CGPSC Recruitment Scam: भूपेश बघेल के PA के ठिकानों पर ED की Raid, Money Laundering की जांच तेज

CGPSC Recruitment Scam: भूपेश बघेल के PA के ठिकानों पर ED की Raid, Money Laundering की जांच तेज
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ में कई जगहों पर छापेमारी की। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पर्सनल असिस्टेंट के के चंद्राकर का ठिकाना भी शामिल था। यह छापेमारी छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के सिलसिले में की गई। 2020 और 2021 की CGPSC परीक्षाओं में ऊँचे ओहदे वाले अधिकारियों और जाने-माने नेताओं के रिश्तेदारों को नौकरी दिलाने के लिए कथित तौर पर हेर-फेर की गई थी।

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ED की मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच, इस मामले में 2024 में दर्ज सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) के एक केस से जुड़ी है। FIR में कॉन्ग्रेस नेताओं से जुड़े कई उम्मीदवारों के नाम तो थे, लेकिन नेताओं के नाम नहीं थे। इसमें कहा गया था कि CGPSC की मेरिट लिस्ट में सीरियल नंबर 1 से 171 तक आने वाले लोग कथित तौर पर सरकारी अधिकारियों, नेताओं और प्रभावशाली लोगों से जुड़े थे।

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राज्य सरकार ने 16 फरवरी, 2024 को इस मामले की जांच CBI को सौंपी थी; यह कदम दिसंबर 2023 के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा कांग्रेस को सत्ता से बेदखल किए जाने के लगभग दो महीने बाद उठाया गया था।
CBI ने इस मामले में CGPSC के पूर्व चेयरमैन तमन सिंह सोनवानी, CGPSC के पूर्व सेक्रेटरी जीवन किशोर ध्रुव, छत्तीसगढ़ सरकार के अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और “संबंधित राजनेताओं” व अन्य लोगों को आरोपी बनाया था। हाल ही में, 25 जुलाई को ED ने सोनवानी को प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत गिरफ़्तार किया। ED की जांच से पता चला कि CGPSC के चेयरमैन के तौर पर काम करते हुए, तमन सिंह सोनवानी ने दूसरे सरकारी कर्मचारियों और प्राइवेट लोगों के साथ मिलकर एक आपराधिक साज़िश रची। इस साज़िश का मकसद गैर-कानूनी तरीके से पैसे लेकर या फायदा उठाकर प्रश्न-पत्र लीक करना और सिलेक्शन प्रोसेस में हेर-फेर करना था, ताकि उनके अपने रिश्तेदारों और पसंदीदा उम्मीदवारों को डिप्टी कलेक्टर और डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस जैसे सीनियर सरकारी पदों पर गलत तरीके से चुना जा सके। ED ने 27 जुलाई को एक बयान में कहा, “जांच में यह भी पता चला कि 2021 में CGPSC के भर्ती नियमों में बदलाव करके ‘परिवार’ की परिभाषा से ‘भतीजे’ (nephew) शब्द को हटा दिया गया था, जिससे तमन सिंह सोनवानी के रिश्तेदारों के सिलेक्शन में आसानी हो गई।

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