Regional: ईरान और ओमान के विदेश मंत्रियों ने युद्धविराम और अन्य कूटनीतिक मुद्दों पर अहम चर्चा की है। इस बड़ी खबर ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। रीजनल स्तर पर इस कूटनीतिक कदम को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देशों के शीर्ष राजनयिकों ने मध्य पूर्व के मौजूदा हालात, बढ़ते सैन्य तनाव और स्थायी शांति बहाली के उपायों पर लंबी बातचीत की है। यह बैठक ऐसे नाजुक समय में हुई है, जब ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद सहित कई अन्य मंचों पर शांति वार्ताओं का दौर चल रहा है।
युद्ध किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं
इस महत्वपूर्ण वार्ता के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और उनके ओमानी समकक्ष के बीच इस बात पर गहरी सहमति बनी है कि युद्ध किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। ओमान हमेशा से ही खाड़ी देशों और पश्चिमी देशों (विशेषकर अमेरिका) के बीच एक भरोसेमंद और तटस्थ मध्यस्थ की भूमिका निभाता आया है। इस बार भी ओमान ने क्षेत्रीय स्थिरता को बहाल करने के लिए अपनी सक्रिय कूटनीतिक ताकत का इस्तेमाल किया है। दोनों देशों ने बातचीत के जरिए सुरक्षा चिंताओं को दूर करने और व्यापारिक रास्तों को सुरक्षित बनाने पर जोर दिया है।
आक्रामकता कम करने से ही मजबूत युद्धविराम लागू हो सकेगा
ईरानी न्यूज़ एजेंसियों का दावा है कि इस बड़ी बैठक का मुख्य एजेंडा केवल सैन्य तनाव कम करना ही नहीं था, बल्कि क्षेत्र से जुड़ी आर्थिक और कूटनीतिक पाबंदियों के पेचीदा मसले को सुलझाना भी था। ईरान लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि युद्धविराम तभी प्रभावी होगा जब सभी पक्ष, विशेषकर अमेरिका, एक निष्पक्ष समझौते का सम्मान करेंगे। बातचीत के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि आक्रामकता कम करने से ही पूरे क्षेत्र में एक मजबूत युद्धविराम लागू हो सकेगा। ईरान और ओमान की इस बैठक पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। भू-राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ओमान की यह शांत लेकिन प्रभावी मध्यस्थता मध्य पूर्व में एक स्थायी शांति ला सकती है। दुनिया भर के कूटनीतिक हलकों में इस कदम की सराहना की जा रही है और इसे विनाशकारी युद्धों को रोकने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।
इस्लामाबाद और अन्य वैश्विक मंचों पर बातचीत जारी रहने की उम्मीद
इस महत्वपूर्ण बैठक के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश इस शांति प्रस्ताव पर आगे बढ़ते हैं या नहीं। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडलों की बातचीत इस्लामाबाद और अन्य वैश्विक मंचों पर जारी रहने की उम्मीद है। यह देखना दिलचस्प होगा कि ईरान की शर्तों पर वाशिंगटन क्या रुख अपनाता है।
खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षित समुद्री यातायात सुनिश्चित होगा
इस पूरी वार्ता का एक बड़ा साइड एंगल होर्मुज जलडमरूमध्य और वैश्विक कच्चे तेल के व्यापार की सुरक्षा है। युद्धविराम से न केवल सैन्य तनाव और हथियारों की होड़ कम होगी, बल्कि खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षित समुद्री यातायात भी सुनिश्चित होगा। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आ रही भारी उछाल पर लगाम लगेगी और वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी। ( इनपुट: ANI)


