हमारी जिदंगी दूसरों को सुधारने में बर्बाद हो रही
रतलाम। हमारी जिदंगी दूसरों को सुधारने में बर्बाद हो रही। संत दूसरों को समझाता है कि क्रोध, मान, माया, लोभ और राग-द्वेष मत करो। यदि वे खुद ये करेंगे, तो उनकी वाणी का असर कैसे होगा? ऐसे ही बच्चों को वंदना करने को सब कहते है, लेकिन खुद नहीं करते, तो वंदना कहां होगी। सभी…

