नए डिग्री कॉलेजों में उर्दू विषय शामिल करने की मांग:रिसर्च स्कॉलर ने मधेपुरा में डिप्टी सीएम को सौंपा मांगपत्र, पढ़ाई शुरू करने की डिमांड

नए डिग्री कॉलेजों में उर्दू विषय शामिल करने की मांग:रिसर्च स्कॉलर ने मधेपुरा में डिप्टी सीएम को सौंपा मांगपत्र, पढ़ाई शुरू करने की डिमांड

मधेपुरा के बीएन मंडल विश्वविद्यालय में रविवार को पीएचडी रिसर्च स्कॉलर इम्तियाज अहमद रहमानी ने बिहार के उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव को एक मांग पत्र सौंपा। उन्होंने राज्य सरकार के सात निश्चय-3 के तहत प्रस्तावित 208 डिग्री कॉलेजों में उर्दू विषय को शामिल करने की मांग की है। रहमानी ने बताया कि सरकार ने 208 डिग्री महाविद्यालय रहित प्रखंडों में नए कॉलेज खोलने का निर्णय लिया है। इन कॉलेजों के लिए 17 विषयों में सहायक प्राध्यापकों के पद सृजित किए गए हैं, लेकिन बिहार की द्वितीय राजभाषा उर्दू को इसमें शामिल नहीं किया गया है। उच्च शिक्षा प्राप्त करने में छात्राओं को होगी कठिनाई उन्होंने तर्क दिया कि उर्दू विषय के सहायक प्राध्यापकों के पद सृजित न होने से उर्दू भाषी छात्रों, विशेषकर छात्राओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में कठिनाई होगी। रहमानी ने इस कदम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और बिहार की द्वितीय राजभाषा नीति के विपरीत बताया, जिससे उर्दू भाषा के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। मांग पत्र में उन्होंने सरकार से पूर्व में जारी शिक्षा विभाग के पत्र के अनुरूप सभी प्रस्तावित डिग्री कॉलेजों में उर्दू विषय के दो-दो सहायक प्राध्यापकों के पद सृजित करने की अपील की है। उपमुख्यमंत्री ने मांगों को गंभीरता से नहीं लिया इम्तियाज अहमद रहमानी ने आरोप लगाया कि उपमुख्यमंत्री ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया और उनका मांग पत्र उनके निजी सहायक (पीए) द्वारा प्राप्त किया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उर्दू विषय को शामिल नहीं किया गया तो आगे आंदोलन किया जाएगा। मधेपुरा के बीएन मंडल विश्वविद्यालय में रविवार को पीएचडी रिसर्च स्कॉलर इम्तियाज अहमद रहमानी ने बिहार के उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव को एक मांग पत्र सौंपा। उन्होंने राज्य सरकार के सात निश्चय-3 के तहत प्रस्तावित 208 डिग्री कॉलेजों में उर्दू विषय को शामिल करने की मांग की है। रहमानी ने बताया कि सरकार ने 208 डिग्री महाविद्यालय रहित प्रखंडों में नए कॉलेज खोलने का निर्णय लिया है। इन कॉलेजों के लिए 17 विषयों में सहायक प्राध्यापकों के पद सृजित किए गए हैं, लेकिन बिहार की द्वितीय राजभाषा उर्दू को इसमें शामिल नहीं किया गया है। उच्च शिक्षा प्राप्त करने में छात्राओं को होगी कठिनाई उन्होंने तर्क दिया कि उर्दू विषय के सहायक प्राध्यापकों के पद सृजित न होने से उर्दू भाषी छात्रों, विशेषकर छात्राओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में कठिनाई होगी। रहमानी ने इस कदम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और बिहार की द्वितीय राजभाषा नीति के विपरीत बताया, जिससे उर्दू भाषा के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। मांग पत्र में उन्होंने सरकार से पूर्व में जारी शिक्षा विभाग के पत्र के अनुरूप सभी प्रस्तावित डिग्री कॉलेजों में उर्दू विषय के दो-दो सहायक प्राध्यापकों के पद सृजित करने की अपील की है। उपमुख्यमंत्री ने मांगों को गंभीरता से नहीं लिया इम्तियाज अहमद रहमानी ने आरोप लगाया कि उपमुख्यमंत्री ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया और उनका मांग पत्र उनके निजी सहायक (पीए) द्वारा प्राप्त किया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उर्दू विषय को शामिल नहीं किया गया तो आगे आंदोलन किया जाएगा।  

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