुगतान कर दिया गया है। आशा कार्यकर्ताओं का 06 माह से बकाये प्रोत्साहन राशि और पारितोषिक राशि का एकमुश्त भुगतान अविलम्ब किया जाय। पे आई डी के नाम पर की जा रही घुसखोरी पर रोक लगायी जाय तथा वर्ष 2023 के बाद नवचयनित आशा की प्रोत्साहन राशि का भुगतान अविलम्ब करना सुनिश्चित किया जाय। इसके साथ अन्य कई मामले शामिल थे।


