हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के काफिले को रोकने की कोशिश को सुरक्षा में चूक मानते हुए दो पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि शुक्रवार को गुरुग्राम में मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाए और उनके काफिले को रोकने की कोशिश की।
पुलिस ने बताया कि इसके बाद नौ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को शनिवार को गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन बाद में उन्हें जमानत पर छोड़ दिया गया। पुलिस प्रवक्ता संदीप कुमार ने कहा कि अति महत्वपूर्ण व्यक्ति (वीआईपी) की सुरक्षा में चूक के लिए जवाबदेही तय की गई है और डीसीपी (पश्चिम) और डीसीपी (अपराध) को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि सिविल लाइंस स्थित पुलिस थाने के प्रभारी और संबंधित जोन के सुरक्षा प्रभारी सहित 18 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में सिविल लाइंस पुलिस थाने के प्रभारी निरीक्षक बिजेंद्र कुमार, पश्चिम जिला के सुरक्षा प्रभारी एएसआई अमित और अलग-अलग पद पर कार्यरत 16 अन्य पुलिसकर्मी शामिल हैं। इसके अलावा, पुलिस आयुक्त ने एक इंटेलिजेंस ऑफिसर सहित छह पुलिसकर्मियों के कामकाज की विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। शनिवार को पुलिस आयुक्त ने दो पुलिस थानों के प्रभारियों के तबादले के आदेश जारी किए।
सेक्टर 50 पुलिस थाना के प्रभारी निरीक्षक सुखबीर को सिविल लाइंस पुलिस थाना का प्रभारी नियुक्त किया गया, जबकि निरीक्षक इंदु बाला को सेक्टर 50 पुलिस थाने का प्रभारी नियुक्त किया गया है। आयुक्त ने जोर देकर कहा कि वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी स्तर पर लापरवाही, तालमेल की कमी या ड्यूटी में ढिलाई को गंभीरता से लिया जाएगा। पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि प्रदर्शनकारी अचानक मुख्यमंत्री के काफिले के सामने पहुंच गए और उसे रोकने की कोशिश की।
उन्होंने कहा कि जब पुलिस ने उन्हें समझाने की कोशिश की, तो उन्होंने अधिकारियों के साथ हाथापाई की, सरकारी काम में बाधा डाली और मौके पर कानून-व्यवस्था व वीआईपी सुरक्षा में खलल डाला। उन्होंने कहा कि पुलिस ने तुरंत दखल दिया और उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन उनके व्यवहार से सुरक्षा में गंभीर व्यवधान पैदा हुआ। इसके बाद, सिविल लाइंस पुलिस थाने ने तुरंत कार्रवाई करते हुए नौ लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जब पुलिस ने पुलिस उपायुक्त के सामने पेश किया, तो सिविल लाइंस पुलिस थाने में हंगामा हो गया। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस ने थाने पर भारी बल तैनात किया। पुलिस के अनुसार, एएसआई चंद्रम की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई।
अपनी शिकायत में चंद्रम ने बताया कि जब काले झंडे दिखाए जा रहे थे, तब आरोपियों ने उनके और त्वरित प्रतिक्रिया दल के अन्य सदस्यों के साथ हाथापाई की, और एएसआई की वर्दी तक फाड़ दी। पुलिस ने बताया कि घायल हुए चंद्रम और हेड कांस्टेबल कर्मबीर, दोनों का सेक्टर 10 के सरकारी अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया गया। अधिकारियों ने बताया कि कांग्रेस के गिरफ्तार कार्यकर्ताओं पर वीआईपी सुरक्षा इंतजाम में बाधा डालने और सरकारी काम में रुकावट पैदा करने का आरोप है।
उन्होंने बताया कि पुलिस ने सिविल लाइंस थाने में कांग्रेस कार्यकर्ताओं समेत 12 नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस ने कहा कि सभी आरोपियों को जमानत पर रिहा कर दिया गया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उन्होंने शुक्रवार को गुरुग्राम विश्वविद्यालय के प्रथम वर्ष के छात्रों के नतीजे जारी करने में देरी के विरोध में प्रदर्शन किया था।
गुरुग्राम पुलिस के प्रवक्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री के तय कार्यक्रम के दौरान, एक राजनीतिक पार्टी के कुछ सदस्यों ने सुरक्षा इंतजामों और पुलिस के निर्देशों की अनदेखी करके मर्यादा का उल्लंघन किया। यह विरोध तब हुआ जब सैनी ज़िला जनसंपर्क और शिकायत निवारण समिति की बैठक में शामिल होने के बाद शुक्रवार को गुरुग्राम विश्वविद्यालय में ‘चौपाल’ कार्यक्रम और ‘जेनएच स्टार्टअप समिट 2026’ के लिए जा रहे थे। वहीं, कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने शनिवार को गुरुग्राम में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए भाजपा सरकार व गुरुग्राम प्रशासन पर निशाना साधा और कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है।
हुड्डा ने गुरुग्राम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के काफिले को काले झंडे दिखाने के आरोप में कांग्रेस के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में मामले दर्ज करने और उन्हें गिरफ्तार किए जाने पर भी सवाल उठाया। हुड्डा ने गैर-जमानती धाराओं के तहत गिरफ्तारी को “लोकतंत्र के इतिहास में काला दिन” करार दिया। हुड्डा ने कहा, “सरकार अपनी नाकामियों और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ उठने वाली आवाजों को पुलिस और प्रशासन का इस्तेमाल कर दबाने का प्रयास कर रही है।
लोकतंत्र में सरकार की जिम्मेदारी जनता और विपक्ष की बात सुनना है, असहमति जताने वालों को जेल में डालना नहीं।”
सांसद ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस किसी भी परिस्थिति में सरकार की इस “बर्बर कार्रवाई” को बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा, “पार्टी हर लोकतांत्रिक मंच पर अपनी आवाज उठाएगी।

