CGPSC ने 265 पदों की राज्य सेवा परीक्षा 2025 का Interview और दस्तावेज सत्यापन रोका

CGPSC ने 265 पदों की राज्य सेवा परीक्षा 2025 का Interview और दस्तावेज सत्यापन रोका

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) ने बुधवार को राज्य सेवा परीक्षा-2025 के लिए दस्तावेज सत्यापन और साक्षात्कार की प्रक्रिया को टाल दिया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि यह प्रक्रिया 20 सितंबर से एक अक्टूबर के बीच होनी थी, लेकिन कुछ ‘‘अपरिहार्य कारणों’’ से इसे स्थगित कर दिया गया।

उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया छत्तीसगढ़ सरकार के तहत 20 विभागों में 265 पदों पर भर्ती से जुड़ी है। बुधवार को जारी एक नोटिस में आयोग ने कहा कि दस्तावेज सत्यापन और साक्षात्कार के लिए नई तारीखों की घोषणा उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर की जाएगी। सीजीपीएससी ने इसे टालने का कोई खास कारण नहीं बताया है, बस अपरिहार्य कारणों का जिक्र किया है।

उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे बदली हुई नई तारीख के लिए आयोग की आधिकारिक वेबसाइट को नियमित रूप से देखते रहें। राज्य सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा-2025 छत्तीसगढ़ के सभी ज़िला मुख्यालयों में 22 फरवरी, 2026 को आयोजित की गई थी। इसके बाद राज्य सेवा (मुख्य) परीक्षा अंबिकापुर, बिलासपुर, दुर्ग, जगदलपुर और रायपुर में तय केंद्रों पर आयोजित की गई थी।

यह स्थगन ऐसे समय में हुआ है जब कांग्रेस मूल्यांकन और ‘शॉर्टलिस्टिंग’ प्रक्रिया में ज्यादा पारदर्शिता की मांग कर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने मांग की थी कि साक्षात्कार तब तक टाल दिए जाएं जब तक उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का समाधान न हो जाए। उन्होंने साक्षात्कार से पहले उत्तरपुस्तिका जारी करने और सभी उम्मीदवारों (शॉर्टलिस्ट न होने वाले उम्मीदवारों सहित) को जांची गई उत्तरपुस्तिका की मुफ़्त प्रति देने की मांग की थी।

बघेल ने यह भी मांग की कि मूल्यांकन करने वालों के लिए मानदंड तय किए जाएं, मुख्य परीक्षा के लिए मॉडल उत्तर जारी किए जाएं और उत्तरपुस्तिका का दोबारा मूल्यांकन किया जाए। उन्होंने साक्षात्कार के लिए उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करने में 1:3 के अनुपात का पालन करने की भी मांग की है। कांग्रेस ने उत्तरपुस्तिका के मूल्यांकन में गड़बड़ी का आरोप लगाया और साक्षात्कार चरण के लिए शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों की संख्या पर सवाल उठाए।

सत्ताधारी भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि आयोग ने न्यूनतम क्वालिफाइंग अंक तय किए हैं और मूल्यांकन विषय विशेषज्ञों द्वारा उम्मीदवारों की पहचान छिपाकर किया जाता है।

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