कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे में इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया। पार्टी ने कहा कि अगर उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया तो देशभर में आंदोलन करेंगे। इसके बाद दिल्ली में प्रदर्शन करेंगे। पार्टी फाउंडर अभिजीत दीपके ने SIR को लेकर चुनाव आयोग के आयुक्तों में मतभेद की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा- ज्ञानेश कुमार इस देश के सबसे बड़ा गद्दार हैं। वह सबसे बड़े एंटी-नेशनल हैं। दीपके ने आरोप लगाया कि SIR के जरिए देश में 13 करोड़ से ज्यादा वोट डिलीट किए गए हैं। उन्होंने कहा कि लोगों से वोट देने का अधिकार छीना जा रहा है। दीपके ने कहा- लोकतंत्र का मतलब है कि जनता सरकार चुने, लेकिन ज्ञानेश कुमार के मुख्य चुनाव आयुक्त बनने के बाद सरकार यह तय कर रही है कि कौन वोट करेगा और कौन नहीं। ज्ञानेश कुमार देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं। जब से वह मुख्य चुनाव आयुक्त बने हैं, सरकार यह तय कर रही है कि कौन वोट करेगा और कौन नहीं। क्या यह लोकतंत्र है? आपने लोकतंत्र की पूरी परिभाषा ही बदल दी है। यह लोकतंत्र नहीं, ऑटॉक्रेसी है।
2. 13 करोड़ से ज्यादा वोट डिलीट होने का दावा
कुल 13 करोड़ से ज्यादा वोट डिलीट किए गए हैं। यह कोई छोटी संख्या नहीं है। 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष और सत्ताधारी गठबंधन के बीच अंतर सिर्फ 2% था। 13 करोड़ वोट हटाना कुल वोटों के करीब 13 से 14% के बराबर है। क्या ज्ञानेश कुमार जानबूझकर ये वोट डिलीट कर रहे हैं, ताकि 2% का अंतर और बढ़ जाए और वे कभी सत्ता न हारें? इतने वोट डिलीट करने की जरूरत क्यों पड़ी?
3. क्षेत्रीय नेताओं को एक-एक कर हराने का आरोप
2024 के चुनाव में BJP बहुमत हासिल नहीं कर सकी। ‘400 पार’ का नारा देने के बाद वह 240 सीटों पर आ गई। इसके बाद उन्हें लगा कि देश का मूड बदल रहा है और क्षेत्रीय ताकतें मजबूत हो रही हैं। चाहे महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे हों, NCP, एमके स्टालिन, पिनराई विजयन, अरविंद केजरीवाल या ममता बनर्जी—इन सभी मुख्यमंत्रियों को एक-एक करके हराया गया। यह महज संयोग नहीं हो सकता। इसमें एक पैटर्न दिखाई देता है।
4. ममता, स्टालिन और केजरीवाल की सीटों पर वोट डिलीट होने का दावा
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सीट से 50 हजार वोट डिलीट किए गए और वह करीब 15 हजार वोटों से हार गईं। एमके स्टालिन की सीट से 1 लाख वोट डिलीट किए गए और वह करीब 45 हजार वोटों से हार गए। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सीट से 40 हजार वोट डिलीट किए गए और वह करीब 4 से 5 हजार वोटों से हार गए।
क्या यह कदम सिर्फ मजबूत विपक्षी नेताओं को खत्म करने के लिए उठाया गया था? हमें विपक्ष या किसी खास पार्टी से कोई विशेष लगाव नहीं है। लेकिन अगर लोकतंत्र में पूरे विपक्ष को ही खत्म कर दिया जाए, तो क्या इसे लोकतंत्र कहा जा सकता है? क्या यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव है? सौरभ दास ने कहा, ‘यह सिस्टम बदलना चाहिए, लेकिन यह सिस्टम कैसे बदलेगा। आपके पास केवल एक ही टूल है वोट का। यदि यह भी आपने छीन लिया जाए तो कैसे बदलाव आएगा। पूरे देश में लोग हमसे पूछ रहे हैं कि कैसे बदलेगा, हमारे वोट का महत्व नहीं है। अब जो रिपोर्ट आई है उसे देश के सभी युवाओं को पढ़ना चाहिए। SIR से 13 करोड़ से ज्यादा वोटर को आपने डिलीट कर दिया। कल भी रिपोर्ट आई थी आज भी आई। पिछले 10 महीने में 14 आपत्तियां हुईं चुनाव आयोग में। दो अन्य चुनाव आयुक्तों ने बहुत सारी अवैध चीजों को फाइल में लिखा और कहा कि सबकुछ अच्छा नहीं है। SIR विवाद पर चुनाव आयोग बोला- फैसले सर्वसम्मति से हुए हालांकि, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्ट पर चुनाव आयोग ने अपना पक्ष रखा था। आयोग ने कहा था कि बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग राय, सुझाव और टिप्पणियां आना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग ने कहा कि SIR समेत पिछले एक साल में लिए गए सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं। यह सफाई इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट के बाद आई, जिसमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज किए जाने का दावा किया गया था। रिपोर्ट में फॉर्म-6 में बदलाव, वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने-हटाने और वोटर डेटाबेस के केंद्रीकरण जैसे मुद्दों पर आपत्तियों का जिक्र था। चुनाव आयोग ने इन दावों पर 8 पॉइंट में अपना जवाब दिया है। 6 अगस्त- अभिजीत दीपके गांव-शहरों में युवाओं से बात करेंगे CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके ने 6 अगस्त को प्रेस कॉन्फ्रेंस में सितंबर से देशभर में ‘क्या बोलती पब्लिक’ अभियान शुरू करने की बात कही थी। दीपके ने महाराष्ट्र के संभाजीनगर में यह घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि संगठन गांव-शहर जाकर युवाओं से बात करेगा। साथ ही, बेरोजगारी और महंगी शिक्षा को मुद्दा बनाएगा। पूरी खबर पढ़ें…

