CM सम्राट के सेक्रेटरी को आया हार्ट अटैक:मुख्यमंत्री आवास के ऑफिस में फाइल निपटाने के दौरान गिरे; IGIMS के ICU में भर्ती

CM सम्राट के सेक्रेटरी को आया हार्ट अटैक:मुख्यमंत्री आवास के ऑफिस में फाइल निपटाने के दौरान गिरे; IGIMS के ICU में भर्ती

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सेक्रेटरी लोकेश कुमार सिंह की तबीयत अचानक बिगड़ गई है। उन्हें पटना के IGIMS अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा कि उनको हार्ट अटैक आया है। वे अस्पताल के सीसीएम (ICU) में एडमिट हैं। डॉक्टरों की एक टीम उनकी लगातार निगरानी कर रही है और उनका इलाज जारी है। लोकेश कुमार सिंह के डॉक्टर के मुताबिक उनका शुगर लेवल फिलहाल कम है। लेकिन उनकी स्थिति अभी ठीक है और वे खतरे से बाहर है। ऐतिहातन उन्हें आईसीयू में रखा गया है। लोकेश कुमार सिंह को हाल ही में सचिवालय का सचिव नियुक्त किया है। 2003 बैच के बिहार कैडर के IAS अधिकारी लोकेश कुमार सिंह के पास 23 वर्षों का प्रशासनिक अनुभव है। इनकी पहचान सीधे ग्राउंड पर उतर समस्याओं का समाधान करने और किसी भी फाइल में कौमा से पूर्ण विराम तक पढ़ने वाले अधिकारी की है। 23 साल का अनुभव, कई जिलों में रहे DM वित्त विभाग में काम से प्रभावित हुए थे सम्राट लोकेश सिंह अपनी वर्किंग स्टाइल के चलते पहले ही सरकार के चहेते अधिकारियों की लिस्ट में शामिल हो गए थे। स्वास्थ्य विभाग के सचिव के रूप में कोरोना काल के दौरान इन्होंने अपनी एक अलग छाप छोड़ी थी। बिहार के बिगड़ते हालात को संभाला था। लोकेश सम्राट चौधरी के साथ 2024 में भी काम कर चुके हैं। तब सम्राट वित्त विभाग के मंत्री और लोकेश सिंह वित्त विभाग के सचिव थे। जमीन से जुड़े अफसर की पहचान लोकेश कुमार सिंह की पहचान ऐसे अधिकारी की रही है जो फाइलों से ज्यादा फील्ड में काम करने को प्राथमिकता देते हैं। डीएम रहते हुए उन्होंने सीधे जनता के बीच जाकर समस्याओं के समाधान पर जोर दिया। यही वजह है कि उन्हें बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था और जमीनी चुनौतियों की गहरी समझ रखने वाला अधिकारी माना जाता है। सरकार के कई बड़े प्रोजेक्ट्स में उनकी कार्यशैली की चर्चा पहले भी होती रही है। कोरोना काल में निभाई थी बड़ी भूमिका स्वास्थ्य विभाग में सचिव रहते हुए कोरोना महामारी के दौरान उनकी भूमिका काफी अहम मानी गई थी। उस दौर में स्वास्थ्य व्यवस्था संभालने से लेकर संसाधनों के प्रबंधन तक उन्होंने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। इसके अलावा ग्रामीण विकास विभाग और बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) जैसे संवेदनशील विभागों में भी वे काम कर चुके हैं। प्रशासनिक स्तर पर संकट प्रबंधन में उनकी पकड़ को सरकार की बड़ी ताकत माना जाता है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सेक्रेटरी लोकेश कुमार सिंह की तबीयत अचानक बिगड़ गई है। उन्हें पटना के IGIMS अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा कि उनको हार्ट अटैक आया है। वे अस्पताल के सीसीएम (ICU) में एडमिट हैं। डॉक्टरों की एक टीम उनकी लगातार निगरानी कर रही है और उनका इलाज जारी है। लोकेश कुमार सिंह के डॉक्टर के मुताबिक उनका शुगर लेवल फिलहाल कम है। लेकिन उनकी स्थिति अभी ठीक है और वे खतरे से बाहर है। ऐतिहातन उन्हें आईसीयू में रखा गया है। लोकेश कुमार सिंह को हाल ही में सचिवालय का सचिव नियुक्त किया है। 2003 बैच के बिहार कैडर के IAS अधिकारी लोकेश कुमार सिंह के पास 23 वर्षों का प्रशासनिक अनुभव है। इनकी पहचान सीधे ग्राउंड पर उतर समस्याओं का समाधान करने और किसी भी फाइल में कौमा से पूर्ण विराम तक पढ़ने वाले अधिकारी की है। 23 साल का अनुभव, कई जिलों में रहे DM वित्त विभाग में काम से प्रभावित हुए थे सम्राट लोकेश सिंह अपनी वर्किंग स्टाइल के चलते पहले ही सरकार के चहेते अधिकारियों की लिस्ट में शामिल हो गए थे। स्वास्थ्य विभाग के सचिव के रूप में कोरोना काल के दौरान इन्होंने अपनी एक अलग छाप छोड़ी थी। बिहार के बिगड़ते हालात को संभाला था। लोकेश सम्राट चौधरी के साथ 2024 में भी काम कर चुके हैं। तब सम्राट वित्त विभाग के मंत्री और लोकेश सिंह वित्त विभाग के सचिव थे। जमीन से जुड़े अफसर की पहचान लोकेश कुमार सिंह की पहचान ऐसे अधिकारी की रही है जो फाइलों से ज्यादा फील्ड में काम करने को प्राथमिकता देते हैं। डीएम रहते हुए उन्होंने सीधे जनता के बीच जाकर समस्याओं के समाधान पर जोर दिया। यही वजह है कि उन्हें बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था और जमीनी चुनौतियों की गहरी समझ रखने वाला अधिकारी माना जाता है। सरकार के कई बड़े प्रोजेक्ट्स में उनकी कार्यशैली की चर्चा पहले भी होती रही है। कोरोना काल में निभाई थी बड़ी भूमिका स्वास्थ्य विभाग में सचिव रहते हुए कोरोना महामारी के दौरान उनकी भूमिका काफी अहम मानी गई थी। उस दौर में स्वास्थ्य व्यवस्था संभालने से लेकर संसाधनों के प्रबंधन तक उन्होंने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। इसके अलावा ग्रामीण विकास विभाग और बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) जैसे संवेदनशील विभागों में भी वे काम कर चुके हैं। प्रशासनिक स्तर पर संकट प्रबंधन में उनकी पकड़ को सरकार की बड़ी ताकत माना जाता है।  

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