कावेरी नदी में प्रदूषण से गहराया संकटः किसानों-मछुआरों की आजीविका प्रभावित, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दी चेतावनी

कावेरी नदी में प्रदूषण से गहराया संकटः किसानों-मछुआरों की आजीविका प्रभावित, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दी चेतावनी

Cauvery River pollution: नामक्कल. कुमारपालयम और पल्लीपालयम स्थित वस्त्र उद्योगों की डाइंग यूनिट्स खुलेआम नियमों का उल्लंघन करते हुए लाखों लीटर अपशिष्ट जल सीधे कावेरी नदी में छोड़ रही हैं। इसके कारण नदी का पानी लाल, नीला और हरा रंग धारण कर चुका है। किसानों और मछुआरों का कहना है कि दशकों से जारी इस प्रदूषण ने उनकी आजीविका को बुरी तरह प्रभावित किया है। किसान एस. मुरुगन ने कहा कि कोई भी पार्टी सत्ता में आए, पल्लीपालयम के लोगों की तकदीर नहीं बदलती।

स्थानीय लोगों में बढ़ रही त्वचा रोग, सांस की तकलीफ

डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इन अपशिष्टों में सीसा, कैडमियम और क्रोमियम जैसी भारी धातुएं और कैंसरकारी रसायन मौजूद हैं। लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से किडनी रोग, कैंसर और तंत्रिका संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। ईरोड के चिकित्सक डॉ पी राजेश ने बताया कि स्थानीय लोगों में त्वचा रोग, सांस की तकलीफ और पेट संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। किसानों का कहना है कि दूषित पानी से सिंचाई करने पर मिट्टी की उर्वरता घट गई है और फसलें हानिकारक तत्वों को सोखकर खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर रही हैं। कुमारपालयम के किसान के सेल्वराज ने बताया हमारी पैदावार घट रही है और जमीन बंजर होती जा रही है। मछुआरों ने भी बताया कि नदी में ऑक्सीजन की कमी और जहरीले तत्वों के कारण जलीय जीवन संकट में है। एम. दिनेश, एक मछुआरे ने कहा कि नदी कभी जीवन देती थी, अब कुछ नहीं देती।

अधिकारियों की जांच केवल दिखावा

स्थानीय लोग कहते हैं कि अधिकारियों की जांच केवल दिखावा है। निरीक्षण के कुछ घंटों बाद ही यूनिट्स फिर से अपशिष्ट छोड़ देती हैं। पल्लीपालयम के दुकानदार एस बालाजी ने इसे “धोखे का चक्र” बताया। ईरोड की पर्यावरण कार्यकर्ता आर. अनिता ने कहा कावेरी सिर्फ़ नदी नहीं, हमारी धरोहर है। इसे जहरीली नाली में बदलते देखना दिल तोड़ने वाला है। उन्होंने दोहराए जाने वाले उल्लंघनकर्ताओं की यूनिट्स को तुरंत बंद करने की मांग की।

कावेरी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी इस प्रदूषण से प्रभावित हुआ है। पल्लीपालयम के बुज़ुर्ग के. गोपाल ने कहा हम कभी कावेरी में स्नान करते थे, अब छूने से भी डरते हैं। यह संकट केवल ग्रामीणों तक ही सीमित नहीं बल्कि शहरी निवासियों तक फैल रहा है, जो पीने के पानी के लिए कावेरी पर निर्भर हैं। यह घटना हमें याद दिलाती है कि पर्यावरण संरक्षण और नदी प्रदूषण नियंत्रण अब अत्यावश्यक हो चुका है।

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