China Warns US Over Iran Arms Allegations: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब चीन भी इस विवाद में खुलकर सामने आ गया है। ईरान को हथियार सप्लाई करने के अमेरिकी आरोपों पर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए साफ कहा है कि यदि उस पर अतिरिक्त टैरिफ या आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए, तो वह इसका करारा जवाब देगा।
बीजिंग में गुओ जियाकुन ने अमेरिकी दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए उन्हें मनगढ़ंत बताया है। उन्होंने कहा कि चीन पर दबाव बनाने के लिए ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं और अगर अमेरिका इन्हें आधार बनाकर टैरिफ बढ़ाता है, तो चीन चुप नहीं बैठेगा।
अमेरिका के आरोपों पर भड़का चीन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि यदि चीन ईरान को हथियार सप्लाई करते हुए पाया जाता है तो उस पर 50 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए चीन ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी तरह के दबाव में आने वाला नहीं है और जरूरत पड़ने पर जवाबी कदम उठाएगा।
रिपोर्टें पूरी तरह झूठी हैं…
गुओ जियाकुन ने कहा कि चीन हमेशा हथियारों के निर्यात के मामले में जिम्मेदार रवैया अपनाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि चीन अपने घरेलू कानूनों और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के तहत सख्त नियंत्रण रखता है। उनके मुताबिक, ईरान को हथियार सप्लाई करने से जुड़ी रिपोर्टें पूरी तरह निराधार हैं और इनका कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है।
तकनीकी मदद को लेकर भी उठे सवाल
हालांकि, कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि चीन तकनीकी स्तर पर ईरान की मदद कर रहा है। इन रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन सैटेलाइट सिस्टम के जरिए ईरान को अमेरिकी सैन्य गतिविधियों से जुड़ी जानकारी उपलब्ध करा सकता है।
बताया जा रहा है कि अमेरिका द्वारा GPS सेवाएं सीमित किए जाने के बाद ईरान चीन के बेईडू नेविगेशन सिस्टम का उपयोग कर रहा है। इसके अलावा, दोहरे इस्तेमाल वाले उपकरणों और तकनीक की आपूर्ति को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
बढ़ रहा अमेरिका और चीन के बीच टकराव
ईरान को लेकर अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती बयानबाजी इस बात का संकेत है कि दोनों महाशक्तियों के बीच टकराव और गहरा सकता है। एक तरफ अमेरिका ईरान पर दबाव बनाए हुए है तो दूसरी ओर चीन खुद को एक स्वतंत्र और प्रभावशाली वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।
फिलहाल चीन ने साफ संकेत दे दिए हैं कि वह अमेरिकी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। ऐसे में अगर अमेरिका टैरिफ या प्रतिबंध लगाने का फैसला करता है तो दोनों देशों के बीच आर्थिक और कूटनीतिक तनाव और बढ़ सकता है।


