Dilip Ghosh Statement: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA ब्लॉक के विरोध प्रदर्शन पर पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि क्या विपक्ष अब सुप्रीम कोर्ट को भी डराने की कोशिश कर रहा है।
Dilip Ghosh on India Bloc Protest: इंडिया गठबंधन के नेता आज चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से जुड़ी अपनी मांगों को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने वाले हैं। इस बीच, पश्चिम बंगाल के नेता दिलीप घोष ने इस विरोध प्रदर्शन को लेकर विपक्ष की आलोचना की। उन्होंने सवाल किया कि क्या विपक्ष अब सुप्रीम कोर्ट को भी डराने की कोशिश कर रहा है।
क्या अब आप सुप्रीम कोर्ट को डराने जा रहे हैं? – दिलीप घोष
इंडिया गठबंधन के विरोध प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए दिलीप घोष ने कहा कि विपक्ष का दोहरा चरित्र इस बात से साफ दिखता है कि जब देश के माननीय राष्ट्रपति उन्हें बातचीत के लिए आमंत्रित करते हैं, तो ये पार्टियां न तो बैठकों में शामिल होती हैं और न ही किसी सार्थक चर्चा में हिस्सा लेती हैं। लेकिन जब उन्हें अपनी मांगें मनवानी होती हैं, तो वे संस्थानों को निशाना बनाने के लिए सड़कों पर उतर आते हैं।
दिलीप घोष ने कहा, “राष्ट्रपति जी उन्हें बुलाते हैं, तो वे नहीं जाएंगे, बात नहीं करेंगे और चर्चा में शामिल नहीं होंगे। अब, आप सुप्रीम कोर्ट को भी नहीं बख्शेंगे, वहां भी ये आंदोलन करेंगे, इसका क्या मतलब है? आप हर किसी को डराते हैं।” दिलीप घोष ने आगे कहा, “एक तरफ वो बोलते हैं कि प्रधानमंत्री डर गए, सरकार डर गई। अब सुप्रीम कोर्ट को भी डराने जा रहे हैं क्या? इस देश में कानून-व्यवस्था के ऊपर कोई नहीं है।”
कांग्रेस को इतिहास नहीं भूलना चाहिए- दिलीप घोष
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयानों पर पलटवार करते हुए दिलीप घोष ने कहा कि आज विपक्षी नेता मीडिया के सामने जो खुलकर बोल पा रहे हैं, यह बोलने का अधिकार और लोकतांत्रिक आजादी भारतीय जनता पार्टी के शासन में ही सुरक्षित रखा गया है। उन्होंने कहा कि खरगे और कांग्रेस को यह नहीं भूलना चाहिए कि उनके कार्यकाल में देश और विपक्ष के साथ क्या हुआ था।
दिलीप घोष ने कहा कि इमरजेंसी को 50 साल बीत चुके हैं और कांग्रेस का इतिहास इस बात का गवाह है कि उन्होंने किस तरह बेशर्मी से देश के संविधान, प्रशासनिक व्यवस्था, न्यायपालिका और संवैधानिक पदों पर बैठे संस्थानों और हस्तियों का अपमान किया। घोष ने कहा कि अच्छी बात है कि आज इस विषय पर खुलकर चर्चा हो रही है, जिससे जनता यह देख सकती है कि असल में संवैधानिक संस्थानों का अनादर करने का इतिहास किसका रहा है।

