Prof. Sanjay Dwivedi की Book ‘संजय उवाच’ बनी ‘संवाद की सभ्यता’ का घोषणापत्र, जानिए क्या है इसमें खास
कुछ लोग जब बोलते हैं, तो शब्द नहीं, विचारों की बौछार होती है। कभी वह बौछार भिगो देती है, कभी चौंका देती है, और कभी-कभी असहज भी कर देती है। प्रो. संजय द्विवेदी ऐसे ही वक्ता हैं। उनकी बातचीत की शैली में चुटकियाँ भी हैं, तंज भी, और वह बेधड़क स्पष्टता भी, जो कभी मुरीद…


