सीजफायर महज एक धोखा ? हिजबुल्लाह ने इजरायली टैंकों पर बरसाए बम, लेबनान में फिर भारी तबाही!

सीजफायर महज एक धोखा ? हिजबुल्लाह ने इजरायली टैंकों पर बरसाए बम, लेबनान में फिर भारी तबाही!

Southern Lebanon: मध्य पूर्व में शांति की उम्मीदों को एक बार फिर बहुत तगड़ा झटका लगा है। दक्षिणी लेबनान में इजरायल और लेबनान के बीच लागू सीजफायर के बावजूद भीषण संघर्ष जारी है। ईरान समर्थित लेबनानी सशस्त्र समूह हिजबुल्लाह ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उसने दक्षिणी लेबनान में इजरायली सैनिकों, उनके सैन्य वाहनों और तोपखानों पर घातक हमले किए हैं। इस ताजा सैन्य कार्रवाई ने दोनों देशों के बीच हुए शांति समझौते की प्रासंगिकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूरी दुनिया इस घटनाक्रम से डरी हुई है कि कहीं यह छिटपुट लड़ाई एक पूर्णकालिक क्षेत्रीय युद्ध में न बदल जाए।

रणनीतिक इलाकों में सेना पर सीधा प्रहार

हिजबुल्लाह की ओर से जारी किए गए ताजा अपडेट्स के मुताबिक, उनके लड़ाकों ने विशेष रूप से रणनीतिक तटीय इलाके बिय्यादा को अपना निशाना बनाया है। इस क्षेत्र में इजरायली सैनिकों और उनके सैन्य वाहनों के जमावड़े पर भारी गोलाबारी की गई है। इसके साथ ही, अल-कौजाह कस्बे में भी एक बड़ा सैन्य ऑपरेशन चलाया गया, जहां हिजबुल्लाह ने अत्याधुनिक ड्रोन का इस्तेमाल करते हुए एक इजरायली टैंक पर सीधा और सटीक प्रहार किया। इस हमले में इजरायली सेना को कितना नुकसान हुआ है, इसकी सटीक जानकारी अभी बाहर नहीं आई है, लेकिन इस ड्रोन स्ट्राइक ने इजरायल की सुरक्षा चिंताओं को और गहरा कर दिया है।

बुलडोजरों और सैन्य उपकरणों को किया तबाह

हमलों का यह सिलसिला केवल यहीं तक सीमित नहीं रहा। हिजबुल्लाह ने अपनी एक अन्य रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि उसने दीर सिरयान और रशफ जैसे प्रमुख लेबनानी कस्बों में भी इजरायली ठिकानों को बर्बाद किया है। इन इलाकों में विशेष रूप से इजरायली सेना के बुलडोजरों और निर्माण उपकरणों को निशाना बनाया गया, जो संभवतः सैन्य बंकरों या रास्तों के निर्माण में लगे हुए थे। हिजबुल्लाह का यह आक्रामक रुख साफ दर्शाता है कि वह इजरायली सेना की किसी भी जमीनी घुसपैठ या उनके इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार का कड़ा विरोध कर रहा है।

नाम का बचा है सीजफायर, जारी है खूनी खेल

मौजूदा समय में इजरायल और लेबनान के बीच आधिकारिक तौर पर युद्धविराम लागू है, जिसे लंबे अंतरराष्ट्रीय दबाव और मध्यस्थता के बाद स्वीकार किया गया था। हालांकि, जमीनी हकीकत इस समझौते से बिल्कुल उलट नजर आ रही है। दोनों पक्षों के बीच लगातार हो रही गोलाबारी से यह साबित हो गया है कि यह शांति बेहद नाजुक और अस्थाई है। जब तक सीमा विवाद और राजनीतिक मुद्दों का कोई स्थायी हल नहीं निकलता, तब तक दक्षिणी लेबनान में शांति स्थापित होना नामुमकिन सा लग रहा है।

संयुक्त राष्ट्र के शांति दूतों ने सीजफायर के उल्लंघन पर चिंता जताई

संयुक्त राष्ट्र के शांति दूतों ने सीजफायर के इस ताजा उल्लंघन पर गहरी चिंता व्यक्त की है और दोनों पक्षों से तुरंत सैन्य कार्रवाई रोकने की अपील की है। वहीं, लेबनान के स्थानीय नागरिकों में फिर से युद्ध भड़कने को लेकर भारी दहशत का माहौल है। इस हमले के बाद इजरायली डिफेंस फोर्सेज ने भी हाई अलर्ट जारी कर दिया है। माना जा रहा है कि इजरायल जल्द ही दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर कोई बड़ी जवाबी एयरस्ट्राइक कर सकता है।

हिजबुल्लाह इजरायल पर दबाव बनाए रखने के पक्ष में

बहरहाल, सीजफायर की घोषणा के बाद जो आम नागरिक अपने टूटे हुए घरों को वापस लौटने की उम्मीद कर रहे थे, इन ताजा हमलों ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। इसके अलावा, हिजबुल्लाह के इस कदम को ईरान के उस परोक्ष समर्थन के रूप में भी देखा जा रहा है, जो इजरायल पर लगातार मनोवैज्ञानिक दबाव बनाए रखना चाहता है।

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