कर्नाटक राज्य संयुक्त आशा कार्यकर्ता संघ Karnataka State United ASHA Workers’ Association के बैनर तले बेंगलूरु Bengaluru शहरी, ग्रामीण और ग्रेटर बेंगलूरु अथॉरिटी (जीबीए) क्षेत्रों की सैकड़ों आशा कार्यकर्ताओं ने लंबित मानदेय और प्रोत्साहन राशि के तत्काल भुगतान तथा प्रतिमाह 10,000 रुपए निश्चित वेतन लागू करने की मांग को लेकर बुधवार को शहर के फ्रीडम पार्क में प्रदर्शन किया।
नौ सेवाओं को निष्क्रिय किए जाने का भी विरोध
प्रदर्शनकारी आशा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि पिछले तीन से चार महीनों से लंबित है, जबकि राज्य सरकार का दो माह का मानदेय भी अभी तक जारी नहीं किया गया है। प्रदर्शनकारियों ने आशा निधि सॉफ्टवेयर में नौ सेवाओं को निष्क्रिय किए जाने का भी विरोध किया। उनका कहना है कि इससे प्रत्येक कार्यकर्ता को हर महीने 500 से 1,000 रुपए तक का नुकसान होगा।
मूल्यांकन के नाम पर कार्यकर्ताओं के शोषण का आरोप
संगठन की राज्य उपाध्यक्ष रमा टी. सी. ने कहा कि राज्य भर में आशा कार्यकर्ताओं को व्यापक स्वास्थ्य सेवाएं देने के बावजूद भुगतान में लगातार देरी का सामना करना पड़ रहा है।‘समस्त’ ऐप के अनिवार्य उपयोग की आलोचना करते हुए उन्होंने मूल्यांकन के नाम पर कार्यकर्ताओं के शोषण का आरोप लगाया। उनके अनुसार टीबी (क्षय रोग) और गैर-संचारी रोग कार्यक्रमों से जुड़े प्रोत्साहन कई वर्षों से लंबित हैं।
बुनियादी अधिकारों के लिए बार-बार आंदोलन करने को मजबूर होना पड़ रहा है
शहरी आशा नेता महालक्ष्मी ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में वर्षों तक सेवा देने के बावजूद आशा कार्यकर्ताओं को अपने बुनियादी अधिकारों के लिए बार-बार आंदोलन करने को मजबूर होना पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों ने आशा फैसिलिटेटरों की सेवाएं उचित वेतन के साथ जारी रखने, सेवानिवृत्ति लाभ प्रदान करने और राज्य बजट में घोषित 1,000 रुपए वेतन वृद्धि को लागू करने की भी मांग की। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की, तो राज्यभर में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।


