Davis Cup से पहले बोले Dakshineswar Suresh, पेशेवर Tennis में शीर्ष पर पहुंचने के लिए निरंतरता जरूरी

Davis Cup से पहले बोले Dakshineswar Suresh, पेशेवर Tennis में शीर्ष पर पहुंचने के लिए निरंतरता जरूरी

 वेक फॉरेस्ट यूनिवर्सिटी में दक्षिणेश्वर सुरेश के आसपास हमेशा कोई न कोई मौजूद रहता था। साथ में अभ्यास करने वाले साथी, साथ में सफर करने वाले दोस्त और ऐसा सहयोगी तंत्र जो उन्हें आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहा है। लेकिन पेशेवर टेनिस की दुनिया इससे बिल्कुल अलग है। यहां हाल ही में स्नातक की डिग्री लेने वाले इस भारतीय टेनिस खिलाड़ी को अकेले यात्रा करनी पड़ती है, अपनी फिटनेस का ध्यान रखना होता है, अपने कार्यक्रम को तैयार करना होता है, सही कोच ढूंढना पड़ता है और मानसिक रूप से मजबूत रहना पड़ता है। इस बदलाव ने उन्हें पेशेवर बनने के लिए आवश्यक जरूरतों नई समझ दी है। दक्षिणेश्वर ने दक्षिण कोरिया के खिलाफ भारत के डेविस कप मुकाबले से पहले पीटीआई से कहा, ‘‘मैं जानता हूं कि मैं उस स्तर का खिलाड़ी हूं। मुझे बस यह देखना है कि मैं हर दिन और हर हफ्ते कितनी निरंतरता बनाए रख सकता हूं। क्योंकि टेनिस सत्र काफी लंबा होता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगर मैं साल भर इस स्तर को बनाए रख सकता हूं, तो मुझे पता है कि मैं शीर्ष पर पहुंच सकता हूं। मुझे बस मेहनत करनी होगी और निरंतरता बनाए रखनी होगी।’’ नीदरलैंड के खिलाफ फरवरी में डेविस कप मुकाबले में शानदार प्रदर्शन से दक्षिणेश्वर का अपनी क्षमताओं पर विश्वास और मजबूत हुआ। नीदरलैंड के खिलाफ उन्होंने तीन मैच जीते और भारत की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लेकिन इस 26 वर्षीय खिलाड़ी ने जानबूझकर उस प्रदर्शन को भुला दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘वह अब अतीत की बात है। अब एक बेहतर इंसान बनने पर ध्यान देना है और फिर देखना है कि आगे क्या होता है।’’ दक्षिणेश्वर पेशेवर टेनिस में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘आपको बस निरंतरता बनाए रखनी होगी। जब आप अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हों तो और कड़ी मेहनत करनी होगी। शीर्ष पर पहुंचने के लिए यह बेहद जरूरी है और मैं इसके लिए तैयार हूं।’’ दक्षिणेश्वर हालांकि पेशेवर टेनिस में मिली आजादी का भी पूरा आनंद ले रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे वास्तव में यह बहुत पसंद है कि आपको बहुत यात्रा करने और अलग-अलग कोर्ट पर खेलने, अलग-अलग परिस्थितियों में खेलने, अलग-अलग दर्शकों के सामने खेलने और नए तरह के भोजन करने का मौका मिलता है।’’ दक्षिणेश्वर ने कहा, ‘‘अब मैं हर सप्ताह टूर्नामेंट खेलता हूं और मुझे लगातार खेलने के लिए शारीरिक रूप से फिट रहना होगा। मैंने सीखा है कि मुझे अपनी फिटनेस पर काम करना होगा और अपने साथ यात्रा के लिए किसी ऐसे व्यक्ति को रखना होगा जो मुझे मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखे। 

 वेक फॉरेस्ट यूनिवर्सिटी में दक्षिणेश्वर सुरेश के आसपास हमेशा कोई न कोई मौजूद रहता था। साथ में अभ्यास करने वाले साथी, साथ में सफर करने वाले दोस्त और ऐसा सहयोगी तंत्र जो उन्हें आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहा है। लेकिन पेशेवर टेनिस की दुनिया इससे बिल्कुल अलग है। यहां हाल ही में स्नातक की डिग्री लेने वाले इस भारतीय टेनिस खिलाड़ी को अकेले यात्रा करनी पड़ती है, अपनी फिटनेस का ध्यान रखना होता है, अपने कार्यक्रम को तैयार करना होता है, सही कोच ढूंढना पड़ता है और मानसिक रूप से मजबूत रहना पड़ता है। इस बदलाव ने उन्हें पेशेवर बनने के लिए आवश्यक जरूरतों नई समझ दी है। 

दक्षिणेश्वर ने दक्षिण कोरिया के खिलाफ भारत के डेविस कप मुकाबले से पहले पीटीआई से कहा, ‘‘मैं जानता हूं कि मैं उस स्तर का खिलाड़ी हूं। मुझे बस यह देखना है कि मैं हर दिन और हर हफ्ते कितनी निरंतरता बनाए रख सकता हूं। क्योंकि टेनिस सत्र काफी लंबा होता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगर मैं साल भर इस स्तर को बनाए रख सकता हूं, तो मुझे पता है कि मैं शीर्ष पर पहुंच सकता हूं। मुझे बस मेहनत करनी होगी और निरंतरता बनाए रखनी होगी।’’ 

नीदरलैंड के खिलाफ फरवरी में डेविस कप मुकाबले में शानदार प्रदर्शन से दक्षिणेश्वर का अपनी क्षमताओं पर विश्वास और मजबूत हुआ। नीदरलैंड के खिलाफ उन्होंने तीन मैच जीते और भारत की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लेकिन इस 26 वर्षीय खिलाड़ी ने जानबूझकर उस प्रदर्शन को भुला दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘वह अब अतीत की बात है। अब एक बेहतर इंसान बनने पर ध्यान देना है और फिर देखना है कि आगे क्या होता है।’’ दक्षिणेश्वर पेशेवर टेनिस में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने पर ध्यान दे रहे हैं।

 उन्होंने कहा, ‘‘आपको बस निरंतरता बनाए रखनी होगी। जब आप अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हों तो और कड़ी मेहनत करनी होगी। शीर्ष पर पहुंचने के लिए यह बेहद जरूरी है और मैं इसके लिए तैयार हूं।’’ दक्षिणेश्वर हालांकि पेशेवर टेनिस में मिली आजादी का भी पूरा आनंद ले रहे हैं। 

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे वास्तव में यह बहुत पसंद है कि आपको बहुत यात्रा करने और अलग-अलग कोर्ट पर खेलने, अलग-अलग परिस्थितियों में खेलने, अलग-अलग दर्शकों के सामने खेलने और नए तरह के भोजन करने का मौका मिलता है।’’ दक्षिणेश्वर ने कहा, ‘‘अब मैं हर सप्ताह टूर्नामेंट खेलता हूं और मुझे लगातार खेलने के लिए शारीरिक रूप से फिट रहना होगा। मैंने सीखा है कि मुझे अपनी फिटनेस पर काम करना होगा और अपने साथ यात्रा के लिए किसी ऐसे व्यक्ति को रखना होगा जो मुझे मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखे।

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