लखनऊ में महिलाओं और युतियों की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को सशक्त बनाने के लिए सरकार का अभियान गति पकड़ रहा है। ‘मिशन शक्ति 5.0’ के तहत अब दूसरे चरण में जागरूकता कार्यक्रमों का विस्तार किया गया है। इसी क्रम में शनिवार को अक्षय तृतीया के अवसर पर विकास भवन स्थित लोहिया सभागार में ‘बाल विवाह मुक्त भारत अभियान’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विभिन्न विभागों की महिला शिक्षिकाओं और अधिकारियों ने भाग लिया, जिन्होंने समाज में सकारात्मक बदलाव का संदेश दिया। बाल विवाह के दुष्परिणामों पर विस्तृत जानकारी दी कार्यक्रम में सहायक पुलिस आयुक्त (महिला अपराध) सौम्या पाण्डेय ने बाल विवाह के दुष्परिणामों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कम उम्र में विवाह न केवल युतियों के स्वास्थ्य और शिक्षा को प्रभावित करता है, बल्कि उनके भविष्य की संभावनाओं को भी सीमित कर देता है। उन्होंने सभी से इस कुप्रथा को समाप्त करने के लिए मिलकर प्रयास करने की अपील की। स्कूल स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम का प्रस्ताव रखा इस दौरान स्कूलों में संचालित ‘मीना मंच’ की गतिविधियों पर भी चर्चा की गई। शिक्षिकाओं से इसके प्रभाव और संचालन के संबंध में जानकारी ली गई। पुलिस विभाग ने स्कूल स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाने का प्रस्ताव रखा, ताकि छात्र-छात्राओं में प्रारंभिक अवस्था से ही सही सोच विकसित हो सके। कार्यक्रम में बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभागों की शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं। महिला कल्याण विभाग की ‘हब फॉर इम्पावरमेंट ऑफ वूमेन’ टीम ने सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी प्रदान करते हुए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।अंत में, सभी प्रतिभागियों को बाल विवाह मुक्त भारत बनाने की शपथ दिलाई गई।


