15 की उम्र में अंग्रेजों से भिड़ गए थे त्रिवेणी:दुल्हिन बाजार के काब गांव के लड़के ने तिरंगे की शान के लिए सिर में खाई थी गोली
इतिहास के पन्नों पर स्याही से तो बहुत कुछ लिखा जाता है, लेकिन कुछ दास्तां ऐसी होती हैं जिन्हें लिखने के लिए वीर अपना खून बहाते हैं। यह गाथा है पटना के बिक्रम की माटी के उस जांबाज सपूत ‘शहीद त्रिवेणी सिंह’ की है, जिन्होंने तिरंगे की शान को बनाए रखने के लिए अपने माथे…

